नैनीताल: ईसाई स्कूलों पर प्रशासन का डंडा चला तो जारी की दिवाली की छुट्टी की 'पर्ची'

30 अक्टूबर, 2021
मिशनरियों द्वारा संचालित स्कूलों ने घोषित की दीपावली की छुट्टी

उत्तराखंड के नैनीताल में कुछ हिंदूवादी संगठनों ने कई कॉन्वेंट स्कूलों द्वारा दिवाली पर छात्रों को अवकाश न देने का मामला उठाया था। मामले को लेकर जनता ने सोशल मीडिया पर आवाज़ उठाई जिसके बाद अब स्कूल प्रशासन का कहना है कि उन्होंने पहले ही दिवाली की छुट्टी की घोषणा कर दी थी और किसी गलतफहमी के कारण यह ‘फेक न्यूज़’ फैली है।

उत्तराखंड के कई क्षेत्रों में ईसाई मिशनरियों द्वारा भारी मात्रा में पंथ-परिवर्तन जैसे कृत्य जारी हैं। गरीब लोगों को धन का लालच देकर या दबाव बनाकर मिशनरियों द्वारा भारी मात्रा में मतांतरण किया जा रहा है।

शुक्रवार (29 अक्टूबर) को यह मामला सामने आया जब हल्द्वानी के एक पार्षद मनोज जोशी द्वारा छात्रों को दिवाली का अवकाश न दिए जाने को लेकर शिकायत की गई। पार्षद ने आरोप लगाया कि नैनीताल के कई कॉन्वेंट स्कूल जैसे सेंट मेरी, सेंट जोसेफ, ऑल सेंट समेत कई अन्य स्कूलों द्वारा दिवाली पर छात्र-छात्राओं के लिए अवकाश घोषित नहीं किया गया था।

इस विषय में विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल जैसे कुछ संगठनों द्वारा संज्ञान लिया गया और प्रशासन से इसकी शिकायत की गई।

नैनीताल के मुख्य शिक्षा अधिकारी को इस विषय में पत्र लिखते हुए बताया गया कि क्षेत्र के पार्षद मनोज जोशी द्वारा इस बात से अवगत कराया गया है कि नैनीताल के कई ईसाई मिशनरियों द्वारा संचालित स्कूल कोविड के मानकों का बहाना बनाकर छात्र-छात्राओं को दिवाली पर अवकाश नहीं दे रहे हैं। पत्र में इससे संबंधित आवश्यक कार्रवाई करने का भी अनुरोध किया गया।

आक्रोश के बाद स्कूल ने जिला प्रशासन पर ही लगाया आरोप

सोशल मीडिया द्वारा मामले के तूल पकड़ने के बाद स्कूल द्वारा छात्र-छात्राओं को छुट्टियाँ दे दी गईं हैं। हालाँकि, स्कूल इस सब के बाद भी अपनी गलती न मानते हुए यह कहकर अपना बचाव कर रहा है कि उन्होंने पहले ही छुट्टी घोषित कर दी थीं और ‘किसी गलतफहमी के कारण यह फेक न्यूज़’ फैली है।


इस विषय में ऑल सेंट कॉलेज नैनीताल की प्रधानाचार्य केई जरमायाह ने ज़िलाधिकारी को पत्र लिखते हुए बताया कि उनके स्कूल द्वारा पहले ही दिवाली की छुट्टियाँ घोषित कर दी गई थीं और स्कूल की वेबसाइट पर भी इस विषय में सूचना साझा की गई थी। 

आगे पत्र में प्रधानाचार्य ने यह भी कहा कि जिस किसी ने भी यह झूठी सूचना फैलाने वाले और भ्रमित करने का कृत्य किया है उसके विरुद्ध कार्रवाई की जाए।

इस पूरे मामले में स्कूल की पोल इस बात से खुलती है कि स्कूल द्वारा ज़िलाधिकारी को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि ज़िला अधिकारी द्वारा स्कूल को ईमेल भेजा गया था, जबकि ज़िलाधिकारी द्वारा कोई ईमेल नहीं भेजा गया था, सिर्फ अपर ज़िलाधिकारी ने नैनीताल के मुख्य शिक्षा अधिकारी को पत्र लिखकर इस प्रकरण की सूचना देते हुए कार्रवाई के आदेश दिए थे।

सोशल मीडिया पर इस प्रकरण को ले कर जमकर बवाल हो रहा है और लोग इस बात से आक्रोशित नजर आ रहे हैं कि हिंदूवादी त्योहारों को एक योजनाबद्ध तरीके से समाप्त करने की योजना बनाई जा रही है। दिवाली पर पटाखों पर लगाई जा रही रोक से लोग पहले से ही नाराज हैं।



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