बंगाल: वीरान भवन और तालाब से मिली 2 भाजपा कार्यकर्ताओं की लाश, TMC पर हत्या का आरोप

03 अगस्त, 2021 By: डू पॉलिटिक्स स्टाफ़
बंगाल में दो और भाजपा कार्यकर्ताओं की लाश मिली हैं

पश्चिम बंगाल में मंगलवार (2 अगस्त, 2021) को दो और भाजपा कार्यकर्ताओं के शव बरामद हुए हैं। भाजपा नेताओं का आरोप है कि इसमें सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कॉन्ग्रेस का हाथ है।  

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों के नतीजों के 3 महीनों बाद भी राजनीतिक हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है। 2 मई, 2021 को विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद से ही लगातार तृणमूल कॉन्ग्रेस के गुंडों द्वारा भाजपा एवं संघ कार्यकर्ताओं की हत्याएँ व राज्य में उपद्रव के सैकड़ों मामले सामने आए हैं। राज्य में महिलाओं के साथ बलात्कार के भी कई मामले सामने आए थे। 

पश्चिम बंगाल के बीरभूम ज़िले में एक लावारिस बिल्डिंग में भाजपा कार्यकर्ता का लटका शव बरामद किया गया। इस व्यक्ति की पहचान इंद्रजीत सूत्रधार (Indrajit Sutradhar) के रूप में हुई है।

जिस समय शव बरामद हुआ उसके दोनों हाथ पीछे बंधे थे। इसी कारण इस मामले में हत्या का अनुमान लगाया जा रहा है। पुलिस ने फिलहाल शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है, जिससे हत्या की पुष्टि हो पाएगी। 

स्थानीय भाजपा नेताओं ने मामले में हत्या का दावा करते हुए स्थानीय तृणमूल के गुंडों पर इसका आरोप लगाया है। मृत भाजपा कार्यकर्ता के परिवार वालों ने एक व्यक्ति पर आरोप लगाया है, जो सोमवार रात से ही इलाके से गायब था और उसकी मृतक इंद्रजीत सूत्रधार के साथ कुछ निजी दुश्मनी भी बताई जा रही है।

तालाब में मिला 45 वर्षीय कार्यकर्ता का शव

ऐसे ही एक अन्य मामले में पूर्व मेदिनीपुर ज़िले से एक 45 वर्षीय अन्य भाजपा कार्यकर्ता तपन खटुआ का शव एक तालाब से बरामद किया गया। इस मामले में भी स्थानीय भाजपा नेता और मृतक का परिवार सत्ताधारी पार्टी तृणमूल पर आरोप लगा रहा है। 

दोनों मामलों में तृणमूल सरकार पल्ला झाड़ती दिखी। पार्टी नेताओं की ओर से बयान आया है कि सूत्रधार को निजी दुश्मनी के कारण मारा गया एवं अन्य मृतक तपन ने आत्महत्या की है। फिलहाल दोनों मामलों पर विस्तृत जाँच जारी है।

बता दें कि पश्चिम बंगाल में बीते 3 महीनों से ही भीषण हिंसा एवं आगजनी देखने को मिली है। विभिन्न क्षेत्रों में दंगे और तृणमूल कार्यकर्ताओं द्वारा उपद्रव जारी है।

हिंसा के हज़ारों मामले दस्तावेजों से गायब

नेशनल ह्यूमन राइट कमीशन (NHRC) की रिपोर्ट में भी सामने आया कि राज्य के पुलिस प्रशासन द्वारा अधिकतर मामलों को जाँच किए बिना ही छोड़ दिया गया। कलकत्ता उच्च न्यायालय के सामने वरिष्ठ वकील महेश जेठमलानी ने बताया कि जहाँ NHRC ने राज्य में 52 हत्याओं के मामले पाए, वहीं पुलिस ने केवल 29 शिकायतें दर्ज कीं हैं। इसी प्रकार NHRC की रिपोर्ट में 14 बलात्कार के मामले हैं, तो बंगाल पुलिस के मुताबिक राज्य में बलात्कार की एक भी घटना हुई ही नहीं है।

आँकड़ों के अनुसार राज्य में कुल 3,384 वारदातें हुईं, जिनमें राज्य प्रशासन ने 1,356 वारदातों को झूठा करार दे दिया। हज़ार से अधिक मामले पुलिस प्रशासन ने दर्ज ही नहीं किए। जेठमलानी ने आगे कहा कि अगर राज्य प्रशासन ने अपना कार्य ठीक से किया होता तो न्यायालय तक यह मामला लाने की आवश्यकता ही न होती।



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