‘जनरल एडमिरल’ NDTV ने अर्धसैनिक बलों की 200 टुकड़ियाँ भेज दी कश्मीर

07 जून, 2021 By: संजय राजपूत
समाचार जगत का 'हकीम लुकमान' बन चुका है एनडीटीवी

अफवाहों और अजेंडे के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध NDTV ने एक नई अफवाह फैलाते हुए कश्मीर में अर्धसैनिक बलों की बड़ी तैनाती की खबर बनाते हुए सनसनी पैदा करने की कोशिश की है। अधिकारियों ने घाटी में सेना बढ़ाए जाने की खबरों का खंडन किया है।


दरअसल कई राज्यों में विधानसभा और पंचायत चुनाव के चलते कश्मीर से अतिरिक्त सैन्य टुकड़ियों को देश भर चुनावी प्रबंधन के लिए भेजा था। चुनावों के बाद ये कम्पनियाँ वापस तैनाती के लिए कश्मीर अपनी पोजीशन पर जा रही हैं।

इसी खबर को ‘सन्नाटे को चीरती सनसनी’ जैसी स्टोरी बनाते हुए NDTV ने खबर बना दी कि कश्मीर में फिर से बड़े पैमाने पर सेना की तैनाती हो रही है।

अपने प्रोपेगेंडा को स्थानीय निवासियों के हवाले से बताते हुए NDTV लिखता है कि ‘शायद कश्मीर में फिर से कुछ बड़े नेताओं को नज़रबंद किया जाने वाला है’। प्रोपेगेंडा चैनल लिखता है कि कश्मीर में ‘कुछ बड़ा होंने वाला है’, इसलिए बड़ी मात्रा में वहाँ अर्धसैनिक बल तैनात किए जा रहे हैं।

हालाँकि, प्रोपेगेंडा समाचार चैनल के दावे से एकदम परे अधिकारियों ने इन खबरों का पूरी तरह खंडन करते हुए कहा है कि सेना की टुकड़ियाँ असम पश्चिमी बंगाल जैसे राज्यों से चुनाव संपन्न कराकर वापस लौट रही हैं। अधिकारियों ने कहा कि नई तैनाती नहीं की जा रही है और न ही कोई बड़ा उलटफेर होने जा रहा है।

दरअसल NDTV को इस बात से परेशानी नहीं है कि कश्मीर में सेना क्यों वापस आ रही है, ना ही उसे इस बात से परेशानी है कि कश्मीर में क्या बड़ा या छोटा होने वाला है।

NDTV को परेशानी इस बात से है कि मोदी सरकार में कश्मीर में अब इतनी शांति क्यों है। भारत मे शांति और सुकून, ये दो ऐसी चीजें हैं जो NDTV को कभी रास नहीं आती है।

चूँकि, ‌अब फोन कर के कैबिनेट मंत्री बनवाने की क्षमता NDTV या इसके पत्रकारों में नहीं रही, तो वो अब शायद किसी सस्ते नशे के झोंक में स्वतः संज्ञान लेते हुए स्टूडियो से ही पैरामिलिट्री की 200 कम्पनियाँ कश्मीर भेज देते हैं और लिखते हैं कि ‘कुछ बड़ा होने वाला है’। ये ‘कुछ’ क्या बड़ा होता है, ये वहाँ के विलक्षण पत्रकार ही बता पाएँगे।

वास्तव में, पिछले दिनों यह खबर आई थी कि कश्मीर में मौजूदा शांति को देखते हुए सरकार घाटी में सेना की तैनाती घटाने पर विचार कर रही है। अब कश्मीर में शांति हो और यह एनडीटीवी को हजम हो जाए, ऐसा होना तो मुमकिन नहीं, इसलिए जरूरी है कि कश्मीर में अशांति का नया दौर शुरू करने के लिए लोगों को भड़काया जाए। भड़काने के लिए जरूरी है कि लोगों को डराया जाए। लोग डरेंगे तभी तो NDTV के बागों में बहार रहेगी।

असल मे NDTV की रोजी रोटी ही ‘डर के माहौल’ से चलती है। इनका ‘धंधा’ ही डर बाँटना है। NDTV हर बृहस्पतिवार बस अड्डे के पीछे बैठने वाले उस हकीम की तरह है, जो लोगों की साधारण नैसर्गिक शारीरिक क्रियाओं को भी गुप्त रोग की संज्ञा देकर पैसे ऐंठ लेता है।

NDTV की खबरें दीवारों पर छपे ‘निराश रोगी मिलें’ जैसे इश्तहारों से समतुल्य होती हैं, जिनमें ‘डर’ छुपा होता है। हकीम ‘पुड़िया’ में गुप्त रोग की तथाकथित दवा देकर डरे हुए लोगों से कमाई करता है। NDTV भी अपनी पुड़िया में ‘डर’ बेचकर ही कमाई करता है।

अनाधिकृत रूप से चीन का ये प्रमुख ख़बरबाज़ चैनल अपनी मर्जी से ही कहीं भी सेना की तैनाती ही नहीं कर देता बल्कि ये जामिया के पत्थरबाजों के हाथ में पकड़े पत्थर को पर्स और किताबें बनाने का चमत्कार भी करता है।

सीएए विरोध के समय गुजरात मे तनिष्क ज्वेलरी के शोरूम में हमले की फर्जी अपवाह उड़ाने का कारनामा भी कर चुका है। इससे पहले मई, 2020 में चीन द्वारा भारतीय फौजियों को कब्जे में लेने की फ़र्ज़ी खबर भी NDTV छाप चुका है।

फ़र्ज़ी खबरों और देशविरोधी अजेंडे के चलते ही न्यूज़ टीवी के मार्केट से NDTV पहले ही बाहर हो चुका है। सोशल साइट पर छोटे न्यूज़ पोर्टल भी NDTV को उसके ही स्टाइल में गिरा रहे हैं।

तथ्यात्मक रिपोर्टिंग छोड़कर राहुल गाँधी का डायपर चेंज करने में लगा NDTV लोगों को फ़र्ज़ी खबरों के माध्यम से बरगलाने की कोशिश करता रहता है और जब टीआरपी घट जाती है तो आरोप लगाता है कि अमित शाह हर वक्त छत पर बैठक एंटीना हिलाते रहते है ताकि NDTV के सिग्नल गायब हो जाएँ।





सहयोग करें
वामपंथी मीडिया तगड़ी फ़ंडिंग के बल पर झूठी खबरें और नैरेटिव फैलाता रहता है। इस प्रपंच और सतत चल रहे प्रॉपगैंडा का जवाब उसी भाषा और शैली में देने के लिए हमें आपके आर्थिक सहयोग की आवश्यकता है। आप निम्नलिखित लिंक्स के माध्यम से हमें समर्थन दे सकते हैं: