'पंजशीर के शेर' के सामने बेबस तालिबान: गुरिल्ला हमलों से बागियों ने मार गिराए 300 आतंकी

23 अगस्त, 2021 By: डू पॉलिटिक्स स्टाफ़
तालिबानी आतंकियों को टक्कर दे रहा ‘पंजशीर का शेर’

अफगानिस्तान के बगलान प्रांत में तालिबानियों से कुल 3 ज़िले मुक्त कराने के बाद अब अफगानी लड़ाकों ने 300 तालिबानी आतंकियों को मार गिराया है। स्थानीय लड़ाकों ने घात लगाकर इन आतकियों पर हमला किया। 

काबुल समेत अफगानिस्तान के लगभग सभी बड़े प्रांतों पर कब्ज़ा कर चुके आतंकी संगठन तालिबान को अब धीरे-धीरे स्थानीय लोगों द्वारा उन्हीं की भाषा में जवाब दिया जा रहा है। स्थानीय लोग इस आतंकी संगठन के विरुद्ध गोली का जवाब गोली से देने को तैयार हो गए हैं और कई प्रांतों से मुठभेड़ और तालिबानियों के मारे जाने के भी समाचार आ रहे हैं।

धीरे-धीरे सभी प्रांतों पर कब्ज़ा कर चुका तालिबान बगलान के अंदराब की ओर अपने कदम बढ़ा रहा था, परंतु उन्हें क्या मालूम था कि वहाँ के स्थानीय लड़ाके इस आतंकी गिरोह की गतिविधि के लिए पहले से तैयार थे।

मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार इन घात लगाए लड़ाकों ने 300 तालिबानी आतंकियों पर हमला कर उन्हें मौत के घाट उतार दिया।


इन सभी मृत आतंकियों को तालिबान के फसीहुद्दीन ऑफिजु़ल्ला के नेतृत्व में पंजशीर पर हमला करने और क्षेत्र को कब्ज़ाने के लिए भेजा गया था, परंतु तालिबान की यह चाल स्थानीय लोगों ने विफल कर दी।

इन लड़ाकों का नेतृत्व अहमद मसूद एवं अफगानिस्तान के वर्तमान राष्ट्रपति अमरुल्ला सालेह द्वारा किया जा रहा है। सालेह ने ट्विटर के माध्यम से यह जानकारी साझा की और बताया कि तालिबानियों ने पंजशीर में दाखिल होने के लिए अपनी सेना छोड़ रखी है एवं एक दिन पहले ही बगलान प्रांत की अंदरब घाटी में लड़ाकों द्वारा घात लगाकर इन आतंकियों का सफाया किया गया है। इसके साथ ही लड़ाकों द्वारा सलंग हाईवे को भी बंद कर दिया गया है।


बता दें कि इससे पहले भी अफगानी बाग़ियों ने तालिबान के विरुद्ध हथियार उठाए थे और बानो, पोल-ए-हिसार एवं दे सालाह नामक ज़िलों को तालिबानियों के कब्ज़े से मुक्त करा लिया था। इन लड़ाकों ने मुठभेड़ में 40 तालिबानी आतंकियों को भी मार गिराया था एवं 15 से अधिक आतंकियों के घायल होने का भी समाचार आया था।

‘पंजशीर का शेर’ दे रहा टक्कर 

बता दें कि इन बाग़ी लड़ाकों का नेतृत्व ‘पंजशीर का शेर’ कहे जाने वाले ‘नॉर्दन अलायंस’ के प्रमुख अहमद मसूद द्वारा किया जा रहा है। अहमद मसूद, अहमद शाह मसूद के बेटे हैं। ये वही अहमद शाह मसूद हैं, जिन्होंने वर्ष 2001 से पूर्व अफ़गानिस्तान में तालिबान के शासन के दौरान तालिबानी और रूसी सेनाओं को अपने लड़ाकों के ही दम पर टक्कर दी थी।

तालिबानी आतंकियों एवं रूसी सेना दोनों ने ही कई बार पंचशील क्षेत्र पर कब्ज़ा करने का प्रयास किया था, परंतु उन्हें लगातार अहमद शाह मसूद से पराजय ही मिली थी। वर्ष 2001 में अलकायदा द्वारा अहमद शाह मसूद की हत्या कर दी गई। अलकायदा के आतंकी पत्रकारों का हुलिया बना कर आए थे एवं मसूद को बम से उड़ा दिया था।

अब लगभग 20 वर्षों बाद पुनः देश पर तालिबान का कब्ज़ा हो जाने के बाद उनके बेटे अहमद मसूद ने फिर तालिबान से लोहा लेने का निर्णय किया है। अहमद का कहना है कि वे अफगानिस्तान में एक स्थिर सरकार चाहते हैं, जिसमें हर किसी की बराबर की भागीदारी होनी चाहिए।

उन्होंने यह भी साफ किया कि वे किसी से कोई युद्ध नहीं चाहते परंतु अगर तालिबान हमला करेगा तो उनके लोग भी पीछे नहीं हटेंगे।



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