उत्तराखंड: 10 साल में निकल आए 400 मस्जिद-मदरसे, नेपाल सीमा से लगे इलाकों के आँकड़े चिंताजनक

29 सितम्बर, 2021 By: डू पॉलिटिक्स स्टाफ़
उत्तराखंड और यूपी में नेपाल सीमा से लगे क्षेत्रों में पिछले दस सालों में मुस्लिम आबादी बढ़ गई है

उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड राज्य से लगी पड़ोसी देश नेपाल की सीमा पर पिछले कुछ समय में एक विचित्र स्थिति सामने आई है। यहाँ पिछले 10 वर्षों में लगभग 400 मस्जिदें और मदरसे बने हैं। रिपोर्ट से यह व्याख्या सामने आने पर क्षेत्रीय लोगों की चिंता बढ़ गई है और उनका शक है कि क्षेत्र को चिन्हित करके यहाँ योजनाबद्ध तरीके से मुस्लिम आबादी बढ़ाई जा रही है।

उत्तराखंड राज्य के कई क्षेत्रों में भारी मात्रा में मुस्लिम आबादी की बसावट के कई मामले सामने आते रहे हैं। इसी विषय में अब इस क्षेत्र से एक नया खुलासा सामने आया है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में पिछले कुछ वर्षों में मुस्लिम आबादी बढ़ गई है और यहाँ में करीब 400 मस्जिदें और मदरसे खोले गए हैं। यह पूरा क्रियाकलाप पिछले 10 वर्षों में किया गया है।

रिपोर्ट से यह भी सामने आया है कि यह बसावट बांग्लादेश से लेकर पाकिस्तान तक जाने वाले जीटी रोड के दोनों तरफ कराई जा रही है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यह बसावट योजनाबद्ध तरीके से और तेज़ी से कराई जा रही है।

उत्तराखंड के कई क्षेत्र जैसे कि बनबसा, जौलजीबी पिथौरागढ़, धारचूला, खटीमा,झूलाघाट इत्यादि में मस्जिदें और मदरसे भारी संख्या में बनाए जा रहे हैं। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश के भी कई क्षेत्रों जैसे की बस्ती, बहराइच, गोरखपुर इलाकों में भी पिछले कुछ वर्षों में मुस्लिम आबादी और मस्जिद मदरसों दोनों की संख्या में भारी इज़ाफा हुआ है।

बता दें कि इन दोनों राज्यों के ये सभी क्षेत्र भारत के पड़ोसी देश नेपाल की सीमा से सटे हुए हैं। सुरक्षा की दृष्टि से देखा जाए तो यह एक गंभीर मामला है।

कहाँ से आ रही फंडिंग? 

रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ है कि बांग्लादेश सीमा से पाकिस्तान सीमा तक जाती जीटी रोड पर एक लंबे समय से योजनाबद्ध तरीके से मुस्लिम आबादी बरसाई जा रही है। इनमें बांग्लादेशी और रोहिंग्याओं की संख्या अधिक है।

उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के साथ-साथ बंगाल, बिहार, हरियाणा, पंजाब जैसे राज्यों से भी यह सड़क निकलती है और इन सभी राज्यों में एक चिन्हित आबादी को योजना बनाकर बसाना किसी समूह द्वारा साजिश के तहत ही कराया जा सकता है।

एक लंबी पट्टी पर एक चिन्हित आबादी को बसाना एक कॉरिडोर बनाने जैसी व्यवस्था हो सकती है और यह देश की सुरक्षा पर भारी खतरा माना जा सकता है। यह भी कहा जा रहा है कि इन मस्जिद और मदरसों की फंडिंग पड़ोसी देश पाकिस्तान एवं उसी में बसे कुछ इस्लामिक समूहों जैसे दावत ए इस्लामिया से आ रही है।

पहले भी पाकिस्तान के कई आतंकी संगठनों ने पड़ोसी देश नेपाल का उपयोग भारत में आतंकी गतिविधियाँ करने और उपद्रव मचाने के लिए किया है। बहुचर्चित कंधार विमान हाईजैक कांड की भूमिका थी नेपाल में ही बनाई गई थी।

इतिहास को देखते हुए आज के समय में नेपाल-भारत सीमा पर चल रही इस बसावट को नज़रअंदाज कर इस घटनाक्रम को हल्के में नहीं लिया जा सकता। सरकार को जल्द से जल्द इस मामले में संज्ञान लेने और कोई ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।

प्रदेश में जनसांख्यिक असंतुलन को लेकर उठने लगी हैं आवाज

हाल ही में उत्तराखंड में भाजपा के पूर्व प्रदेश महामंत्री गजराज सिंह बिष्ट के नेतृत्व में लोगों ने ‘लैंड जिहाद’ के खिलाफ रैली निकाली। शनिवार (25 सितंबर, 2021) को नैनीताल में निकली इस रैली में भाजपा नेता गजराज सिंह ने लोगों से कहा-

“हम अपने पूर्वजों को, अपने पितरों को इस श्राद्ध में इससे अच्छा तोहफा नहीं दे सकते हैं। हमारे पूर्वजों ने मुस्लिमों की 700 वर्षों तक गुलामी सही है। कश्मीर भी पहले हमारी तरह था, लेकिन वहाँ भी एक-एक करके मुस्लिम परिवार बढ़ते गए और हिंदुओं की संख्या घटती गई। जैसे ही कश्मीर में 60% मुस्लिम हुए उन्होंने 40% हिंदुओं को भगा दिया। आज भी कश्मीर के 23% ब्राह्मण दिल्ली में शरण लिए हुए हैं।”

‘लैंड जिहाद’ पर सरकार भी गम्भीर

उत्तराखंड राज्य में समुदाय विशेष की आश्चर्यजनकरूप से बढ़ती जनसंख्या एक लम्बे समय से लोगों के बीच चर्चा का विषय है। अतिक्रमण और लैंड जिहाद के मुद्दों पर स्थानीय लोगों के आक्रोश के बाद दबाव में आई राज्य सरकार भी अब मामले में गंभीर नजर आ रही है।

सम्भावना जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में धार्मिक स्थानों पर चार से पाँच किलोमीटर के दायरे को धार्मिक क्षेत्र घोषित किया जा सकता है और वहाँ जमीन की खरीद-फरोख्त पर भी प्रतिबंध लग सकता है।

दरअसल उत्तराखंड शासन के संज्ञान में आया है कि प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में एक धर्म विशेष की जनसंख्या में अत्यधिक वृद्धि होने से कई स्थानीय निवासी अपने क्षेत्रों से पलायन करने को मजबूर हो गए हैं। इसके अलावा सांप्रदायिक माहौल भी बिगाड़ा जा रहा है।



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