गरीबी, जमीन का बोझ कम करने के लिए जनसंख्या नियंत्रण के उपाय अपनाएँ अल्पसंख्यक: CM हिमांता

10 जून, 2021 By: डू पॉलिटिक्स स्टाफ़
सीएम हिमांता का अल्पसंख्यकों को संदेश

असम के मुख्यमंत्री हिमांता बिस्वा सरमा ने प्रदेश के अल्पसंख्यकों से जनसंख्या नियंत्रण अपनाने को कहा है। मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि राज्य में बढ़ती जनसंख्या के मुद्दे से निपटने के लिए वह अल्पसंख्यक समुदाय की महिलाओं को शिक्षित करेंगे।


असम में नवनिर्वाचित भाजपा सरकार के कार्यकाल को एक महीना पूरा होने के अवसर पर मुख्यमंत्री हिमांता पत्रकारों से बात कर रहे थे। असम के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री ने अल्पसंख्यक समुदाय को गरीबी और ‘जमीन पर बोझ’ कम करने के लिए उचित जनसंख्या नियंत्रण उपायों को अपनाने की नसीहत दी।

उन्होंने कहा है कि कोई भी हमारा दुश्मन नहीं है और हम चाहते हैं कि हर समुदाय के गरीब लोग प्रगति करें, लेकिन इसके लिए हमें सामुदाय के समर्थन की जरूरत है।

जनसंख्या नियंत्रण से गरीबी हटाने में मिलेगी मदद

मुख्यमंत्री हिमांता ने कहा कि जनसंख्या पर नियंत्रण रखने से जमीन पर दबाव कम करने में काफी मदद मिल सकती है और इससे हमें अल्पसंख्यक समुदाय की गरीबी दूर करने में भी मदद मिलेगी।

उन्होंने बोडो और मिशिंग समुदायों का उदाहरण भी दिया जिन्होंने परिवार नियोजन के कारण दशकों से वन भूमि पर कब्जा नहीं किया है।

हालाँकि, उन्होंने स्वदेशी वनवासियों को भूमि बंदोबस्त प्रमाण पत्र देने को फैसले को ये कहते हुए सही उचित ठहराया कि वो हमारे वन-संसाधनों की रक्षा करते हैं।

AIUDF और AAMSU से कहा- आलोचना के बजाय करें अपने समुदाय की भलाई

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की आलोचना करने के बजाय ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) और ऑल असम माइनॉरिटी स्टूडेंट्स यूनियन (AAMSU) जैसे संगठनों को अपने समुदाय के लोगों को छोटे परिवार रखने के लिए प्रेरित करना चाहिए।

सरमा ने अल्पसंख्यक समुदाय के सभी हितधारकों से आगे आने और गरीबी को कम करने और शिक्षा में सुधार करने में सरकार का समर्थन करने का आग्रह किया।


सीएम हिमांता ने कहा कि राज्य सरकार परिवार नियोजन के मुद्दे से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए समुदाय की महिलाओं को शिक्षित करने की दिशा में काम करेगी।

मंदिर/मठ और जंगल की जमीन पर कब्जा मंजूर नहीं

बृहस्पतिवार (10 जून, 2021) को असम में हिमांता सरकार के एक माह पूरे हो चुके हैं। इस अवसर पर राज्य के स्वामित्व वाली भूमि को अतिक्रमण से मुक्त करने के लिए चल रहे अभियान पर भी उन्होंने अपने विचार प्रकट किए।

अपनी सरकार के अभियान की आलोचना पर जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि मंदिरों, मठों और जंगलों से संबंधित भूमि पर अवैध कब्जे की अनुमति नहीं दी जा सकती है।

बता दें कि अवैध कब्जे वाली जमीनों से निकाले गए लोगों में ज्यादातर बंगाली भाषी मुसलमान थे। पत्रकारों से बात करते हुए सरमा ने कहा, “मुस्लिम समुदाय के सदस्यों ने हमें आश्वासन दिया है कि वे इन जमीनों पर अतिक्रमण नहीं करेंगे।”

असम में बिगड़ रहा है जनसंख्या संतुलन

यदि हम साल 1951 से असम के जनगणना के आँकड़ों पर नजर डालें तो 1951-61 के दौरान प्रदेश में हिंदू 33.71% और मुस्लिम 38.35% बढ़े, जबकि 1961 से 1971 के बीच हिंदू 37.17% और मुस्लिम 30.99% बढ़े।


इसी तरह 1971-91 के बीच असम में हिंदू 41.89% और मुस्लिम 77.41% बढ़े। सबसे ज्यादा चौंकाने वाले आँकड़े 1991 से 2001 के बीच के हैं। इस बीच बांग्लादेशी घुसपैठियों के आने से भी जनसंख्या के आँकड़ों में मुस्लिम समुदाय बढ़त बनाए हुए हैं।

इस दौरान मुस्लिम 29.30% बढ़े, जबकि हिंदुओं की जनसंख्या में कोई वृद्धि नहीं हुई। 2001 से 2011 के बीच असम में हिंदुओं के 10.9% के मुकाबले मुस्लिम आबादी 29.59% बढ़ गई।



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