वकीलों के गाउन ईसाइयत के प्रतीक: बैंड, कोट, सफ़ेद साड़ी पर HC ने बार काउंसिल से माँगा जवाब

17 जुलाई, 2021 By: डू पॉलिटिक्स स्टाफ़
वकीलों के लिए काले गाउन/कोट अनिवार्य करने वाले सर्कुलर को चुनौती

वकीलों के ड्रेस कोड को चुनौती देने वाली एक याचिका पर सुनवाई करते हुए शुक्रवार (16 जुलाई, 2021) को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया, हाईकोर्ट प्रशासन व केंद्र सरकार को तलब करते हुए 18 अगस्त तक अपना जवाब दाखिल करने को कहा है।

यह आदेश जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस अजय कुमार श्रीवास्तव प्रथम की बेंच ने लखनऊ के एक वकील अशोक पांडेय की जनहित याचिका का संज्ञान लेते हुए दिया। याची वकील अशोक पांडेय ने याचिका में कहा है कि बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया (BCI) का वर्ष 1975 में बनाया गया वर्तमान ड्रेस कोड बेतुका है।

याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में बार काउंसिल व हाईकोर्ट के उस नियम को चुनौती दी है, जिसमें अधिवक्ताओं को कोर्ट रूम में काला कोट, गाउन (Black gowns/coats) और बैंड धारण करने का प्रावधान किया गया है। याचिका में कहा गया है कि वकीलों की ड्रेस कोड भारत के मौसम के अनुकूल नहीं है।

याचिका के अनुसार:

“भारत एक ऐसा देश है जहाँ 9 महीने तक एक बड़ा हिस्सा लू और गर्मी की लहर की चपेट में रहता है। ऐसे में वकीलों के लिए ड्रेस कोड को बनाते वक्त इसका ध्यान में नहीं रखा गया।”

याची वकील का कहना है कि देश में जहाँ तमाम क्षेत्रों में 9 माह और कुछ क्षेत्रों में 12 माह गर्मी पड़ती है, वहाँ काला कोट और गाउन पूरे सालभर के लिए निर्धारित करना एडवोकेट्स एक्ट के संबंधित प्रावधानों और भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 21 व 25 का उल्लंघन है।

याचिका में कहा गया है कि भीषण गर्मी के मौसम में एक पागल भी काला कोट और गाउन न पहने, किंतु लम्बे समय से चली आ रही परंपरा को मानने में कुछ वकील व न्यायाधीश फ़ख़्र समझते हैं।

एडवोकेट बैंड ‘ईसाईयत’ का प्रतीक

दिलचस्प रूप से याचिका में धार्मिक एंगल भी उठाया गया है। वकीलों के बैंड पर याचिका में सवाल उठाते हुए कहा गया है कि ईसाई देशों में इस बैंड को ‘प्रीचिंग बैंड’ कहा जाता है, जिसे ईसाई धर्मगुरु तब धारण करते हैं जब वे प्रवचन देते हैं। ऐसे में यह बैंड ईसाई धर्म का आवश्यक प्रतीक चिह्न है जिसे अन्य धर्मों के वकीलों को पहनने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता है।

याची ने कहा कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने देश की जलवायु परिस्थितियों पर विचार किए बिना ड्रेस कोड निर्धारित किया और वकीलों के मौलिक अधिकार की रक्षा के लिए अपने कर्तव्य का पालन नहीं किया। उन्हें एक ऐसे ड्रेस कोड का पालन करने के लिए मजबूर किया जा रहा है जो गर्मियों में बेहद चुनौतीपूर्ण है और हमारे धार्मिक विश्वास के खिलाफ है।”

सफेद सलवार कमीज ‘विधवाओं’ की ड्रेस

इसके अलावा, याचिका में महिला वकीलों के ड्रेस पर सवाल उठाते हुए कहा गया है कि सफेद साड़ी या सलवार कमीज पहनना हिंदू संस्कृति और परंपराओं के अनुसार महिला के ‘विधवा’ होने का प्रतीक है और देश में वकीलों के लिए वर्तमान ड्रेस कोड निर्धारित करते समय बार काउंसिल की ओर से दिमाग का कोई उपयोग नहीं किया गया।

याचिका में कहा गया:

एक गैर ईसाई को ईसाई धर्म के अनुरूप ड्रेस पहनने को बाध्य करना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत मौलिक अधिकार का उल्लंघन है। जब बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया ऐसे नियम बना रही थी तब भारत सरकार ने उन्हें नियमों पर पुनर्विचार करने का कोई आदेश या आग्रह नहीं किया।

पहली सुनवाई के बाद ही कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया को नोटिस जारी कर दिया। साथ ही, केंद्र सरकार की ओर से पेश असिस्टेंटसॉलिसिटर जनरल एसबी पांडे व हाईकोर्ट प्रशासन की ओर से पेश अधिवक्ता गौरव मेहरोत्रा को भी 4 सप्ताह के भीतर मामले में अपना-अपना प्रतिशपथपत्र दाखिल करने का आदेश दिया।

बता दें कि वकीलों के लिए ड्रेस निर्धारित करने का अधिकार बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया के पास है और बार काउंसिल ने पूरे देश में 12 महीने के लिए एक ही ड्रेस कोड का निर्धारण किया है। इस मामले में अगली सुनवाई 18 अगस्त को होगी।

बैंड, गाउन और काला कोट – वकालत की पहचान?

अधिवक्ता अधिनियम 1961 में वकीलों के लिए बने नियमों में अदालत के भीतर वक़ील और न्यायाधीशों को काला कोट तथा गले मे बैंड पहनने को अनिवार्य किया गया है। भारत की अदालतों में भी वकीलों और न्यायाधीशों द्वारा काले रंग के कोट के साथ गाउन भी पहना जाता है।

इस प्रथा का उदय इंग्लैंड से हुआ था और सबसे पहले काले रंग का कोट वकीलों द्वारा इंग्लैंड में ही पहना गया था। दरअसल साल 1685 में किंग चार्ल्स द्वितीय के निधन पर कोर्ट के सभी वकीलों को शोक प्रकट करने के लिए काले रंग का गाउन या कोट पहनने का आदेश दिया था।

इसके बाद से ही कोर्ट में काले रंग का कोट पहनने का चलन शुरू हो गया। वकील काले कोट के साथ एक बैंड भी पहनते हैं। इसे एडवोकेट बैंड कहते हैं। यह सफेद रंग का होता है। बताया जाता है कि साल 1640 में कुछ ब्रिटिश वकील शर्ट के कॉलर छुपाने के लिए लिनन के सादे बैंड यूज करते थे।

धीरे-धीरे वकीलों की वेशभूषा में सफेद बैंड अहम हिस्सा बन गया और बाद में भारतीय वकीलों के लिए बैंड अनिवार्य कर दिया गया। अधिनियम 1961 के तहत अदालतों में सफेद बैंड के साथ काला कोट पहन कर आना अनिवार्य है, यह वेशभूषा आज वकीलों की पहचान बन गई है।



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