खुले में शौच कर रहे हैं प्रदर्शनकारी अफगान: दिल्ली HC ने लगाई केजरीवाल सरकार को फटकार

03 सितम्बर, 2021 By: डू पॉलिटिक्स स्टाफ़
आंदोलनकारी अफगानियों पर दिल्ली उच्च न्यायालय सख़्त

पिछले कुछ दिनों से संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग (UNHRC) के दिल्ली के दफ्तर के बाहर दिल्ली में रहने वाले अफ़ग़ानियों द्वारा प्रदर्शन किया जा रहा है। इन लोगों की माँगें है, कि उन्हें अस्थाई वीज़ा और रिफ्यूजी का दर्जा दिया जाए।

इस मामले को लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की गई थी। इस याचिका में लोगों को हटाने की माँग की गई थी। पूरे मामले को लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा है कि कोरोना के इतने गंभीर माहौल में प्रशासन द्वारा 500 से अधिक लोगों की भीड़ इकट्ठा कैसे होने दी गई? 


अफ़ग़ानिस्तान में इस्लामी आतंकी संगठन तालिबान द्वारा कब्ज़ा कर लिया गया है। वहीं भारत में रहने वाले अफगानी पिछले कुछ दिनों से दिल्ली के वसंत कुंज स्थित UNHRC के दफ्तर के बाहर प्रदर्शन कर रहे थे।

इस मामले को लेकर इन लोगों के विरुद्ध दिल्ली उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की गई, जिसमें कोरोना महामारी को लेकर चिंता व्यक्त की गई थी। याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा था कि स्थानीय लोगों ने शिकायत की है कि उन्हें अपने रोज़मर्रा के कामों और आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

मामले को लेकर याचिकाकर्ता ने कहा:

“विरोध प्रदर्शन करने वाले लोग वहीं पर रह रहे हैं। इसके साथ ही ये लोग खुले में शौच कर रहे हैं और कचरा भी फैला रहे हैं। इनके द्वारा क्षेत्र पर अतिक्रमण कर लिया गया है। इनमें से कई लोगों ने शायद अभी तक कोरोना से बचाव का टीका तक नहीं लगवाया है।”

चित्र साभार- India Today

पूरे मामले को सुनकर दिल्ली उच्च न्यायालय की जस्टिस रेखा पल्ली ने चिंता जताते हुए दिल्ली सरकार और केंद्र के वकीलों से कहा:

“क्षेत्र के चित्रों को देखिए! अगर यह कोरोना स्प्रेडर साबित हुआ तो क्या होगा? क्या है यह सब? जब आप गाड़ियों में मास्क न पहनने के लिए रोज़ाना लोगों के चालान कर रहे हैं, तो यहाँ भी तो कुछ प्रोटोकॉल का पालन होना चाहिए।”

न्यायालय ने सरकारों को लगाई फटकार 

पूरे मामले पर न्यायालय ने दिल्ली सरकार और केंद्र को जमकर फटकार लगाई और इस बात पर जवाब माँगा कि जब दिल्ली में रहने वाले 100 से अधिक लोग एक जगह पर एकत्रित नहीं हो सकते तो यहाँ 500 से अधिक रिफ्यूजी एकत्रित कैसे होने दिए गए हैं?


बता दें कि क्षेत्र में दिन में करीब 500 से अधिक प्रदर्शनकारी वहीं रात में करीब 50-100 लोग रुके रहते हैं। 

पूरे मामले पर न्यायालय ने यह सवाल किया कि क्या UNHRC के दफ्तर के बाहर की सड़क के अलावा कहीं और प्रदर्शन नहीं किया जा सकता ? इस पर दिल्ली सरकार ने कहा कि प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर या रामलीला मैदान में जा सकते हैं, लेकिन उसके लिए उन्हें सभी नियमों का पालन करना और अनुमति लेना आवश्यक होगा।

पुलिस ने न्यायालय को यह बताया कि उन्होंने अब तक प्रदर्शनकारियों को बलपूर्वक हटाने का प्रयास नहीं किया है क्योंकि यह एक अंतरराष्ट्रीय मुद्दा है, साथ ही माहौल भी संवेदनशील है। इस कारण पुलिस ने बल का प्रयोग न करने का निर्णय लिया है। आगे पुलिस वही करेगी जो न्यायालय का निर्णय होगा।

घुटनों पर दिल्ली सरकार 

दिल्ली सरकार के वकील न्यायालय के प्रश्नों के उत्तर नहीं दे सके और केवल इतना ही बता पाए कि प्रदर्शनकारियों की तरफ से इस प्रदर्शन को लेकर कोई अनुमति नहीं ली गई थी।

कोविड प्रोटोकॉल्स पर सरकारी वकील ने बताया कि सरकार की तरफ से प्रदर्शनकारियों को नियमों का पालन करने की हिदायत दी गई थी और मौके पर उपस्थित लोगों को मास्क भी बँटवाए गए थे।

अंत में न्यायालय ने सरकार के वकीलों को सख्ती से कहा कि अगर मंगलवार तक यह मामला सरकार और प्रशासन द्वारा सुलझाया नहीं गया तो न्यायालय को कुछ कड़े आदेश देने पर मजबूर होना होगा।



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