दिल्ली: मानवाधिकार, रिफ्यूजी कार्ड, विदेशों में पुनर्वास की माँग के लिए अफगान शरणार्थियों का प्रदर्शन

23 अगस्त, 2021 By: डू पॉलिटिक्स स्टाफ़
दिल्ली में UNHCR दफ्तर के बाहर अफगान शरणार्थियों का प्रदर्शन

तालिबानी आतंक से अफगानिस्तान में मची भगदड़ के बीच दिल्ली स्थित संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त (UNHCR) के सामने अफगानिस्तानी शरणार्थियों द्वारा विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है।प्रदर्शन कर रहे इन अफगानियों की ‘शरणार्थी कार्ड’ उपलब्ध कराए जाने के साथ और भी कई माँगें हैं। 

अफगानिस्तान में इस्लामी आतंकी संगठन तालिबान का शासन स्थापित होने को है। तालिबान द्वारा देश की राजधानी काबुल समेत लगभग सभी प्रांतों पर कब्ज़ा जमा लिया गया है। ऐसे में अधिकतर अफगानी नागरिक अपना देश छोड़कर भाग चुके हैं और बचे हुए लोग इस आतंकी की गिरोह चपेट से निकलना चाहते हैं। ऐसे में ये सभी लोग आसपास के देशों और विभिन्न पश्चिमी देशों की ओर देख रहे हैं।

इसी बीच भारत में रहने वाले अफ़ग़ानियों के समूह ने यूनाइटेड नेशन हाई कमिशन (UNHC) के दिल्ली ऑफिस के बाहर धरना देना प्रारंभ कर दिया है। इन लोगों की माँगें हैं कि उन्हें रिफ्यूजी यानी शरणार्थी का स्थान देते हुए रिफ्यूजी कार्ड उपलब्ध कराए जाएँ।

उनकी माँग है कि इसके साथ ही उन्हें किसी दूसरे देश के लिए पुनर्वास की भी सुविधा दी जाए। इन लोगों ने यूएनएससीआर और भारत सरकार के समक्ष अपनी सुरक्षा की भी माँग रखी है। 


अफगानी नागरिकों का नेतृत्व करते हुए मीडिया के सामने भारतीय अफगानी समुदाय के प्रमुख अहमद ज़िया गनी ने कहा:

“भारत में 21,000 से अधिक अफगानी लगभग 15 वर्षों से रह रहे हैं। अब हमारा अफगानिस्तान वापस जाने का कोई कारण नहीं बचा है। अफ़ग़ानियों के लिए यहाँ किसी प्रकार की सुविधाएँ एवं मानवाधिकार नहीं हैं। इसीलिए हम अपनी माँगें लेकर आज यहाँ आए हैं।”


बता दें कि भारत समेत कई अन्य देशों भी अफगानी स्वयं को पनाह देने की माँग कर रहे हैं, परंतु ऐसे में भारत जैसी आबादी रखने वाले देश को सोचने की आवश्यकता है कि वे इतनी भारी मात्रा में समुदाय विशेष को देश में बसने की अनुमति दे सकते हैं? 

ट्विटर पर लोगों की प्रतिक्रियाएँ 

लोगों ने इस समाचार पर सोशल मीडिया पर अपनी कई प्रतिक्रियाएँ दीं, जिसमें मुख्यतः यही बात कही गई कि एक ओर भारत में बसा मुस्लिम समुदाय समय-समय पर नागरिकता को लेकर विवाद खड़े करता है और फ़र्ज़ी मुद्दों पर विरोध प्रदर्शन करता है। ऐसे में भारत अन्य देशों के मुस्लिम समुदाय को नागरिकता क्यों दे?




कई लोगों ने इसे सुरक्षा की दृष्टि से देखते हुए गृह मंत्रालय को इस विषय में संज्ञान लेने के लिए कहा। लोगों ने लिखा कि गृह मंत्रालय को यह सुनिश्चित करना होगा कि ये लोग रोहिंग्याओं की भाँति दंगा-फसाद न करें। स्थानीय नेताओं पर भी नज़र रखनी होगी ताकि वे वोट बैंक की राजनीति के लिए इनकी फ़र्ज़ी वोटर आईडी न बनवा दें। 

नागरिकता संशोधन क़ानून 

बता दें कि भारत ने आसपास के देशों जैसे पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में पीड़ित अल्पसंख्यकों यानी कि हिंदू, जैन, बौद्ध, सिख, क्रिश्चियन, पारसियों को भारतीय नागरिकता देने के लिए सिटीजनशिप अमेंडमेंट बिल (CAA) में सुधार किया था।

इस बिल में यह कहा गया था कि आसपास के देशों में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार किए जाते हैं एवं हिंदू, सिख, बौद्ध जैसे पंथों के लिए तो भारत के अलावा कोई और देश भी नहीं है। इसी कारण भारत सरकार ने इन सभी लोगों को नागरिकता देने का निर्णय लेते हुए बिल पास किया था।

बता दें कि एक बड़ा धड़ा जो इस बिल के पास होने के बाद इसके विरोध में खड़ा था, अब वे ही लोग अफगानी नागरिकों को भारत में स्थापित करने की पैरवी करते दिख रहे हैं।



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