बागी अफगानों ने उठाए हथियार: 3 जिलों से तालिबान का सफाया कर निपटाए 40 आतंकी

21 अगस्त, 2021
स्थानीय अफ़ग़ानियों ने मार गिराए 40 तालिबानी आतंकी

अफगानिस्तान के स्थानीय लोगों ने आतंकवादी संगठन तालिबान के विरुद्ध खड़े होने का निर्णय ले लिया है। तालिबान द्वारा क़ब्ज़ाए गए क्षेत्रों में से ही स्थानीय लोगों ने प्रतिकार करते हुए 40 तालिबानी आतंकियों को मार गिराया है और 3 ज़िलों को आतंकियों के कब्ज़े से मुक्त करा लिया है।

अफगानिस्तान के लगभग हर प्रांत और राजधानी काबुल को भी कब्ज़ा चुके इस्लामी आतंकी संगठन तालिबान को अब आम जनता द्वारा प्रतिकार का सामना करना पड़ रहा है। रिपोर्ट के मानें तो खैर मोहम्मद अंदाराबी के नेतृत्व में कई स्थानीय लोगों ने हथियार उठाकर प्रतिरोध करने का दावा किया है।


अब तक आए समाचारों के अनुसार इस बागी समूह ने बानो, पोल-ए-हिसार और दे-सालाह नामक तीन ज़िलों को तालिबानियों के कब्ज़े से मुक्त करा लिया है। इन लोगों ने आतंकी संगठन के साथ मुकाबला करते हुए लगभग 40 तालिबानी आतंकियों को मार गिराया। साथ ही, लगभग 15 से अधिक आतंकियों को घायल कर दिया।

इतने के बाद भी यह संगठन अभी रुकने की बात नहीं कह रहा है। इनका कहना है यह अब ये खेनहन ज़िले की ओर बढ़ रहे हैं एवं इसके उपरांत वे समस्त बग़लान प्रांत को भी तालिबानियों के आतंक से मुक्त करा कर वहाँ स्थापित होंगे।


‘प्रतिरोध अभी ज़िंदा है’

इस कृत्य के विषय में जानकारी साझा करते हुए अफगानिस्तान के पूर्व कार्यवाहक रक्षा मंत्री बिस्मिल्लाह मुहम्मदी ने कहा:

“तालिबानी आतंकवादियों का विरोध करना हमारा कर्तव्य है। बग़लान में पुल-ए-हेसर, देह सलाह और बानो ज़िलों पर प्रतिरोध बलों के कब्ज़ा कर लिया है। प्रतिरोध अभी ज़िंदा है।”


बता दें कि बिस्मिल्लाह मोहम्मदी फिलहाल पंजशीर प्रांत में रह रहे हैं। अब केवल यही क्षेत्र तालिबानियों के कब्ज़े से बाकी बचा है।

तालिबानी विरोधी नेता अहमद शाह मसूद के बेटे अहमद मसूद को इन प्रतिरोधी बलों का कमांडर बताया जा रहा है। सूत्रों से यह भी समाचार मिला है कि तालिबान के प्रतिनिधि अहमद मसूद से मुलाकात करके वार्ता करेंगे।

बता दें कि 15 अगस्त, 2021 को तालिबान द्वारा अफगानिस्तान की राजधानी काबुल पर कब्ज़ा कर लिया गया था। इसके साथ ही तालिबानियों ने देश के लगभग सभी प्रांतों को भी अपने अधीन कर लिया है।

राष्ट्रपति अशरफ घानी समेत समस्त अफगानी प्रशासन अपने देश और देशवासियों को छोड़कर भाग खड़ा हुआ है और अब आम अफगानी अपनी जान बचाने के लिए विश्व भर से गुहार लगा रहे हैं।



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