4 करोड़ की आबादी भुखमरी के कगार पर: अफगानिस्तान के पास शेष है सिर्फ 1 माह का अनाज

03 सितम्बर, 2021 By: डू पॉलिटिक्स स्टाफ़
अफ़ग़ानिस्तान में 2 वक्त की रोटी को तरस रही जनता

अफगानिस्तान देश तालिबानी आतंक के कब्ज़े में आने और उनकी गोलियों से मरने के बाद अब भुखमरी से मरने की कगार पर खड़ा है। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि इस देश की लगभग 4 करोड़ की आबादी अब रोटी के लिए भी तरसने वाली है।

इस मामले में संयुक्त राष्ट्र (UN) ने इन्हें चेतावनी भी दी है। UN ने कहा है कि अफगानिस्तान में केवल इसी महीने के अंत तक के लिए खाद्य सामग्री बची है। 

अफ़ग़ानिस्तान में 15 अगस्त, 2021 को इस्लामी शासन स्थापित हो गया। इस्लामी आतंकी संगठन तालिबान ने राजधानी काबुल को अंततः अपने कब्ज़े में ले लिया। तालिबान ने पिछले कुछ दिनों में समस्त देश में भीषण उपद्रव मचाया है।

पत्रकारों, सैनिकों समेत कई आम नागरिकों को भी मौत के घाट उतार दिया गया और तालिबान द्वारा देश में शरिया कानून स्थापित करने का भी ऐलान कर दिया गया। महिलाओं की तस्करी, शारीरिक व मानसिक शोषण और हत्याएँ भी जारी हैं। 

अब भूख से मरेगा अफगानिस्तान 

अब तालिबान की गोली से मरने के बाद बचे लोग शायद भूख से मरने को तैयार हैं। इस आतंकी संगठन ने देश पर कब्ज़ा तो जमा लिया है, परंतु यह तो साफ है कि आतंकी केवल बंदूक चलाना जानते हैं, राज्य नहीं। इसी कारण अब अफ़ग़ानिस्तान में भोजन का भी अभाव होने वाला है। 

इस संबंध में UN ने कई अंतरराष्ट्रीय समुदायों से अफगानियों के लिए भोजन उपलब्ध कराने की अपील की है। इस मामले में UN के उप प्रतिनिधि एवं अफगानिस्तान में मानवाधिकार संयोजक रामिज अलकबारोव ने कहा कि इस युद्ध से जूझ रहे देश की लगभग एक-तिहाई जनता यह तक नहीं बता सकती कि उन्हें हर दिन भोजन मिलेगा या नहीं।

उन्होंने राजधानी काबुल में एक वर्चुअल कॉन्फ्रेंस में यह भी कहा कि खाद्य उत्पादों की कमी समस्त देश में प्रारम्भ हो चुकी है। कुछ दिनों पहले पाकिस्तान द्वारा लगभग 600 मीट्रिक टन खाद्य सामग्री अफगानिस्तान भेजी गई थी। बताया जा रहा है कि अब वह भी समाप्त हो चुकी है। 

20 करोड़ डॉलर की आवश्यकता 

आँकड़ों की मानें तो अफगानिस्तान के लोगों को दो वक़्त का खाना उपलब्ध कराने के लिए लगभग 20 करोड़ डॉलर की रकम की तत्काल आवश्यकता पड़ने वाली है। 

UN ने यह भी बताया कि इस देश में बच्चों की आधी से अधिक जनसंख्या 5 वर्ष की आयु से कम की है। उन्होंने काबुल हवाई अड्डे पर करीब 800 से अधिक बच्चों को खाना उपलब्ध कराया था और देश में लगभग 390 से अधिक ज़िलों में अब भी यह प्रक्रिया जारी है। 

इस सब के बीच महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि UN भी आखिर कब तक अफगानियों का पेट भर सकता है? मौजूदा हालातों को देखा जाए तो इस देश में अकाल आना तय सा प्रतीत हो रहा है। 



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