व्यंग्य: वोक दार्शनिक एवं विचारक अजीत भारती के विभिन्न मुद्दों पर विचार

27 मई, 2021 By: अजीत भारती
एक आदर्श वोक क्या चाहता है? (चित्र साभार: qrius.com)

नमस्कार मैं अजीत, वोक विचारक एवं दार्शनिक हूँ। कई व्यक्तियों ने कई बार छुपा हुआ कॉन्ग्रेसी, वामपंथी तथा अन्य विशेषणों से मेरा शब्दाभिषेक किया है। अतः, आज यह बताना आवश्यक है कि मैं किस पक्ष में हूँ। स्वरचित शास्त्रों में मुझे वोकों में श्रेष्ठ अर्थात वोकश्रेष्ठ एवं लिबरलों का अंडू अर्थात् लिब्रांडू कहा गया है। कॉलेज परिसरों में विपरीत लिंग के जीवों द्वारा नकारे जाने पर मैंने ‘अपने शरीर को सामाजिक बंधनों से मुक्त करो’ के नाम पर मैंने कई कालखंडों में अपने अनुयायियों को यह विलक्षण विद्या सिखाई जिससे उन्हें बीड़ी और बीयर के साथ बेबियाँ भी मिलती रहें।

अब जबकि मैंने अपनी पहचान स्थापित कर ली है, आज मैं देश-विदेश के कई मुद्दों पर अपनी राय रखने जा रहा हूँ… जा रहा हूँ तो सेक्सिस्ट हो जाएगा! एग्जेक्टली! इसलिए आज मैं ऑल इन्क्लूसिव हो कर, जेंडर फ्लूइड हो कर अपनी राय रखने जा रही हूँ। शिट्! ये भी सही नहीं है क्योंकि मैं थर्ड जेंडर को, लेस्बियन्स को, गे लोगों को, डेमी लवाटो को सबको दुखी कर दूँगी, या दूँगा, या दूँगे… या दूँलेस्बियन? हाँ, ये सही रहेगा कि आज मैं अपने राय रखने जे रहे हें। फायनली नोबडी विल बी ऑफेंडेड। वी शुड रेस्पेक्ट ऑल ऑफ अस। और साथ ही, हमें चैनल को सब्सक्राइब भी कर लेना चाहिए। जो-जो रेसिस्ट हैं, वो बिना सब्सक्राइब किए देखते हैं। मुझे सब पता है।

पहला मुद्दा तो वैक्सिनेशन का ही है। नाम है कोवैक्सीन या कोवीशील्ड। कोवैक्सीन का तो ठीक है नाम लेकिन कोवीशील्ड में शील्ड क्यों है! क्या लगवाने वाले को ट्राफी मिलती है? या फिर यह पितृसत्तात्मक समाज का एक और भौंडा उदाहरण है। यही तो है वो टॉक्सिक मेल मेस्कुलिनिटी… जहरीला पुंसत्व, विषैला पौरुष जहाँ नारियों को शील्ड के पीछे छुपाना है। आखिर स्त्रियाँ शील्ड क्यों ले, कब तक ये समाज उन्हें शील्डों के पीछे छुपाता रहेगा, उन्हें कमजोर बताता रहेगा? आज से मैं स्त्री हूँ, मैं पुरुष हूँ, मैं जेंडर फ्लूइड हूँ, मैं जल हूँ और आज मैं ये घोषणा करती हूँ कि मैं किसी भी शील्ड के पीछे नहीं छुपुँगी, चाहे जान चली जाए जिया नहीं जाए, जिया जाए तो फिर पिया नहीं जाए! एगफकिंगजेक्टली! हाउ विल एन एग फकिंग जेक्टली? व्हाटएवरर्र!

ये मोदी सरकार ले कर आई है। नाउ जस्ट टेल मी, लाइक रियली रियली टेल मी… अगर सबको वैक्सीन दे देंगे, तो सब ठीक हो जाएँगे, लेकिन इकॉनमी तो बर्बाद हो जाएगी न? जब बीमारी ही नहीं रहेगी तो दवाई कम्पनियाँ क्या बनाएँगी? डॉक्टर लोग क्या करेंगे? ये किस तरह की फासीवादी सरकार है जो लाखों डॉक्टरों और करोड़ों दवाई बनाने वाले हाथों को बेरोजगार बनाने जा रही है। इसलिए, मैं ये वैक्सीन नहीं लगवाऊँ’गे’… या लगवाऊँलेस्बियन… योर च्वाइस! All I am is a soul whose body is not just the shell it is in. Just leaving it out there for all my fanpersons.

अब मैं जा रहे हूँ किसान आंदोलन पर… सोशल मीडिया पर मैंने पुरुषों को देखा है इस शब्द पर भी खूब मजे करते हुए। यहाँ भी आन-दो-लन में मुझे टॉक्सिक मैसकुलिनिटी का हिंट दिख रहा है। ये आन दो लन ही क्यों है, या तो ऑन दो लन कर दो, या फिर आन दो कैट कर दो… यू नो व्हाट आइ मीन! एक से जी नहीं भरता, तो भाषा को भी पितृसत्तात्मक बना रखा है जहाँ हर चीज दो चाहिए। जलते हैं ये स्त्रियों से क्योंकि उनके पास दो स्तन हैं। यही वो विषैली पौरुषेय मानसिकता है जिसके खिलाफ हम वोक लोगों को आंदोलन, सॉरी आनदोस्तन छेड़ देना चाहिए।

मेरी विवशता तो देखिए कि मैं इस रेसिस्ट लैंग्वेज में वीडियो बने रहे हूँ, लेकिन हम सब तो लार्जर गुड के लिए कॉम्प्रोमाइज करते ही हैं। मैं अगर अपनी बात करूँ तो लार्जर गुड के लिए तो नहीं लेकिन लार्जर गुड्स के लिए तो किया ही है। अब संघी लोग मुझे अश्लील कह देंगे, लेकिन याद रखना यह देह तुम्हारी है, इस शरीर पर संघियों का हक नहीं है, इसे सिर्फ वामपंथी ही भोग सकते हैं, एक से ज्यादा एक साथ हों तो और भी अच्छा, इस पर समाज का कोई बंधन नहीं होना चाहिए। यू नो व्हाट कार्ल मार्क्स डिड वन्स! नो यू डोन्ट! इवन आइ डन्ट बट उनका नाम ले लेने से मेरे वोकत्व को स्वीकृति मिलती है।


चलो, मार्क्स न सही, जेएनयू के ही एक वामपंथी नेता की बात बताते हूँ आपको। एक बार जब वो वामपंथ के दर्शन पर लड़कियों के हॉस्टल के सामने खड़े हो कर मूत रहे थे, तब उन्होंने सामने बैठे नववामपंथियों और नववोकवृंद को यह ज्ञान दिया कि शरीर सत्ता या समाज के बंधन में नहीं बाँधा जा सकता। एक नवयुवती ने हँसते हुए पूछा कि उदाहरण क्या है। तो उन्होंने समझाया कि उसने जो कपड़े पहने हैं, वो समाज ने तय किया है कि वो लड़की है तो उसे ब्रा पहननी होगी, ये लड़का है तो ये… वेल बमचम पहनेगा और हवाई चप्पल। यह सुनते ही तीन लौंडों ने वामपंथ के नाम पर वोक कन्या से ब्रा उतरवा कर जलती आग में फेंक दिया और समाज के बंधनों से मुक्ति पा ली। लौंडे तो बहुत पहले से कच्छे जला चुके थे।


खैर, कन्या ने कहा कि नेताजी ने स्वयं क्या किया है समाज के बंधनों से उबरने के लिए। नेताजी ने कहा कि उन्होंने वामपंथ की पहली पाठशाला में ही पास पड़ा कैक्टस अंदर डाल लिया था क्योंकि उनके पिता ने बचपन में सिखाया था कि उस मार्ग से विष्ठा निकालते हैं। यह नेता जी का अपने बाप और उसकी मान्यताओं को ले कर विरोध था कि जहाँ से सिर्फ निकलता है, वहाँ वो डाल सकते हैं, और वो भी कैक्टस। दर्द हुआ लेकिन वामपंथ की राह में इतना खून-खच्चर तो कुछ भी नहीं है।

आज खबर आई कि ट्विटर-फेसबुक को सरकार भगा देगी। भगा दो, लेकिन याद रखना कि ये रेसिस्ट काम है। संघी पूछेंगे कि इसमें रेसिस्ट क्या है। ये पूछना ही रेसिस्ट है क्योंकि हाव डेयर यू! संघियों को प्रश्न पूछने का हक कैसे हो गया! रेसिस्ट हैं सब के सब। भारत में जो भी जन्म लेता है, वो रेसिस्ट होता है। जस्ट एक्सेप्ट इट एंड मूव फकिंग ऑन। मोदी जी कहते थे वासुदेव कुटुम्बकम्! क्यों? वासुदेव कुटुम्बकम् ही क्यों? देवकी कुटुम्बकम् क्यों नहीं? कोई वसुधैव नहीं होता है, ये ब्राह्मणों की साजिश है जिन्होंने अपने पाप को छुपाने के लिए, अपनी मेल मैस्कुलिनिटी छुपाने के लिए मिलते-जुलते शब्द का प्रयोग कर लिया।

मैंने रिसर्च किया है, मैं लेवदत्त पटनायक की फैन हूँ, ही नोज वेदाज, पुरानाज़, नयाज़ सब-कुछ! कभी कभी तो मुझे लगता है कि लेवदत्त जी ने ही महाभारत के मैदान में राम जी को गीता का ज्ञान दिया था। कितने ज्ञान हैं उन्हें। मैं उनके लिए मेल वाला प्रोनाउन यूज कर रहे हूँ, जबकि वो देखने में सूअर जैसे लगते हैं। पिग्स आर क्यूट यू नो। इवन द ब्लैक वन्स बिकॉज ब्लैक लाइव्स मैटर। आय नो माय हिस्ट्री एंड मिथोलजी यू फिल्दी लिटिल कन्ट! तुम्हें क्या लगा कि ये वोक है तो इसको पता नहीं होगा कि पांडवों के पिता दशरथ थे और रामायण कुरुक्षेत्र में लड़ी गई थी।

मुझे तो पॉलिटिक्स भी याद है, उस वक्त राजीव गाँधी राष्ट्रपति थे और धर्म की विजय हुई थी। सो फकिंग मच फॉर यॉर हिन्दू हृदय सम्राट मोदी! कहाँ था वो जब युद्ध हो रहा था? किसकी तरफ से वो लड़ा था? राजीव गाँधी जी आइएनएस विराट ले कर गए थे, परहैप्स महेन्द्र सिंह धोनी के साथ और फिर अर्जुन ने रावण की नाभि में तीर मार कर अयोध्या को अपने कब्जे में कर लिया। तुम्हारा मोदी एक छोटी गाड़ी पर बैठ कर मानवता पर एक बड़ा अपराध करने जा रहा था, बाबरी मस्जिद को गिराने के लिए।

यू हैव सीन दैट ब्यूटिफुल मॉस्क? कितने लोग वहाँ जाते थे प्रे करने लेकिन वायलेंट लोगों ने उसे गिरा दिया। बाबर कितना महान था कि उसे जब कहीं जगह नहीं मिली तो उसने अपने लोगों के लिए एक मंदिर पर मस्जिद बना दिया। क्या उसने मंदिर को तोड़ा? नहीं, उसने सउदी से मस्जिद मँगवाई, और मंदिर के चारों तरफ जगह खोद कर पहले मंदिर को नीचे कर दिया, फिर मस्जिद बना दी। मंदिर को कोई नुकसान नहीं पहुँचाया। अगर नुकसान पहुँचाता तो नीचे खुदाई में मंदिर मिलता क्या? जब तोड़ दिया तो मिला कैसे? इट्स सिंपल कोश्चन, है कोई जवाब? लेकिन तुम संघी लोग नहीं समझो’गे’… आइ मीन समझोलेस्बियन! व्हाटएवरर्र!

आइपीएल करवा रहे थे। यहाँ भी सिर्फ मर्द ही खेलेंगे। ये पूरा खेल ही रेसिस्ट है। सिर्फ लड़के खेल रहे हैं, बॉल का रंग देखा है! एग्जेक्टली! व्हाइट। गोरे लोगों से फैसिनेशन। गेंद भी गोरी चाहिए भले अपनी दोनों काली, भूरी या आइ मीन जैसी भी हों। बैट भी काला नहीं, भूरा नहीं, विकेट पर निशान भी सफेद रंग के लगाए जाएँगे। ऑल टॉक्सिक मैस्कुलिनिटी एंड रैम्पैंट रेसिज्म। इसी गिल्ट को छुपाने के लिए क्रिस गेल को ले आए, लेकिन उसे भी खरीद कर लाए। रिमेंबर समथिंग अबाउट बाईंग ब्लैक गाय्ज? एग्जेक्टली, स्लेव ट्रेड। यहाँ खुल्लमखुल्ला लीग के नाम पर काले लोगों की खरीद फरोख्त हो रही है। किसी दिन डीके, केडी जैसे लोगों को भी कोई बेच देगा, अभी क्रिकेट खेल रहे हैं, सोच रहे हैं खेलने का पैसा मिल रहा है, लेकिन उन्हें पता भी नहीं है कि भारतीय लोगों को विदेशियों का पिछवाड़ा इतना हसीन लगता है कि वो उनके द्वारा किए गए काम को दोहराना चाहते हैं। आज बीसीसीआई के पास पैसा आ गया, तो वो गोरों की तरह अश्वेतों को खरीद रहे हैं।

लेकिन हमें इसका विरोध करना होगा। इन फैक्ट… यू माइट नॉट नो दिस! लेकिन मैंने ही अपने सात-आठ साथियों के साथ एक्टिविज्म की, इन्स्टाग्राम पर पोस्ट लिखे, और तब जा कर आईपीएल सस्पेंड हो गया। अब जल्द ही हम इंग्लिश प्रीमियर लीग से भी अश्वेतों की खरीद-बिक्री पर रोक लगाएँगे। आखिर कोई काला व्यक्ति आपके पैसों के लिए क्यों खेले? आप अपने मनोरंजन के लिए उसे एक तय समय पर खेलने आने कहते हैं, और अगर वो अच्छा खेलता है तो पैसे ज्यादा देते हो, खराब खेलता है, तो वो गायब हो जाता है। उसके साथ तो वही होता है जो रसेल क्रो के साथ ग्लैडिएटर में हुआ। पिंजरे में डाल कर कहीं और भेज दिया जाता है। नोबडी सीम्स टू लुक इनटू दिस! एन्टीफा वाले भी नहीं, बीएलएम वाले भी नहीं! अरे देखो ये हमारी आँखों के सामने काले लोगों पर पैसा फेंक कर जबरन खेलने को मजबूर किया जा रहा है। जबकि वो इस वक्त शायद तीन वोक कन्याओं के साथ आनंद के क्षण बिताना चाह रहा होगा। हू नोज!


फॉर अ मोमेंट, राम मंदिर पर भी बात कर ही लेते हूँ। कभी सोचा है कि अयोध्या में राम मंदिर ही क्यों? सीता मंदिर क्यों नहीं? जस्ट बिकॉज शी वाज नॉट बॉर्न हेयर तो क्या रामजन्मभूमि को सीताजन्मभूमि नहीं कह सकते? आइ मीन, थिंक अबाउट इट! क्या ये सीता की गलती थी कि वो अयोध्या में पैदा नहीं हुई? क्या हमें पता होता है कि हम कहाँ पैदा होंगे? मुझे तो नहीं पता था, शायद संघियों को पता होता हो। वो बिचारी कहीं और पैदा हुई तो क्या राम जहाँ पैदा हुए, वहाँ उनके नाम का मंदिर नहीं बनेगा? नहीं बनेगा क्योंकि ब्राह्मण सब पेट्रियार्की में पले हैं, वो हमेशा मर्दों के ही मंदिर बनाएँगे। स्मैश ब्राह्मिनिकल पैट्रियार्की।


व्हाट डू यू मीन कि दूसरे मजहबों में तो स्त्रियों का नाम भी नहीं चाहे पोप हों या पैगंबर… वो दूसरे रिलिजन हैं, वो अपने आप ही बेटर हैं क्योंकि वो हिन्दू नहीं हैं मूर्ख आदमी। बाकी दुनिया परफैक्ट है, हम वोक लोग हिन्दुओं को सुधारने निकले हैं। अपनी गलती पहले स्वीकारना सीखो, सीता मंदिर बनाओ, दूसरों को ज्ञान मत दो कि कितने साल में कितनी शादियाँ की और कितने बच्चे पैदा कर के फिर उन्हीं से शादी कर ली। उनका जीवन, उनका नियम! सीखो कुछ कि उन्होंने भेदभाव नहीं किया कि ये बच्ची तो अभी प्यूबर्टी को भी प्राप्त नहीं हुई, उनका मन हुआ शादी कर ली। हाउ ब्यूटिफुल इज़ दैट!

मैं जा रहे हूँ पेलेस्टाइन! लोग मर रहे हैं वहाँ और तुम्हें गर्मी की छुट्टियों की पड़ी है। पता है लोगों को खाने को नहीं मिल रहा? तुम आम खा रहे हो, शेक पी रहे हो। यू फिल्दी पैट्रियार्कल डिक! यू फकिंग मोरोन! पीपल आर डाइंग फॉर गॉड्स सेक्स? नहीं सेक्स? गॉड का सेक्स क्या है वैसे? इज ही मेल? फकिंग रेसिस्ट! आइ हेट एवरीथिंग!

पता है, मरने के बाद हम जैसे वोक लोगों का एक अलग हैवन है। हमें वोक्ष मिलता है क्योंकि हमने हिन्दुओं को मोक्ष की अवधारणाओं को दरकिनार कर दिया है। मोक्ष इज़ रेसिस्ट, वोक्ष इज़ वोक।

आमेन और आवूमनिया!

‘वोक पुराण’ का पूरा वीडियो आप नीचे दी गई यूट्यूब लिंक पर देख सकते हैं




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