काबुल में IS-K आतंकियों के बजाय अमेरिकी रॉकेट ने मार डाले अफगानी बच्चे और सैनिक - रिपोर्ट

30 अगस्त, 2021 By: डू पॉलिटिक्स स्टाफ़
अमेरिका द्वारा दागी गई मिसाइल्स से इस्लामिक स्टेट के आतंकी नहीं बल्कि अफगान नागरिक मारे गए

अफगानिस्तान के काबुल हवाई अड्डे पर हुए इस्लामिक स्टेट खुरासान (IS-K) के आत्मघाती हमले का बदला लेने के नाम पर अमेरिकी सरकार और सेना अफ़ग़ानियों पर ही कहर ढा रही है। अमेरिका द्वारा किए जा रहे मिसाइल हमलों में आतंकियों की जगह बच्चे, अफगानी सैनिक एवं आम नागरिक मारे जा रहे हैं।

अफगानिस्तान में तालिबान का शासन आने के बाद से देश भर में अराजकता का माहौल है। अब तालिबान के साथ-साथ विश्व के कई अन्य इस्लामी आतंकी संगठन भी अफगानिस्तान को निशाना बनाकर हमले कर रहे हैं।

ऐसा ही एक हमला इस्लामिक स्टेट खुरासान (IS-K) के द्वारा 26 अगस्त, 2021 को काबुल हवाई अड्डे पर किया गया। हमले में 13 अमेरिकी सैनिक मारे गए एवं 18 से अधिक गंभीर रूप से घायल हो गए। आम नागरिकों के मरने की संख्या अलग-अलग मीडिया रिपोर्ट्स में 170 से 200 तक बताई जा रही है।

इस आतंकी घटना का प्रतिकार करते हुए अमेरिकी प्रशासन ने भी कड़ी कार्रवाई की और सेना द्वारा 48 घंटों के भीतर ही अफगानिस्तान के नंगरहार प्रांत में एक ड्रोन हमला किया। इस हमले में एक इस्लामिक स्टेट के सरगना के साथ ही उसके एक साथी के मारे जाने का समाचार मिला था।

इसके बाद से ही अमेरिका लगातार अफगानिस्तान के विभिन्न क्षेत्रों पर मिसाइल एवं ड्रोन हमले कर रहा है, परंतु अब इस बमबारी में IS-K या तालिबान के आतंकी न मर कर आम लोग और बच्चे निशाना बन रहे हैं।

7 बच्चों समेत 9 की गई जान 

रिपोर्ट के अनुसार, हाल ही में अमेरिका द्वारा अफगानिस्तान की राजधानी काबुल पर एक रॉकेट से हमला किया गया। इसमें अमेरिका ने दावा किया कि उन्होंने इस्लामिक स्टेट के आतंकियों को मारा है, परंतु तथ्य इससे कहीं विपरीत हैं। इस हमले में 9 अफगानी नागरिकों की जान चली गई, जिनमें से 7 बच्चे एवं छात्र थे।


इन सभी मरने वालों की सूची सोशल मीडिया साइट ट्विटर पर खासी वायरल हो रही है। इनके नाम और पहचान कुछ इस प्रकार हैं।

  • फैज़ल (छात्र)
  • फरज़ाद (छात्र)
  • अयात (2 वर्ष)
  • सुमैया (2 वर्ष) 
  • अर्मीन (4 वर्ष) 
  • बिन्यामीन (3 वर्ष)
  • ज़िमारे (दुभाषिया) (Interpreter)
  • नसीर (अफ़ग़ानी सैनिक)
  • ज़मीर (दुकानदार) 

इन सभी 9 लोगों की हत्या का ज़िम्मेदार पूर्ण रूप से अमेरिकी प्रशासन और राष्ट्रपति जो बायडेन हैं। विश्व का समस्त वामपंथी मीडिया इस जघन्य घटना पर पर्दा डालने का पूर्ण प्रयास कर रहा है पर सोशल मीडिया पर कई लोग इस बात को मुखर होकर उठा रहे हैं।

भारत के रहने वाले अभिजीत अय्यर मित्रा रक्षा मुद्दों और वैश्विक राजनीति के वरिष्ठ जानकार हैं। उन्होंने इस मामले में पूर्ण रूप से अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन को दोषी ठहराया और यह लिखते हुए ट्वीट किया:

“जैसा कि शक था वही हुआ। जो बायडेन द्वारा अफगानिस्तान पर किए गए रॉकेट हमले में एक भी IS-K का आतंकी नहीं मारा गया, बल्कि 4 बच्चों, 2 छात्रों, एक अफगानी सैनिक, एक दुकानदार और एक इंटरप्रेटर की जान चली गई। जो बायडेन एक झूठा, बीमार और भ्रष्ट व्यक्ति है।”


अलकायदा-तालिबान संबंध

अफगानिस्तान में तालिबानी शासन आने के बाद कई अन्य वैश्विक इस्लामी आतंकी संगठन भी पुनः क्षेत्र में सक्रिय हो गए हैं। ओसामा बिन लादेन के आतंकी संगठन अलकायदा और तालिबान के सम्बन्ध विश्व से छिपे नहीं हैं। इसका एक उदाहरण अफगानिस्तान में हाल ही में देखने को मिला।


अफगानिस्तान के नंगरहार प्रांत में ओसामा बिन लादेन के पूर्व अंगरक्षक अमीन-अल-हक ने पुनः वापसी की। अफगानिस्तान में वर्षों पूर्व तालिबानी और अलकायदा के आतंकी के साथ में प्रशिक्षण लिया करते थे।

बता दें कि ओसामा के इस अंगरक्षक को वर्ष 2008 में पाकिस्तान में गिरफ्तार कर लिया गया था, परंतु उसे वर्ष 2011 में आज़ाद कर दिया गया।



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