बंगाल: हिंसा के भय से घर छोड़ असम में शरणार्थी बने 2000 से अधिक भाजपा समर्थक

08 मई, 2021 By: डू पॉलिटिक्स स्टाफ़
असम में शरणार्थी शिविरों में बंगाल हिंसा पीड़ित भाजपा समर्थक (चित्र साभार: न्यूज़ 18)

बंगाल में चुनाव नतीजों के बाद से ही हिंसा का सामना कर रहे भाजपा कार्यकर्ता अब जान बचाने के लिए बंगाल छोड़ने को मजबूर हैं। मतगणना के बाद से ही बंगाल में हत्या, आगजनी, लूटपाट औऱ बलात्कार की ख़बरें सामने आ रही हैं। इसके अलावा, बंगाल से अब हिन्दू पलायन करने को भी विवश हैं।

अब तक लगभग एक दर्जन भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या राजनीतिक गुंडों द्वारा कर दी गई है। हालत ये हैं कि हमलों से घबरा कर भाजपा के 300-400 भाजपा कार्यकर्ता बंगाल छोड़ असम चले गए हैं। असम के भाजपा नेता हिमंत बिस्वा सरमा ने खुद ये जानकारी सामने रखी है।

असम के स्वास्थ्य एवं वित्त मंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने दावा किया है कि बंगाल में चुनाव बाद हुई हिंसा अत्याचार और मारपीट के बाद वहाँ से करीब 300-400 भाजपा कार्यकर्ता परिवार सहित भाग कर पड़ोसी राज्य असम के धुबरी पहुँच गए हैं। उन्होंने कहा, “हम आश्रितों को सहारा और भोजन दे रहे हैं। ममता दीदी को लोकतंत्र को बदरंग होने से बचाना चाहिए, बंगाल बेहतर का हकदार है।”

धुबरी जिला अधिकारियों के अनुसार, बंगाल में राजनीतिक हिंसा के 2,000 से अधिक पीड़ित असम में प्रवेश कर चुके हैं।

गौरतलब है कि मतगणना के बाद से ही बंगाल में राजनीतिक हिंसा उग्र रूप धारण कर चुकी है। अब तक लगभग तक दर्जन भाजपा कार्यकर्ताओं औऱ समर्थकों की हत्या हो चुकी है। घरों को औऱ दुकानों को लूटा जा रहा है। बलात्कार की कुछ घटनाएँ भी सामने आई हैं। भाजपा लगातार हिंसा के लिए ममता की तृणमूल सरकार को जिम्मेदार बता रही है।

बंगाल में भाजपा नेताओं और समर्थकों का आरोप है कि चुनाव के बाद की हिंसा में राज्य भर में कई पार्टी कार्यकर्ताओं की हत्या, बलात्कार, बेरहमी से हमला किया गया और उनके घरों को आग लगा दी गई। उन्होंने TMC कैडरों पर हमलों को अंजाम देने का आरोप लगाया है और आरोप लगाया कि पुलिस उन्हें सुरक्षा प्रदान करने के लिए कुछ नहीं कर रही है। वामपंथी और कॉन्ग्रेस जैसे अन्य विपक्षी दलों ने भी इसी तरह के आरोप लगाए हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, बंगाल में अभी जो तनाव के हालात बने हुए हैं उसकी एक बड़ी वजह ये भी है कि ममता सरकार का प्रोत्साहन पा कर सीमा पार से आए लोग बंगाल में लगातार अपनी स्थिति मज़बूत कर रहे हैं और स्थानीय लोगों को हाशिए पर ढकेल रहे हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, सीमा पार के लोग राजनैतिक हिंसा की आड़ में ‘लेबेनसरॉम’ की नीति अपना रहे हैं और यही नीति सर्वप्रथम जर्मनी के राष्ट्रवादियों ने यूरोप में अपनाई थी।

हालाँकि, इस बात का कोई पुख़्ता आधार नहीं है कि बंगाल के ये लोग किसी सोची-समझी नीति के तहत इस नीति का अनुसरण कर स्थानीय निवासियों के बंगाल छोड़ने को मजबूर कर रहे हैं, लेकिन बंगाल के स्थानीय निवासी एक लम्बे अरसे से यह कहते आ एह हैं कि उन पर अपनी ज़मीन-जायदाद उन अप्रवासियों को बेचने का दबाव है, जो सीमा पार गाय का व्यापार कर अमीर बन गए।



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