बांग्लादेश: दुर्गा पूजा के बाद इस्कॉन मंदिर पर मजहबी भीड़ का हमला, 3 भक्तों की मौत, तालाब में तैरते मिले शव

16 अक्टूबर, 2021
बांग्लादेश में हिन्दुओं पर फिर हुआ हमला

दुर्गा पूजा के पांडालों में तोड़फोड़ और प्रतिमाएँ क्षतिग्रस्त करने के बाद पड़ोसी देश बांग्लादेश से एक और हिंदू मंदिर में तोड़फोड़ की घटना सामने आई है। इस बार नोआखाली क्षेत्र के एक इस्कॉन मंदिर को निशाना बनाया गया जिसमें तोड़फोड़ की गई है।

बांग्लादेश से निरंतर अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हमले और अत्याचार की घटनाएँ सामने आती रहती हैं। पिछले दिनों दुर्गा पूजा के अवसर पर कई दुर्गा पांडालों पर उग्र इस्लामिक भीड़ द्वारा आक्रमण और तोड़फोड़ की गई थी। यहाँ कई प्रतिभाओं को भी खंडित किया गया था।

इस अमानवीय घटना के बाद बांग्लादेश के नोआखाली ज़िले में शुक्रवार (15 अक्टूबर, 2021) को अब एक इस्कॉन संस्था के मंदिर को निशाना बनाया गया। करीब 200 लोगों ने इस मंदिर पर हमला किया और एक व्यक्ति की जान भी ले ली। ताजा जानकारी के अनुसार अब तक इस हमले में तीन लोगों की मृत्यु हो चुकी है।

https://twitter.com/ANI/status/1449254939620900866

इस्कॉन के निदेशक व्रजेंद्र नंदन दास ने विवाद को लेकर कहा:

“हमला करने वाले आतंकवादी थे, वे बहुसंख्यक समुदाय के गुंडे हैं। हमारे 3 भक्त मारे गए हैं। बांग्लादेश सरकार को भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए कार्रवाई करनी चाहिए।”

समाचार एजेंसी ANI ने एक और ट्वीट के माध्यम से ‘सुधार’ करते हुए बताया है कि इस्कॉन के निदेशक ने कहा, “हमला करने वाले बहुसंख्यक समुदाय (बांग्लादेश के) के हैं। हमारे 3 भक्त मारे गए हैं। बांग्लादेश सरकार को भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए कार्रवाई करनी चाहिए।”

हमले में मारे गए व्यक्ति की पहचान पार्था दास के रूप में हुई है। व्यक्ति का शव मंदिर के समीप ही एक तालाब में तैरता पाया गया। मामले को लेकर इस्कॉन संस्था ने ट्वीट करते हुए जानकारी साझा की और लिखा:

“बांग्लादेश के नोआखाली में एक भीड़ द्वारा इस्कॉन मंदिर और भक्तों पर हमला किया गया। मंदिर को क्षति पहुँचाई गई है और भक्त की स्थिति भी नाज़ुक है। हम बांग्लादेश की सरकार से हिंदुओं की सुरक्षा पर ध्यान देने का आग्रह करते हैं और इस हमले के आरोपितों के विरुद्ध कार्रवाई की माँग करते हैं।”




दुर्गा पूजा में भी हुआ था उपद्रव 

बता दें कि हाल ही में बांग्लादेश के चितगाँव डिवीजन में आने वाले चाँदपुर ज़िले में दुर्गा पांडालों पर इस्लामी कट्टरपंथी भीड़ ने हमला किया था। इसमें पांडालों में तोड़फोड़ की गई और कई प्रतिमाओं को क्षतिग्रस्त भी किया गया।

इन घटनाओं की शुरुआत मुख्यतः बुधवार (13 अक्टूबर, 2021) की सुबह से हुई जब कोमिला के नानुआ दिघी क्षेत्र में यह खबर फैला दी गई कि दुर्गा पूजा के एक मंडप के भीतर मूर्ति के साथ में मुस्लिम पंथ के मजहबी ग्रंथ पाए गए हैं।

इस खबर की तस्वीरें साझा करने के साथ ही यह कहा गया कि हिंदुओं ने कुरान का अपमान किया है, जिसके बाद इन पांडालों पर सैकड़ों कट्टरपंथियों की भीड़ ने हमला बोल दिया और प्रतिमाओं को खंडित करने के साथ पंडाल में तोड़फोड़ भी की।

बता दें कि चितगाँव के साथ-साथ गाजीपुर, बंदरबान, चपाई नवाबगंज और मौलवी बाजार समेत कई इलाकों में दुर्गा पूजा में खलल डालने और उपद्रव मचाने की घटनाएँ सामने आई थीं। इस मामले में कई लोगों के घायल होने की भी खबर थी।

शेख़ हसीना के फर्जी आश्वासन 

सोशल मीडिया पर लोगों के आवाज उठाने के बाद बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख़ हसीना ने इस मामले में सख्त कार्रवाई करने की बात की थी। बांग्लादेशी प्रधानमंत्री ने कहा:

“कोमिला में हुई घटना पर विस्तार से जाँच होगी। किसी को बख़्शा नहीं जाएगा। वे किस मज़हब के हैं इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता। आरोपितों को पकड़ा जाएगा और सज़ा दी जाएगी।”

शेख़ हसीना ने राजधानी ढाका के ढाकेश्वरी मंदिर में हिंदुओं की एक सभा को संबोधित करते हुए भी कहा था:

“आप सब इस देश के नागरिक हैं जहाँ आप बराबरी के अधिकारों के साथ रहते हैं। हम यह चाहते हैं कि आप सभी यहाँ अपने त्यौहार मनाएँ और धर्म का पालन बराबरी से करें। यही बांग्लादेश राष्ट्र की विचारधारा एवं नीति है। मेरा आपसे आग्रह है कि आप स्वयं को कभी अल्पसंख्यक की दृष्टि से न देखें।”

ध्यान देने योग्य बात यह है कि बांग्लादेशी प्रधानमंत्री के इन सभी बयानों और आश्वासनों के बाद भी निरंतर बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर न केवल हमले होते हैं, बल्कि उनकी संपत्ति और मंदिरों को भी इस्लामी भीड़ द्वारा क्षतिग्रस्त किया जाता है।

इस मामले में भारत सरकार को अवश्य ही बांग्लादेश सफरकार से गंभीरता से वार्ता करनी चाहिए और अगर तब भी समाधान नहीं निकलता तो विश्व पटल पर इस विषय को उठाना चाहिए।



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