कभी जंगल, तो कभी घर में घुस कर TMC के गुंडों ने किया गैंगरेप: न्याय माँगने SC पहुँचीं महिलाएँ, मौन थे सत्ता व प्रशासन

14 जून, 2021 By: डू पॉलिटिक्स स्टाफ़
महिलाओं ने TMC के गुंडों पर गैंगरेप का आरोप लगाया है

बंगाल चुनाव नतीजों के बाद हिंसा और बलात्कार का शिकार हुए असहाय भाजपा कार्यकर्ताओं ने अब सुप्रीम कोर्ट की शरण ली है। बंगाल में चुनाव के बाद सामूहिक बलात्कार की शिकार पीड़िताओं के सुप्रीम कोर्ट पहुँचने पर ऐसी डरावनी कहानियाँ सामने आई हैं, जिन्हें सुनकर आपका दिल दहल जाएगा।

पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद की हिंसा के दौरान टीएमसी कार्यकर्ताओं द्वारा कथित तौर पर मार दिए किए गए दो भाजपा कार्यकर्ताओं के परिजनों और सामूहिक बलात्कार की शिकार हुई कुछ महिलाओं ने अब न्याय की अंतिम उम्मीद की आशा में सुप्रीम कोर्ट रुख किया है। सुप्रीम कोर्ट में आवेदन देते हुए पीड़ित महिलाओं ने सत्तारूढ़ तृणमूल पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा अपने साथ हुए भयानक सामूहिक बलात्कार का वर्णन किया है।

पीड़ितों ने अपने साथ हुए इन जघन्य अपराधों के लिए एसआईटी जाँच की गुहार लगाई है। सामूहिक बलात्कार की शिकार हुई इन पीड़ित महिलाओं ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष बंगाल में अपने साथ हुई हिंसा का विस्तृत ब्यौरा और बंगाल पुलिस की कथित निष्क्रियता को भी उजागर किया है।

न्याय की माँग कर रहे इन पीड़ितों ने गुजरात में गोधरा के बाद के सांप्रदायिक दंगों के मामलों में सुप्रीम कोर्ट द्वारा की गई सक्रिय कार्रवाई का हवाला दिया। उन्होंने उसी तरह राज्य सरकार की पनाह में टीएमसी कार्यकर्ताओं द्वारा राज्य में एक पखवाड़े के भीतर गैंगरेप और हत्याओं की घटनाओं की भी अदालत की निगरानी में एसआईटी जाँच की माँग की है। महिलाओं ने यह माँग भी की है कि मामले का ट्रायल शहर से बाहर किया जाए।

बुजुर्ग महिला के साथ सामूहिक बलात्कार

एक 60 वर्षीय महिला ने आवेदन देकर सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि किस तरह से टीएमसी कार्यकर्ता विधानसभा चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद पूर्व मेदिनीपुर के एक गाँव में उसके घर में घुस गए और कीमती सामान लूटने से पहले उसके 6 साल के पोते के सामने उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया।

बुजुर्ग महिला नें सुप्रीम कोर्ट में दिए अपने आवेदन में बताया कि भाजपा के निर्वाचन क्षेत्र (खेजुरी) से जीतने के बावजूद भी लगभग 200 टीएमसी कार्यकर्ताओं की भीड़ ने 3 मई को उनके घर को घेर लिया और उन्हें बम से उड़ाने की धमकी दी।

अगली सुबह डर के मारे उसकी बहू घर छोड़कर चली गई। महिला ने बताया कि 4-5 मई की रात को पाँच टीएमसी कार्यकर्ताओं ने घर में घुसकर मारपीट की, घर से कीमती सामान लूट लिया। इसके बाद उसे एक खाट से बाँध दिया और फिर उसके पोते के सामने ही सभी टीएमसी कार्यकर्ताओं ने उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया।

महिला ने कहा कि अगली सुबह पड़ोसियों ने उसे बेहोशी की हालत में पाया और उसे जिला अस्पताल में भर्ती कर दिया गया। उसने आरोप लगाया कि जब उसका दामाद प्राथमिकी दर्ज कराने पुलिस के पास गया तो पुलिस ने मानने से इनकार कर दिया।

महिला ने आगे कहा कि के बलात्कार पाँच आरोपितों द्वारा किया गया था, जिनका नाम अपनी शिकायत में महिला ने पुलिस को दिया था। पहले तो बलात्कार के अपराध को स्वीकार करने से ही स्थानीय पुलिस ने इंकार कर दिया, लेकिन जब मेडिकल रिपोर्ट में बलात्कार की पुष्टि हो गई तो 5 आरोपितों में से सिर्फ एक को इस अपराध के लिए नामित किया गया।

पीड़िता ने सभी आरोपितों के सत्ताधारी दल से जुड़े होने की बात कहते हुए एसआईटी और सीबीआई जाँच की माँग की है।

अपने आवेदन में पीड़िता ने कहा, “हालाँकि इतिहास भीषण उदाहरणों से भरा है, जहाँ बलात्कार को शत्रुओं की आबादी को आतंकित करने और दुश्मन सैनिकों को हतोत्साहित करने की रणनीति के रूप में प्रयोग किया गया था, लेकिन लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भागीदारी के लिए एक महिला नागरिक के खिलाफ इस तरह के क्रूर अपराध कभी नहीं किए गए।”

पीड़िता ने आगे जिक्र किया, “उक्त अपराधों को राज्य के अधिकारियों और पुलिस की निष्क्रियता ने न सिर्फ सुगम बनाया, बल्कि अपराध के बाद पीड़िता को ही अपमान का सामना करना पड़ा। उन्हें अपने साथ हुए इस अपराध की रिपोर्ट दर्ज कराने के ‘दुस्साहस के’ लिए भी हिंसा का सामना करना पड़ा।”

उन्होंने कोर्ट को बताया है कि राज्य में चुनाव के बाद हुई हिंसा में टीएमसी कार्यकर्ताओं ने बदला लेने, अपमानित करने और राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को चुप कराने के लिए बलात्कार को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया।

नाबालिग दलित लड़की ने सुनाई खौफनाक दास्तान

अनुसूचित जाति समुदाय की एक अन्य 17 वर्षीय नाबालिग लड़की ने भी 9 मई को टीएमसी कार्यकर्ताओं द्वारा उसके सामूहिक बलात्कार और मुकदमे को राज्य से बाहर स्थानांतरित करने की एसआईटी या सीबीआई जाँच की माँग करते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

उसने कहा कि टीएमसी समर्थकों द्वारा न केवल उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया गया बल्कि बलात्कार के बाद उसे मरने के लिए जंगल में छोड़ दिया गया। अगले ही दिन एक टीएमसी का स्थानीय नेता बहादुर एसके उसके घर आया और परिवार के सदस्यों को पुलिस में शिकायत दर्ज न करने की धमकी दी। टीएमसी नेता ने शिकायत करने पर उसका घर जलाने और जान से मारने की धमकी भी दी।

पीड़ित लड़की ने बताया कि उसे बाल कल्याण गृह में रखा जा रहा है और उसके माता-पिता को उससे मिलने की अनुमति नहीं है। उन्होंने कहा, “स्थानीय पुलिस-प्रशासन उसके और परिवार के सदस्यों के प्रति सहानुभूति रखने के बजाय उसके परिवार पर दबाव बना रही है कि उनकी दूसरी बेटी को भी ऐसा ही परिणाम भुगतना पड़ सकता है।”

पति की हत्या की शिकायत लेकर थाने गई महिला को गाली देकर भगाया

एक अन्य महिला, पूर्णिमा मंडल ने बताया कि 14 मई को दिन दहाड़े उसके पति धर्म मंडल को चुनाव के बाद की हिंसा के दौरान दिनदहाड़े कुल्हाड़ी से काट दिया गया था। टीएमसी कार्यकर्ताओं ने उनके पति की हत्या इसलिए की थी क्योंकि उनके पति ने चुनावों में भाजपा के लिए प्रचार किया था।

पीड़िता ने बताया कि उसे बलात्कार की नियत से निर्वस्त्र कर दिया गया था और उसे बचाने का प्रयास कर रहे उसके बहनोई पर भी जानलेवा हमला किया गया। महिला ने सुप्रीम कोर्ट को दिए आवेदन में बताया कि इस हिंसक भीड़ का नेतृत्व स्थानीय मजहबी नेता कर रहा था।

पूर्णिमा ने कहा कि पुलिस ने घटना में टीएमसी के निर्वाचित प्रतिनिधि कालू शेख की भूमिका को दबा दिया, जो न केवल उसके पति की हत्या करने वाली उस हिंसक भीड़ का नेतृत्व कर रहा था बल्कि उसने ही उस हिंसक भीड़ को मेरे पति को जान से मारने का आदेश दिया था।

महिला ने आरोप लगाया कि घटना के बाद सब कुछ तबाह हो गया था औऱ अपने पति के दाह संस्कार के बाद वह शिकायत करने के लिए पुलिस स्टेशन गई तो पुलिस अधिकारी ने न केवल उसका बयान दर्ज करने से इनकार कर दिया बल्कि उसे गाली और धमकी देते हुए थाने से बाहर भगा दिया गया।



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