बंगाल: डेढ़ माह मुर्दाघर में सड़ता रहा दुर्गा पूजा मनाने निकले SI का शव, ममता की पुलिस नहीं ढूँढ पाई

27 नवम्बर, 2021
राजारहाट थाने के सब-इंस्पेक्टर पार्थ चौधरी (फ़ाइल फ़ोटो)

ममता बनर्जी के पश्चिम बंगाल में एक पुलिसकर्मी दुर्गापूजा के छठे दिन अपने घर से निकले, लेकिन कौन जानता था कि वह वापस अपने घर कभी नहीं लौटेंगे। करीब डेढ़ महीने बाद पश्चिम बंगाल पुलिसकर्मी का शव बरामद किया गया। घटना से पूरा परिवार सदमे में है।

उपनिरीक्षक पार्थ चौधरी (Partha Chowdhury, 48) राजारहाट थाने में उपनिरीक्षक के पद पर तैनात थे और पिछले 11 अक्टूबर से ही लापता थे। रिपोर्ट्स के अनुसार, पार्थ चौधरी की माँ और भाई रवींद्रनाथ नगर, चंचुरा में रहते थे। जबकि पार्थ अपनी पत्नी और बेटे के साथ बेलूर में रहते थे। दुर्गापूजा के छठे दिन वह रोज की तरह घर से बाहर निकले, लेकिन फिर कभी घर नहीं लौटे।

परिवार की ओर से तलाश शुरू कर दी गई है। उनकी माँ ने भी अपने बेटे को खोजने का अनुरोध करते हुए अखबार में एक विज्ञापन दिया। इसके अलावा, उनके साथी भी सोशल मीडिया पर उसकी तस्वीरों के साथ उन्हें खोजने का अभियान चलाते रहे।

इस तरह करीब डेढ़ माह का समय गुज़र गया लेकिन पार्थ का कुछ पता नहीं चला। 20 अक्टूबर को बाली पुलिस ने पद्मबाबू रोड पर एक सुनसान जगह से एक शव बरामद किया। पता चला है कि करीब तीन दिन से शव वहीं पड़ा हुआ था। इसके बाद शव को हावड़ा पुलिस मुर्दाघर भेज दिया गया। उनका मोबाइल पुलिस अभी तक भी नहीं बरामद कर पाई है।

इस बीच बेलूर थाने की पुलिस ने भी अपने लापता पुलिस अधिकारी की तलाश जारी रखी। इस दौरान उन्होंने अलग-अलग थानों में सभी अज्ञात शवों की तलाशी शुरू कर दी। इसी बीच पार्थ चौधरी न्यूटाउन पुलिस के हाथ लग गए, लेकिन जिंदा नहीं, मुर्दाघर में लावारिश शवों के बीच मुर्दा हालत में।

इसकी खबर उनके परिवार को दी गई, जिसके बाद परिजनों ने आकर शव की शिनाख्त की। गुरुवार को शिनाख्त के बाद शुक्रवार को उसका शव उसके परिवार को सौंप दिया गया। परिवार के मुताबिक अगर किसी पुलिसकर्मी को ढूँढने में इतना वक्त लग जाए तो आम लोगों के साथ क्या होता होगा, इसका अंदाजा लगाना आसान है।

मृतक के भाई अभिषेक चौधरी ने बताया, “वह राजारहाट थाने में कार्यरत थे। 11 अक्टूबर के दिन वह घर से सुबह साढ़े दस बजे निकले तब से लापता थे। दो दिन बाद हमने बेलूर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। अखबारों में गुमशुदा लोगों की लिस्ट में विज्ञापन भी दिया था।”

उन्होंने बताया, “शुक्रवार को हमने उनके कपड़े और अन्य चीजों को देखकर उनकी पहचान की। मैंने पुलिस से सुना कि मेरे भाई का शव बाली रेलवे पुल के नीचे से बरामद किया गया है।”

हालाँकि बेलूर पुलिस स्टेशन में एक गुमशुदगी की डायरी रखी गई थी और डेढ़ महीने से मुर्दाघरों की खाक छान रही थी, लेकिन पार्थ का शव न्यूटाउन पुलिस को मिला। स्वाभाविक रूप से सवाल यह उठता है कि बेलूर पुलिस स्टेशन उसी जिले के अंदर होने के बावजूद उन्हें अपने सहयोगी का शव क्यों नहीं मिला?



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