जिन बैलों को कभी नेहरू ने कॉन्ग्रेस का चुनाव चिन्ह बनाया, वो राहुल गाँधी को 'नेता' कहने पर भड़क गए

10 जुलाई, 2021 By: संजय राजपूत
राहुल गाँधी की जय-जयकार सुन भड़क गए बैल

देश में पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों के खिलाफ कॉन्ग्रेस ने कई जगहों पर प्रदर्शन किया। मुम्बई में महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष भाई जगताप ने विरोध प्रदर्शन का एक अनोखा तरीका निकाला। भाई जगताप कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ बैलगाड़ियों के ऊपर चढ़ कर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। प्रदर्शन में सबसे आगे चल रही बैलगाड़ी में भाई जगताप लगभग दो दर्जन कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं साथ खड़े थे।

इस दौरान कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता नारेबाजी भी कर रहे थे। डीज़ल पेट्रोल की महँगाई तो खैर मुद्दा था ही लेकिन कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता दिन हो या रात, हर मौके पर राहुल गाँधी को खुश करने की कोशिश के प्रयास में रहते हैं इसलिए राहुल जी की जयजयकार भी होने लगी।

कॉन्ग्रेस समर्पित कार्यकर्ता राहुल गाँधी को इस देश का पीएम बनते देखना चाहते, हालाँकि ये अभी तक एक अबूझ पहेली ही है कि कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता किस आधार पर उन्हें इतने बड़े ओहदे पर देखना चाहते हैं।

खैर, जैसे ही प्रदेश अध्यक्ष जगताप और कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने ‘देश का नेता कैसा हो.. राहुल गाँधी जैसा हो’ के नारे लगाए, बैल भड़क गए और बैलगाड़ी टूट गई। बैलगाड़ी टूटने से कॉन्ग्रेस प्रदेश अध्यक्ष सहित सभी कार्यकर्ता नीचे गिर गए, जिसकी वजह से कुछ लोगों को मामूली चोटें आई हैं। अब कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं का ख्वाब भले ही राहुल बाबा को पीएम बनते देखने का हो, लेकिन बैलों को शायद राहुल गाँधी के पीएम बनने की बात पसन्द नहीं आई।


इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद लोग तंज कसते हुए विभिन्न प्रकार की टिप्पणियाँ कर रहे हैं। ऐसे कृत्य के लिए बैलों और बैलगाडी की कड़ी से कड़ी निंदा की जानी चाहिए, जो ऐसे समर्पित कार्यकर्ताओं को भी मज़ाक का पात्र बनवा दिया।

इनका मज़ाक नहीं उड़ाया जाना चाहिए क्योंकि जितने समर्पित राहुल गाँधी के कार्यकर्ता हैं, उतने ही समर्पित राहुल जी भी अपने कार्यकर्ताओं के प्रति है। समर्पण का आलम तो ये है कि राहुल गाँधी एक सामान्य प्रश्न का उत्तर भी बगल में खड़े पाँच कार्यकर्ताओं से पूछकर ही देते हैं।

अक्सर वो किसी गरीब और दलित कार्यकर्ता के घर रोटी खाते या उसके खेतों में श्वेत वस्त्र धारण किए भ्रमण करते दिख जाते हैं। समर्पण भाव की अधिकता राहुल गाँधी में इतनी है कि वो सपा के साथ सपाई बन जाते हैं, केजरीवाल के साथ अपोला बन जाते हैं, कन्हैया कुमार के साथ वामपंथी बन जाते हैं।

चुनावों में वो शिव-भक्त और जनेऊ धारी राष्ट्रभक्त हिन्दू बन जाते हैं और जेएनयू में भारत के टुकड़े होने का नारा देने वालों का समर्थन भी कर देते हैं। केरल में वो बीफ का समर्थन कर देते हैं और मध्यप्रदेश में दत्तात्रेय गोत्र के ब्राह्मण भी बन जाते हैं।

‘चौकीदार चोर है’ कहने के बाद चेहरे पर बिखरी हुई डिम्पलमई मुस्कान देखते हुए राहुल गाँधी का ओजस्वी भाषण सुन लो, तो ऐसा लगता है कि चीन ने पड़ोस वाले घर तक घुस कर कब्जा कर लिया है, वो तो घर से बाहर निकलने पर पता चलता है कि शहीद पार्क में अब भी तिरंगा लहरा रहा है।

कॉमेडी में राहुल गाँधी ने देश में सबसे ऊँचा स्टैंडर्ड स्थापित किया है, जिनसे नए स्टैंडअप कॉमेडियन कुछ सीख सकते हैं। राहुल गाँधी ने ही देश को वंशवाद के खिलाफ जाकर पहला पीएम मनमोहन सिंह के रूप में दिया था। ऐसी बहुमुखी प्रतिभा के धनी व्यक्ति को देश का पीएम क्यों नहीं होना चाहिए?

जिस देश में लोग नशे की हालत में जेनरेटर को भी डीजे समझ कर नाच सकते हैं, वहाँ नेहरू श्रेष्ठ, राजीवनंदन राहुल गाँधी जी पीएम क्यों नहीं हो सकते? देश की जनता को समझना चाहिए कि राहुल गाँधी ने देश को बहुत कुछ दिया है। देश को दिए अपने योगदान में राहुल गाँधी का सबसे बड़ा योगदान तो यही है कि उन्होंने देश को अब तक कोई नया गाँधी नहीं दिया है।

यह भी एक इत्तेफाक है कि देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने कॉन्ग्रेस पार्टी के चुनाव चिन्ह के तौर पर जिन बैलों की जोड़ी को चुना था, आज वही बैल राहुल गाँधी की जय-जयकार पर हो रहे हैं।





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