शिशु मंदिर की शिक्षिकाएँ बनाती थीं ईसाई: 5 परिवारों का धर्मांतरण, गंगाजल पिलाकर घरवापसी

19 जुलाई, 2021
प्रत्येक रविवार को देवबलौदा में गरीबों को चर्च बुलाया जाता था।

छत्तीसगढ़ में 5 हिंदू परिवारों का मतांतरण कराने का मामला सामने आया है। इस मामले में पुलिस ने शिशु मंदिर की प्राचार्या समेत 3 महिलाओं से बड़ी संख्या में बाइबल और अन्य सामाग्री जब्त की हैं।

धर्मांतरण में शामिल तीनों महिलाओं ने तीन महीने पहले ही ईसाई धर्म अपनाया था। ये महिलाएँ सरस्वती शिशु मंदिर से जुड़ी थीं, जो कि ‘विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान’ का हिस्सा है और आरएसएस द्वारा संचालित होता है।

छत्तीसगढ़ के जिला दुर्ग के चरोदा स्थित चर्च में रविवार (18 जुलाई, 2021) को 5 हिंदू परिवारों के 20 सदस्यों का मतांतरण कराया गया। सूचना मिलने पर हिंदू संगठन के कार्यकर्ताओं ने चर्च पहुँचकर हंगामा किया।

हिन्दूवादी संगठनों के आने की सूचना पर खुर्सीपार निवासी ईसाई प्रचारक पास्टर प्रमोद पिछले दरवाजे से भाग गया मगर मतांतरण में भूमिका निभाने वाली 3 महिलाएँ पकड़ी गईं।

पकड़ी गईं इन महिलाओं में से एक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरस्वती शिशु मंदिर की प्राचार्या, दूसरी शिक्षिका और एक अन्य महिला शामिल है। तीसरी महिला विधवा है, जो कि दूसरी जगह उरला से धर्मान्तरण के ही काम के लिए वहाँ पहुँची थी।

ईसाई धर्म अपनाने वाले इन परिवारों की गंगाजल पिलाकर हिंदू धर्म में वापसी कराई गई। पुलिस ने पकड़ी गई महिलाओं से ईसाईयों की पवित्र किताब बाइबल और अन्य मतान्तरण सम्बन्धी सामग्री बरामद की है।

पास्टर प्रमोद चर्च के पीछे के दरवाजे से भागने में सफल रहा लेकिन उसकी कार वहीं खड़ी मिल गई। इस दौरान मौके से ईसाई धर्म और मतान्तरण संबंधी विभिन्न सामाग्री के साथ सरस्वती शिशु मंदिर की प्राचार्य पदमा महानंद, शिक्षिका संगीता बाघ और रीतू साहू पकड़ी गई।

तीनों महिलाओं से बड़ी संख्या में बाइबल और अन्य सामाग्री जब्त की गई। कहा जा रहा है कि तीनों महिलाओं ने तीन महीने पहले ही ईसाई धर्म अपनाया है, हालाँकि बाद में तीनों महिलाओं को हिरासत में लेने के बाद चेतावनी देकर छोड़ दिया गया।

कोरोना ‘आपदा’ को बनाया ‘अवसर’

धर्मान्तरित पाँचों परिवारों को डा विशाल चंद्राकर ने गंगाजल पिलाकर घरवापसी कराई। धर्मान्तरण के शिकार हुए पाँचों परिवारों ने बताया कि कोविड लॉकडाउन के दौरान यह सभी लोग रोज उनके पास आते थे। हिन्दू परिवारों को ये लोग ईसाई धर्म अपनाने के लिए विभिन्न प्रलोभन देते थे तथा शांति मिलने की बात कहते थे।

पीड़ित परिवारों ने कहा कि उन्हें बीते तीन चार महीने से लगातार प्रलोभन दिया जा रहा था तथा ईसाई धर्म में शांति और तरक्की की बात कही जा रही थी। हिन्दू धर्म के खिलाफ भड़काते हुए आरोपित यह भी कहते थे कि लॉकडाउन में हिंदू धर्म या उनके समाज ने उन्हें क्या दिया है?

जीआरपी थाना प्रभारीचरौदा महेंद्र पांडेय ने कहा, “चर्च द्वारा हिन्दू परिवारों के मतान्तरण की सूचना उन्हें मिली थी लेकिन किसी के खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई है।” उन्होंने कहा कि पकड़ी गईं महिलाओं को हिरासत में लेकर पूछताछ करने के बाद चेतावनी देकर छोड़ दिया गया है।





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