हाल ही में रायपुर में हुए धर्म संसद में मोहनदास गाँधी के विरुद्ध बयानबाज़ी करने को लेकर चर्चा में आए संत कालीचरण को मध्य प्रदेश के खजुराहो से गिरफ्तार कर लिया गया है। कालीचरण पर गाँधी के विरुद्ध आपत्तिजनक टिप्पणी करने और अभद्र भाषा का प्रयोग करने को लेकर मामला दर्ज किया गया था।
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में रविवार (26 दिसंबर, 2021) को एक धर्म संसद का आयोजन हुआ था। इस धर्म संसद का एक वीडियो इंटरनेट पर खालसा वायरल हुआ था, जिसमें संत कालीचरण नामक साधु मोहनदास गाँधी को लेकर कुछ टिप्पणियाँ करते देखे गए थे।
इसमें उन्होंने गाँधी के विरुद्ध कुछ ‘अपमानजनक शब्दों’ का प्रयोग किया था और नाथूराम गोडसे को भी नमन किया था। अपने बयान में कालीचरण ने कहा था:
“महा ह#मी मोहनदास करमचंद गाँधी ने सत्यानाश कर दिया। नाथूराम गोडसे जी को नमस्कार है कि मार डाला उस ह#मी को। ऑपरेशन करना बहुत ज़रूरी होता है, फोड़े-फुंसियों का, नहीं तो ये कैंसर बन जाते हैं।”
इस बयान के बाद कालीचरण का वीडियो सोशल मीडिया पर खासा वायरल हो गया था और इसी को लेकर उनके विरुद्ध रायपुर में ही एफआईआर दर्ज हो गई थी।
पुलिस तभी से उनकी तलाश कर रही थी। पूरे विवाद के चार दिनों बाद बृहस्पतिवार (3 दिसंबर, 2021) की सुबह लगभग 4:00 बजे पुलिस ने कालीचरण को मध्य प्रदेश के खजुराहो से गिरफ्तार कर लिया।
संत कालीचरण के विरुद्ध आईपीसी की धारा 294, 295(A), 298, 505(2) और 506 (2) के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया है। ये सभी धाराएँ धार्मिक भावनाएँ भड़काने, घृणा और वैमनस्य फैलाने और आपराधिक धमकी देने जैसी हैं।
रायपुर के एसपी प्रशांत अग्रवाल के अनुसार, “बागेश्वर धाम के पास एक व्यक्ति के घर से तड़के चार बजे कालीचरण की गिरफ़्तारी की गई। उसने पास में एक लॉज भी बुक करा रखा था।”
प्रारंभिक रिपोर्ट्स केवल इतना कह रही हैं कि कालीचरण को आज राजधानी रायपुर लाया जा सकता है और उनके खिलाफ राजद्रोह की धाराएँ भी जोड़ दी हैं।
वहीं, एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश सरकार ने कहा कि छत्तीसगढ़ की कॉन्ग्रेस सरकार ने मध्य प्रदेश पुलिस को बिना बताए कालीचरण महाराज को गिरफ्तार कर अंतर्राज्यीय प्रोटोकॉल का उल्लंघन किया है।
इस मामले में एमपी के डीजीपी ने छत्तीसगढ़ राज्य के डीजीपी से चर्चा करके गिरफ्तारी की प्रक्रिया पर आपत्ति दर्ज की और स्पष्टीकरण माँगा है। पुलिस के अनुसार कालीचरण महाराज की गिरफ़्तारी के लिए तीन टीमें अलग अलग राज्यों में भेजी गई थी।
बता दे 26 दिसंबर को धर्म संसद में बयानबाज़ी के बाद कालीचरण ने अपने यूट्यूब चैनल पर भी एक वीडियो साझा किया था, जिसमें उन्होंने धर्म संसद में दिए गए अपने बयान पर अड़े रहने की बात कहते हुए आगे अपने बयान की व्याख्या दी थी।
इसके साथ ही अंत में उन्होंने यह भी कहा था कि अगर सच बोलने के कारण उन्हें मृत्युदंड भी दे दिया जाए तो उन्हें वह स्वीकार होगा।