चीन के कई बड़े देशों से बिगड़े संबंध: उइगर-तिब्बतियों के बाद अब निशाने पर हैं अपने ही नागरिक

04 जून, 2021 By: पुलकित त्यागी
अपनी कम्युनिस्ट नीतियों से चीन ने बिगाड़ लिए हैं समस्त विश्व से सबंध

विश्व भर को एक जानलेवा घिनौनी बीमारी से ग्रस्त करने के उपरांत चीन निरंतर अलग-अलग देशों  के सामने एक्सपोज हो रहा है। समस्त विश्व या तो चीन से नाराज़ प्रतीत होता है या सीधे तौर पर उनके साथ जंग जैसे हालात निरंतर बने हुए हैं। 

अपने साथ ज़मीनी सीमा साझा करने वाले देशों के साथ तो दूर चीन के अपने से मीलों दूर स्थापित देशों से भी दुश्मनी जैसे हालात हैं।

जहाँ चीन अपने से छोटे देशों को आँखें दिखा कर काबू में करना चाह रहा है, वहीं उससे बड़े देश निरंतर उस पर व्यापार समेत अनेक प्रकार के प्रतिबन्ध लगाने पर तुले हैं। अपने से बराबरी के देशों से भी या तो चीन प्रतिबंध झेल रहा है या सीमाओं के विवादों में उलझा है।

भारत-चीन सीमा विवाद

गत वर्ष गलवान घाटी क्षेत्र में भारतीय सैनिकों से मुठभेड़ करने के बाद से ही चीन भारत के साथ निरंतर सीमाओं को लेकर नोकझोंक में उलझे हुए है। जहाँ भारतीय सेना इस मामले में चीनी सैनिकों से बेवजह न उलझने का निरंतर प्रयास कर रही है, वहीं चीन द्वारा एक के बाद एक कुप्रयास जारी हैं।

चित्र साभार- Economic Times

रिपोर्ट की मानें तो चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) के पास अपनी वायु सेना एवं अन्य हवाई अस्त्र-शस्त्रों की स्थापना कर इलाके पर अपना कब्ज़ा जमाने के संकेत दिए हैं। ऐसा चीनी सेना द्वारा वेस्टर्न कमांड में पहली बार किया गया है।

बता दें कि गत वर्ष मुठभेड़ के दौरान दोनों देशों के सैनिक दिवंगत हुए थे, जिसके बाद दोनों देशों की सरकारों एवं सेनाओं के बीच भी बातचीत हुई और मामले को शांत कर दिया गया था। अब चीन ने दोबारा आक्रामक रुख अपनाना प्रारंभ कर दिया है।


यह भी पढ़ें:


तिब्बतियों पर कम्युनिस्ट राष्ट्र की क्रूरता

चीन द्वारा अपने ही देशवासियों पर किस प्रकार की बर्बरता की जाती है यह समस्त विश्व में किसी से छिपा नहीं है। उइगर समुदाय के साथ ही एक बड़ा समुदाय जो चीनी सरकार की इस क्रूरता का शिकार बना है, वह हैं तिब्बती! एक बड़ी तिब्बती जनसंख्या के क्षेत्र से विवशतापूर्वक पलायन किए जाने के बाद भी चीनी सरकार को अभी भी सुकून नहीं मिला है।

तिब्बत में रहने वाले अधिकतर लोग धार्मिक प्रवृत्ति के तथा सांसारिक मोह-माया से परे रहने वाले हैं। ऐसे में चीनी सरकार उन्हें अपने कब्ज़े में लेने के लिए उनकी धार्मिक स्वतंत्रता छीन कर उन पर राजनीतिक उत्पीड़न कर रही है।

यह सीधे तौर पर मानवाधिकारों के हनन का उदाहरण है। इतना ही नहीं, चीनी सरकार तिब्बतियों को उनके धार्मिक क्रियाकलापों से दूर करने को अपनी एक सफलता की तरह दिखती है।

चीनी सरकार के विरुद्ध प्रदर्शन करते तिब्बती बौद्ध भिक्षुक 

तिब्बत क्षेत्र के कम्युनिस्ट पार्टी प्रमुख वू यिंगीजे (Wu Yingjie) पूरी बेशर्मी से कहते हैं: 

“हमारे द्वारा अधिक से अधिक व्यक्तियों को एक अच्छा जीवन जीने के लिए उनके धार्मिक आस्था तथा समाजवाद के मिश्रण के साथ आगे बढ़ने के लिए तैयार किया जा रहा है।”


ऐसा नहीं है कि ज़मीनी सीमा से जुड़े होने वाले देशों के साथ ही चीन का विवाद है। चीन ने तो पूरे विश्व के साथ दुश्मनी मोल ले रखी है। 

ऑस्ट्रेलिया के साथ बढ़ता विवाद

समस्त विश्व में वुहान शहर से उपजा चीनी वायरस लाखों लोगों की जान ले रहा है। ऐसे में ऑस्ट्रेलिया की जनता में भी भारतीयों की ही तरह चीन व चीनी उत्पादों के प्रति विरोध उपज रहा है।

ऑस्ट्रेलिया के एक व्यक्ति जर्मी टो द्वारा एक वीडियो बनाकर सोशल मीडिया ऐप टिकटॉक पर डाला गया। वीडियो में जर्मी टो ने एक सुपरमार्केट में स्नीकर्स नमक चॉकलेट उठाकर अपने दर्शकों को बताया कि “क्या आप जानते हैं यह अब ऑस्ट्रेलिया में नहीं बल्कि चीन में बनती हैं।”

इस वीडियो के वायरल होने के बाद से ही ऑस्ट्रेलिया में भारी मात्रा में स्नीकर्स चॉकलेट को बॉयकॉट करने की रीत सी चल पड़ी, हालाँकि कंपनी के प्रवक्ता मार्स रिगले ने बताया कि कंपनी द्वारा उत्पादन चीन को केवल अस्थाई तौर पर दिया गया है, परंतु जनता का चीन के प्रति रोष होने के कारण चॉकलेट का बहिष्कार जारी बताया जा रहा है।

कनाडा से भी बिगड़े चीन के संबंध

कनाडा ने चीन पर आरोप लगाया है कि उसके द्वारा कनाडा में रह रहे ताइवानी-कैनेडियन एवं तिब्बती-कैनेडियन नागरिकों को विभिन्न तरीकों से परेशान किया जाता है।

रिपोर्ट की मानें तो चीनी अधिकारी डराने धमकाने के संचालन में लिप्त रहते हैं तथा कनाडा में बसे चीनी लोगों के चीन में रहने वाले परिवारों का उपयोग कर उन्हें डराने-धमकाने का कार्य करते हैं।

चीनी-कैनेडियन लोगों के लिए वीचैट जैसे ऐप ही चीन के समाचार, संचार इत्यादि का स्रोत हैं। चीनियों द्वारा यूनाइटेड फ्रंट एवं समूह बनाकर वीचैट आदि के माध्यम से चीनी भाषा में उइगर, तिब्बतियों, ताइवानियों के बारे में उल्टी-सीधी सूचनाएँ फैलाई जाती हैं।

अमेरिका ने अपनाया सख़्त रुख

पूर्व राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के समय से ही कोरोना वायरस को लेकर चीन पर अमेरिका की ओर से सख़्ती बरकरार है तथा उनके पद छोड़ने के बाद भी अमेरिकी प्रशासन इस मामले में ढील नहीं छोड़ रहा है।

कुछ दिन पहले ही पूर्व अमेरिकी राज्य सचिव माइक पॉम्पियो ने चीन पर निशाना साधते हुए कहा था, “कोरोना वायरस के स्रोत वुहान शहर की वुहान लैब पीपल्स लिबरेशन आर्मी (चीनी सेना) के साथ कई प्रकार की गतिविधियों में लिप्त है।” 

पॉम्पियो ने यह आरोप भी लगाया था कि चीन ने वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) के आग्रह के बाद भी उन्हें वुहान लैब का निरीक्षण करने की अनुमति नहीं दी

डॉनल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति चुनाव हारने के बाद विश्व भर में यह अनुमान लगाया जा रहा था कि अमेरिका का चीन पर दबाव कम हो जाएगा, परंतु अब तक ऐसा कुछ होता प्रतीत नहीं हो रहा है। अमेरिका के नए राष्ट्रपति जो बायडेन ने अमरीकी एजेंसियों को जाँच की अनुमति दे दी है। उन्होंने बुहान प्रयोगशाला पर सख्त निगरानी रखने के आदेश दिए हैं।


यह भी पढ़ें :


चीनी नागरिकों को भी नहीं बख़्श रहा चीन

समस्त विश्व से दुश्मनी मोल लेने के बाद चीन अब अपने खुद के नागरिकों पर कहर बरपा रहा है। उइगर एवं तिब्बतियों पर निर्ममता करने के बाद अब अन्य चीनी नागरिक भी चीन कम्युनिस्ट पार्टी के राज में सुरक्षित नहीं हैं।

25 लाख से अधिक लोगों द्वारा फॉलो किए जाने वाले एक ब्लॉगर क्यू ज़िमिंग (Qiu Ziming) ने कुछ समय पूर्व गलवान वैली में भारत चीन की मुठभेड़ में मारे गए चीनी सैनिकों को लेकर कुछ टिप्पणी की थी। 

चीनी ब्लॉगर क्यू ज़िमिंग (Qiu Ziming)

इस बात पर चीनी प्रशासन द्वारा उस पर ‘शहीदों को बदनाम’ करने का आरोप लगाकर उसे 8 महीनों के लिए जेल में डाल दिया गया। ब्लॉगर द्वारा निरंतर माफी माँगे जाने पर भी चीनी सरकार ने उसकी एक न सुनी।

विश्व भर से झगड़े करके, स्वयं के नागरिक का ही उत्पीड़न करने एवं करोड़ों लोगों को एक बीमारी से ग्रस्त करने के बाद चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग अब एक नाकामयाब अदाकार की भाँति अपने सकारात्मक PR पर ज़ोर देने की सोच रहे हैं।

 छवि सुधारने के लिए विश्व स्तरीय मीडिया से संपर्क

अपनी हरकतों से विश्वभर को अपना दुश्मन बना लेने के बाद चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग सोचते हैं कि वे कुछ पैसा खर्च करके इस छवि को बदलने में कामयाब हो जाएँगे।

चीनी राष्ट्रपति अब विश्व के समक्ष चीन की छवि ‘एक सच्चे थ्री-डाइमेंशनल और व्यापक चीन’ के रूप में बनाना चाहते हैं, जिस कारण वे अंतरराष्ट्रीय मीडिया को ऐसा करने के लिए पैसों का लालच दे रहे हैं। 

चीन के सरकारी मुखपत्र ‘ग्लोबल टाइम्स’ के द्वारा विश्व स्तर पर कई अनैतिक निर्णय लिए जाते हैं तथा विदेशी पत्रकारों को पक्षपाती कवरेज के नाम पर निकाल दिया जाता है। इसी के कारण विदेशी मीडिया के साथ पिछले कुछ वर्षों में चीन की अनबन बढ़ गई है।

इस को देखते हुए चीनी कम्युनिस्ट पार्टी ने कहा है:

“चीन को अपनी राष्ट्रीय ताकत और वैश्विक स्थिति से मेल खाने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय आवाज़ विकसित करने की आवश्यकता है। किस प्रकार चीनी कम्युनिस्ट पार्टी चीनी लोगों की प्रसन्न रखती है, यह विदेशियों को समझाने के लिए हमें कड़े प्रयास करने होंगे”


चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के इस बयान से यह साफ होता है कि चीन अपनी कुछ सालों में की गई बड़ी भूलों पर पर्दा डालने का संपूर्ण प्रयास कर रहा है।

एक और महामारी के लिए तैयार रहे विश्व ? 

साल भर में करोड़ों लोगों को संक्रमित तथा लाखों जाने लेने के बाद चीनी वायरस का प्रकोप अब भी कम होता प्रतीत नहीं हो रहा है। इसके साथ ही चीन एक नई दुविधा विश्व को प्रदान करने की तैयारी में दिखता है।

चीन के पूर्वी क्षेत्र जियाँगसू में एक 41 वर्षीय आदमी में एक नए प्रकार के बर्ड फ्लू के लक्षण देखने को मिले हैं। बीजिंग के नेशनल हेल्थ कमीशन (NHC) ने बताया कि यह बर्ड फ्लू का नया प्रकार H1ON3 के नाम से जाना जाता है।

28 अप्रैल को अस्पताल में भर्ती हुआ यह युवक 28 मई को इस बीमारी से ग्रस्त पाया गया। वैसे तो विश्व भर में बर्ड फ्लू के कई प्रकार पहले ही मौजूद हैं, परंतु यह विश्व के सामने आने वाला एक नया एवं विशेष प्रकार है जिसका उपचार शायद अब तक कई देशों के पास उपलब्ध न हो।

कोरोना वायरस की भाँति ही चीन इस बार भी संपूर्ण जानकारी प्रदान करने में आनाकानी कर रहा है तथा चीनी प्रशासन ने इस बार भी यह नहीं बताया यह व्यक्ति इस बीमारी से किस प्रकार ग्रसित हुआ है।

अब सोचने का विषय यह है कि क्या विश्व को चीन के द्वारा बनाए गए किसी नए जैविक हथियार के लिए तैयार रहने की आवश्यकता है ?





सहयोग करें
वामपंथी मीडिया तगड़ी फ़ंडिंग के बल पर झूठी खबरें और नैरेटिव फैलाता रहता है। इस प्रपंच और सतत चल रहे प्रॉपगैंडा का जवाब उसी भाषा और शैली में देने के लिए हमें आपके आर्थिक सहयोग की आवश्यकता है। आप निम्नलिखित लिंक्स के माध्यम से हमें समर्थन दे सकते हैं:

ताज़ा समाचार