सिविल सोसायटी है राष्ट्र-विरोधियों के युद्ध का नया जरिया: NSA अजीत डोभाल

18 नवम्बर, 2021
NSA अजित डोभाल ने कहा कि युद्ध का नया मोर्चा अब नागरिक समाज है

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल (NSA Ajit Doval) गत 11 नवंबर को हैदराबाद में पुलिस अकादमी में पासिंग-आउट परेड में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। इस दौरान NSA अजीत डोभाल ने नागरिक समाज यानी, ‘सिविल सोसायटी’ (Civil society) को ले कर बेहद महत्वपूर्ण टिप्पणी की।

उन्होंने अपने सम्बोधन में युद्ध और राष्ट्रीय सुरक्षा के एक नए राजनीतिक सिद्धांत और उसके खतरनाक प्रभाव को सामने रखा। पुलिस अधिकारियों के प्रशिक्षण के दीक्षांत समारोह के अवसर पर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने कहा कि युद्ध का नया मोर्चा अब नागरिक समाज है।

उल्लेखनीय है कि अंग्रेजी में इसी नागरिक समाज को ‘सिविल सोसायटी’ कहा जाता है। ये संगठन एक तरह से राज्य एवं समाज के बीच ‘प्रेशर ग्रुप’ के रूप में काम करते हैं। इसके तहत विभिन्न सामाजिक संगठन एवं संस्थाएँ आती हैं। जैसे- गैर सरकारी संगठन, मजदूर संगठन, महिला मोर्चा, व्यावसायिक संस्थाएँ और अन्य सामाजिक संगठन।

NSA डोभाल ने कहा कि अब युद्ध बहुत महँगे हो गए हैं जिस कारण पारम्परिक तौर पर उन्हें लड़ना कठिन होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे में देश के ख़िलाफ़ जो ताकतें हैं या जो राष्ट्र-विरोधी शक्तियाँ हैं, वे अब देश के नागरिक समाज को गुमराह करने का काम कर रही है।

उन्होंने कहा कि ऐसी ताकतें नागरिक समाज को लालच दे कर या उन्हें विभाजित कर अपने अधीन करने का काम कर रहे हैं और भविष्य में उन्हीं के सहारे या उनकी आड़ में देश के विरुद्ध युद्ध करेंगे। यह देश को भीतर से ही तोड़ देगा। पुलिसबल को निर्देश देते हुए NSA डोभाल ने कहा कि देश की रक्षा में अब सेना के साथ पुलिस को भी अतिरिक्त रूप से चौकन्ना रहना पड़ेगा।

नागरिक समाज को ‘फोर्थ जेनरेशन वॉरफेयर’ (चौथी पीढ़ी के युद्ध का हथियार) का नाम देते हुए NSA डोभाल ने कहा कि युद्ध अब राजनीतिक और सैन्य उद्देश्यों को हासिल करने का कारगर जरिया नहीं रहा क्योंकि यह न सिर्फ महँगा है बल्कि इसके परिणाम भी अनिश्चित हैं। उन्होंने कहा कि अब जंग का नया मोर्चा सिविल सोसाइटी को चंगुल में लेकर किसी देश के राष्ट्रीय हितों को चोट पहुँचाना है।

ट्रेनी आईपीएस अधिकारियों को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए इस नए तरह के खतरे को लेकर आगाह करते हुए कहा उन्होंने बताया कि कानून बन जाना ही काफी नहीं है, उसे प्रभावी तरीके से लागू करना भी बेहद आवश्यक है।

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने कहा कि ‘यदि आंतरिक सुरक्षा विफल होती है तो कोई देश महान नहीं बन सकता। अगर लोग सुरक्षित नहीं हैं तो वे आगे नहीं बढ़ सकते और संभवत: देश भी कभी आगे नहीं बढ़ेगा।’

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि कानून और व्यवस्था बनाए रखने के अलावा, पाकिस्तान, चीन, म्यांमार और बांग्लादेश जैसे देशों से लगती भारत की 15,000 किलोमीटर से अधिक लंबी सीमा के प्रबंधन में भी पुलिसबलों की बड़ी भूमिका है।

डोभाल ने कहा, “यदि आंतरिक सुरक्षा विफल होती है तो कोई देश महान नहीं बन सकता। अगर लोग सुरक्षित नहीं हैं तो वे आगे नहीं बढ़ सकते और संभवत: देश भी कभी आगे नहीं बढ़ेगा। देश में पुलिसबल की संख्या 21 लाख है और अभी तक 35,480 कर्मियों ने बलिदान दिया है।”

NSA डोभाल ने किसी घटना विशेष का उल्लेख किए बिना कहा, ‘हम भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के उन 40 अधिकारियों को भी याद करना चाहेंगे जो शहीद हो गए।’



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