J&K: बकरीद पर गाय-बछड़े-ऊँट काटने पर लगी रोक, उल्लंघन करने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई

16 जुलाई, 2021 By: डू पॉलिटिक्स स्टाफ़
ईद के अवसर पर कश्मीर में गाय और ऊँट काटने पर लगा प्रतिबंध

सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश के लिए नियमावली जारी की गई है। इसमें ईद (Bakra Eid) के अवसर पर गाय-बछड़े या ऊँट जैसे जानवरों की कुर्बानी न करने के निर्देश जारी किए गए हैं।

ईद के त्योहार पर कई मुस्लिम समूहों द्वारा अवैध रूप से कहीं ऐसे जानवरों की कुर्बानी दी जाती है, जिन्हें मारना देश में प्रतिबंधित है। ऐसे ही इस मामले पर सरकार द्वारा बृहस्पतिवार (15 जुलाई, 2021) को एक नोटिस जारी किया गया, जो जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश के लिए था। 

एनिमल स्लॉटर कानून के तहत प्रतिबंध

आने वाली 21 जुलाई को मुस्लिम समुदाय द्वारा मनाया जाने वाला त्योहार बकरीद (Bakra Eid) आ रहा है। इस त्योहार में मुस्लिम समुदाय द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में कई अलग-अलग जानवरों की कुर्बानी दी जाती है। जहाँ भारत के अधिकतर राज्यों में बकरे की कुर्बानी दी जाती है, वहीं कश्मीर में अधिकतर इसमें भेड़ का उपयोग होता है। कश्मीर के कई क्षेत्रों में गाय और बछड़े की भी कुर्बानी होती है।  


इस वर्ष जम्मू-कश्मीर के एनिमल हसबेंडरी एंड फिशरीज़ डिपार्टमेंट (J&K Animal/Sheep Husbandry and Fisheries Department) द्वारा इस मौके पर गाय, बछड़े और ऊँट जैसे जानवरों की कुर्बानी पर प्रतिबंध लगाया गया।

विभाग ने एक आधिकारिक नोटिस जारी किया, जिसमें कहा गया है कि केंद्र शासित प्रदेश जम्मू एंड कश्मीर में बकरीद के मौके पर एनिमल वेलफेयर लॉज़ यानी, प्रिवेंशन ऑफ क्रुएलिटी टू एनिमल्स 1960, ट्रांसपोर्ट ऑफ एनिमल वेलफेयर 1978, ट्रांसपोर्ट ऑफ एनिमल रूल 2001, स्लॉटर हाउस रूल्स 2001 और जानवरों की कुर्बानी के लिए फूड एंड सेफ्टी स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया द्वारा जारी निर्देशों का ध्यान रखा जाए।

इन्हीं नियमों के तहत केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में गाय इत्यादि को काटने पर प्रतिबंध लगाया गया है।

उल्लंघन करने पर कार्रवाई

बता दें कि वैसे तो ईद पर कश्मीर के अधिकतर क्षेत्रों में भेड़-बकरियाँ ही काटी जाती हैं, परंतु कुछ जगहों पर अवैध रूप से गाय और ऊँटों की भी कुर्बानी होती है। सरकार ने इन निर्देशों के साथ ही यह भी बताया कि ऐसा करने वालों और नियमावली का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

अगर इतिहास की बात करें तो जम्मू-कश्मीर क्षेत्र में डोगरा शासन के दौरान भी गाय काटने पर प्रतिबंध था। इसका उल्लंघन करने पर कड़े दंड दिए जाने का प्रावधान था।

जम्मू कश्मीर एक मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र है, जहाँ भारी मात्रा में माँसाहार का सेवन किया जाता है। यहाँ रहने वाला कश्मीरी पंडित समुदाय भी मछली और मटन जैसे माँसाहार का सेवन करता था परंतु उनके द्वारा गो-माँस का सेवन नहीं किया जाता था। 



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