जब गाय पूजी जाएगी, तभी देश समृद्ध होगा: जानिए इलाहबाद HC ने क्यों कही राष्ट्रीय पशु बनाने की बात

01 सितम्बर, 2021 By: डू पॉलिटिक्स स्टाफ़
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि गाय भारत की संस्कृति है और इसे राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाए

गाय भारत की संस्कृति का अभिन्न अंग है और इसे राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाना चाहिए। यह टिप्पणी इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार (01 अगस्त, 2021) को उत्तर प्रदेश गो-हत्या रोकथाम अधिनियम (Cow Slaughter Prevention Act) के तहत गो-हत्या के अपराध के आरोपित जावेद को जमानत देने से इन्कार करते हुए की।

जमानत याचिका जावेद ने दायर की थी, जिस पर गो-हत्या रोकथाम अधिनियम की धारा 3, 5 और 8 के तहत आरोप लगाए गए थे। गो-हत्या के आरोपित जावेद को जमानत देने से इन्कार करते हुए कोर्ट ने कहा-

“जब गाय का कल्याण होगा, तभी देश का कल्याण होगा अर्थात अगर गाय की पूजा की जाती है, तो देश समृद्ध होगा।”

इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश शेखर कुमार यादव की सिंगल बेंच ने कहा कि गाय को मौलिक अधिकार देने और गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने के लिए सरकार को संसद में एक विधेयक लाना चाहिए और गाय को नुकसान पहुँचाने की बात करने वालों को दंडित करने के लिए सख्त कानून बनाना चाहिए।

कोर्ट ने कहा:

“गो-रक्षा का कार्य केवल एक धर्म संप्रदाय का नहीं है, बल्कि गाय भारत की संस्कृति है और संस्कृति को बचाने का कार्य देश में रहने वाले हर नागरिक का है, चाहे वह किसी भी धर्म का हो।”

न्यायाधीश ने कहा कि गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करें और गाय को नुकसान पहुँचाने की बात करने वालों के खिलाफ सख्त कानून बनाएँ।

याचिकाकर्ता को जमानत देने से इनकार करते हुए कोर्ट ने कहा कि पूरी दुनिया में भारत ही एक ऐसा देश है जहाँ अलग-अलग धर्म के लोग रहते हैं, जो अलग-अलग पूजा कर सकते हैं लेकिन देश के लिए उनकी सोच एक जैसी है।

कोर्ट ने आगे कहा:

“ऐसे में जब हर कोई भारत को एकजुट करने और उसकी आस्था का समर्थन करने के लिए एक कदम आगे बढ़ता है, तो कुछ लोग जिनकी आस्था और विश्वास देश के हित में बिल्कुल नहीं है, वे देश में इस तरह की बात करके ही देश को कमजोर करते हैं।”

अदालत ने कहा, “उपरोक्त परिस्थितियों को देखते हुए प्रथम दृष्टया जमानत याचिकाकर्ता के खिलाफ अपराध साबित होता है।”

अदालत ने जावेद को यह कहते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया कि अगर जमानत दी जाती है, तो यह बड़े पैमाने पर समाज के सद्भाव को ‘नुकसान’ पहुँचा सकता है।

कोर्ट ने कहा, “आवेदक का यह पहला अपराध नहीं है, इससे पहले भी उसने गो-हत्या की है, जिससे समाज का सौहार्द बिगड़ गया है और जमानत पर रिहा होने पर वह फिर से वही काम करेगा जिससे समाज का माहौल खराब होगा। इसलिए आवेदक का यह जमानत आवेदन निराधार है और खारिज किए जाने योग्य है।”

अदालत ने राज्य भर में गोशालाओं के काम करने के तरीके पर विचार किया और कहा कि यह देखकर बहुत दुख होता है कि जो लोग गोरक्षा और प्रचार की बात करते हैं, वे गौ भक्षक बन जाते हैं। कोर्ट ने कहा:

“सरकार गौशालाएँ भी बनवाती है, लेकिन जिन लोगों को गाय की देखभाल करनी होती है, वे गायों की देखभाल नहीं करते हैं। इसी तरह निजी गौशालाएँ भी आज महज दिखावा बन गई हैं, जिसमें लोग चंदा लेते हैं। ये लोग जनता और सरकार से गो संवर्धन के नाम पर मदद करते हैं, लेकिन गाय की देखभाल न करके अपने हित में खर्च कर रहे हैं।”



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