दिल्ली: गैंगरेप आरोपित मो सलीम 'राजू' बन कर रहा था श्मशान में हिन्दुओं का अंतिम संस्कार

07 अगस्त, 2021 By: संजय राजपूत
ऐसे कई मौके सामने आए हैं जब श्मशान में नाम बदलकर विधर्मी अंतिम संस्कार करते देखे गए हैं (प्रतीकात्मक चित्र

दिल्ली में एक 9 वर्षीय मासूम बच्ची से कथित रेप औऱ हत्या के लिए हिन्दू श्मशान घाट से जुड़े गिरफ्तार लोगों में एक मुस्लिम व्यक्ति सलीम भी है जो नाम छुपाकर वहाँ रह रहा था। सलीम लम्बे समय से वहाँ आने वाले हिन्दुओं के शवों का अंतिम संस्कार भी कर रहा था। मृत्यु अटल सत्य है और सभी धर्मों में मृत्यु से जुड़े संस्कार होते हैं। हिन्दू धर्म में कुल 16 संस्कार बताए गए हैं, इनमें सबसे अंतिम मृत्यु से जुड़ा संस्कार है।

हिन्दू धर्म में मृत्यु से जुड़े सभी संस्कार ‘गरुण पुराण’ में बताए गए नियमों के अनुसार ही श्मशान में किए जाते हैं। श्मशान भारत की सांस्कृतिक और धार्मिक कल्पनाओं में हमेशा अहम रहे हैं। राजा हरिश्चंद्र की ईमानदारी और दानवीरता की महागाथा श्मशान के इर्द गिर्द ही रची गई। हिन्दू त्रिदेवों में से एक, भगवान शिव का निवास कैलाश के साथ साथ श्मशान को भी बताया गया है।

किसी समय बेहद विशाल रही ‘तंत्र परम्परा’ का मूल केंद्र भी श्मशान ही रहा है। बनारस की शवों की राख से खेली जाने वाली मशानी होली के बारे में भला कौन नहीं जानता होगा। ब्रिटिश शासन के दौरान भी जब रियासतों की चकबंदी की गई तो भी राजस्व के नक्शे में गाँव के बाहर मौजूद श्मशान को अवश्य दर्शाया गया।

हालाँकि भारत में बड़े बड़े किले, इमारतें, सड़के और पुल बनाने वाले मुगल शासकों या अंग्रेजों ने एक भी श्मशान बनाया हो, इसका कोई प्रमाण उपलब्ध नहीं है। सम्भवतः उन्हें लगता होगा कि शायद श्मशान बनवाने से देश के हिन्दू नाराज हो जाएँगे। दरअसल वो कभी ‘हिन्दू धर्म’ को समझ ही नहीं पाए।

वो हिन्दू धर्म को किसी एक ‘किताब’ में ढूँढ रहे थे, जबकि हिन्दू धर्म परम्पराओं की अनगिनत किताबों की एक विशाल लाइब्रेरी है। चूँकि ज्यादातर धर्म ग्रन्थ संस्कृत भाषा में थे और हिंदुओं की प्राचीन धार्मिक मान्यताएँ मुस्लिमों और ईसाइयों के एकदम विपरीत थी, तो विदेशी अनुवादकों ने धर्म ग्रन्थों को समझने का प्रयास अपने धार्मिक दृष्टिकोण को अपनाते हुए ही किया।

हिन्दू धर्म अपने लचीलेपन और विविधताओं के चलते कभी अंग्रेजों या मुगलों को समझ आया ही नहीं। उनके धर्मिक विश्वास में सिर्फ एक बार ही जीवन मिलता है, जबकि हिन्दू धर्म का विश्वास पुनर्जन्म में हैं। पुनर्जन्म हिन्दू धर्म का सबसे ‘यूनिक कॉन्सेप्ट’ हैं। पुनर्जन्म की इसी धारणा के चलते हिंदुओं ने कभी किसी देश पर आक्रमण नहीं किया, गैर-धर्मों का सम्मान और स्वागत किया।

हिन्दू धर्म में जन्म और मृत्यु दोनों की महत्वपूर्ण हैं, इसलिए हर मन्दिर में एक गर्भगृह होता है जो जन्म का प्रतीक है, वहीं श्मशान मृत्यु का प्रतीक है। मन्दिर जहाँ समाज के भीतर बनाया जाता है, वहीं श्मशान हमेशा समाज के बाहर होता है बावजूद इसके हिन्दू धर्म मे जितना महत्वपूर्ण मन्दिर होता है, उतना ही महत्वपूर्ण श्मशान भी होता है।

धार्मिक मान्यताओं में मन्दिर और श्मशान दोनों के आसपास बहुत ही बुद्धिमता से कर्मकांडीय अर्थव्यवस्था विकसित की गई। मन्दिर के पुजारी और कर्मचारी जहाँ ‘जीवन’ से जुड़े धार्मिक संस्कारों द्वारा प्राप्त धन पर आश्रित होते हैं, वहीं श्मशान में अंतिम संस्कार करने वाले पंडों और शव दाह करने वाले डोम का जीवन मृत्यु संस्कारों द्वारा मिले धन पर आश्रित होता है।

मंदिरों के कर्मकांडी लोगों को जहाँ समाज के भीतर रखा गया, वहीं श्मशान में संस्कार करने वाले लोग समाज के बाहर माने गए। समाजिक ‘अश्पृश्यता’ की धारणा को छोड़ दें तो ‘हाइजीनिक’ दृष्टिकोण से इसमें कुछ भी गलत नहीं था। समाज से बाहर होने के बावजूद धार्मिक मान्यताओं में इस बात का पूरा ख्याल रखा गया कि मंदिरों की तरह श्मशान का ‘आर्थिक ढाँचा’ भी मजबूत बना रहे।

जब हम श्मशान के पंडों या डोम से भेदभाव की बात करते हैं, तो हमें इस दृष्टिकोण से भी देखने की आवश्यकता है। हिन्दू धर्म ग्रंथों और मान्यताओं के अनुसार मानव शरीर 5 मूल तत्वों से बना है। दाह संस्कार के बाद गए सभी तत्व प्रकृति में मिल जाते है और आत्मा अगली यात्रा के लिए अनंत लोक की यात्रा पर निकल जाती हैं।

मान्यता के अनुसार यदि दाह संस्कार नियमों के अनुरूप न किया जाए तो जातक को मुक्ति नहीं मिलती, जिसकी वजह से आत्मा का पुनर्जन्म नहीं हो पाता। अंतिम संस्कार से जुड़े कई नियम हैं, जिनके अनुरूप ही दाह संस्कार किया जाता है। इसके लिए किसी वैज्ञानिक परीक्षण की जरूरत नहीं है, ये आस्था और विश्वास का विषय है।

नाम बदलकर अंतिम संस्कार करता रहा सलीम, हिन्दुओं की आस्था में सेंध

लेकिन पिछले कुछ वर्षों की घटनाओं को ध्यान से देखें तो ऐसा स्पष्ट नज़र आता है कि बड़े ही शातिर तरीके से हिंदुओं के इस धार्मिक और आर्थिक ढाँचे को तोड़ा जा रहा है। सबसे हालिया घटना दिल्ली के बाहरी ग्रामीण इलाके में एक श्मशान में हुई 9 वर्षीय बच्ची के कथित बलात्कार और हत्या की है। इस मामले में पकड़े गए एक आरोपित का नाम सलीम है जो नाम बदल कर श्मशान में हिन्दू शवों का अंतिम संस्कार कर रहा था।

इस प्रकरण को वामपंथी एवं कॉन्ग्रेस-पोषित गिरोह द्वारा ‘ब्राह्मण घृणा’ में लपेटकर परोसा गया लेकिन इससे पहले कि राहुल गाँधी और उनके समर्थक अपने इस कारनामें में सफल हो पाते, यह गुब्बारा फूट पड़ा और सलीम की पहचान बाहर आ गई।

 दिल्ली पुलिस ने इस मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोपित राधे श्याम (55), कुलदीप कुमार (63), लक्ष्मी नारायण (48) और मोहम्मद सलीम (49) को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया गया है। इन अभियुक्तों को रिमांड पर लेकर और पूछताछ की जाएगी।

सलीम नाम का शख्स अपनी पहचान हिंदू बताकर पिछले काफी समय से श्मशान भूमि में कार्य कर रहा था। उसने कभी किसी को इस बारे में पता नहीं चलने दिया। इस घटना के प्रकाश में आने पर जब एफ़आईआर में आरोपित का असली नाम पुलिस ने ‘राजू’ के बजाय मोहम्मद सलीम लिखा, तो श्मशान के ही अन्य लोग दंग रह गए।

यह भी पढ़ें: फेकन्यूजाचार्य रवीश, अभिसार, जुबैर ने अनुभव शर्मा को मारा, युनुस से कराया दाह संस्कार!

यह एक मामला तो नाम छुपाने का है, लेकिन कई मामले ऐसे हैं जहाँ मुस्लिम और ईसाई समुदाय के लोग बाकायदा हिन्दू श्मशान में नौकरी कर रहे हैं। केरल के कोच्चि में कक्कानड स्थित श्मशान घाट पर हिन्दू शवों का दाह संस्कार महिला इंचार्ज सेलिना कराती हैं।

सेलिना एक ईसाई महिला है जो 14 साल से इस श्मशान में हिन्दू शवों का दाह संस्कार करवा रही हैं। प्रत्येक दाह संस्कार के बदले उन्हें 1500 मिलते हैं, जिसमें से 405 रुपए वो नगरपालिका को देती हैं।


केरल में ही स्थानीय हिंदू समुदाय ‘एझावा’ द्वारा नियंत्रित एक श्मशान में एक मुस्लिम महिला सुबिना रहमान हिन्दू शवों का अंतिम संस्कार करवाती हैं। उन्होंने श्मशान में एक क्लर्क की जगह खाली के लिए आवेदन किया था और दिलचस्प बात ये है कि सुबीना को नौकरी मिल भी गई।

हिन्दू धर्म की मान्यताओं के अनुसार कोई महिला श्मशान में कार्य नहीं कर सकती और यह मामला स्त्री सशक्तिकरण का नहीं, बल्कि सीधे-सीधे आस्था और आर्थिक तंत्र पर हमला है।


कानपुर के कोका कोला चौराहा पर रेलवे क्रॉसिंग के पास एक ‘सेक्युलर’ श्मशान है। इस श्मशान में हिन्दू शवों का अंतिम क्रियाकर्म एक मुस्लिम पीर मोहम्मद का परिवार करता है। इस श्मशान की नींव फतेहपुर सौरिख गाँव निवासी स्वामी अच्युतानंद ने सन 1930 में रखी थी। पीर मोहम्मद का परिवार तब से ही इस श्मशान में हिन्दू शवों का अंतिम संस्कार कर रहा है।

कोरोना काल मे भी ऐसी खबरें जोर शोर से चलाई गई कि गैर-धर्मों के लोग, खासकर मुस्लिम समुदाय के लोग हिंदुओं का अंतिम संस्कार कर रहे हैं। इनमें से एक चर्चित मामला महाराष्ट्र के मुंबई में 300 से अधिक हिन्दू शवों का अंतिम करने वाले 7 मुस्लिम भाइयों का था।

लिबरल और वामी वर्ग ऐसी घटनाओं को भाई-चारे और गंगा-जमुनी तहजीब की मार्केटिंग कर के बेचता है। मार्केटिंग में महारत हासिल रखने वाले लिबरल गैंग ने मुजफ्फरनगर के अनुभव शर्मा का अंतिम संस्कार भी मोहम्मद यूनुस से करवा दिया था, हालाँकि वो मामला फ़र्ज़ी निकला।

लेकिन ‘लिबरल मार्केटिग’ का रैपर हटाकर आप इन घटनाओं को देखेंगे तो पाएँगे कि किस तरह बेहद खामोशी से हिंदुओं की आस्था में पर हमला किया जा रहा है। जिन धार्मिक ग्रन्थों मे ‘पुनर्जन्म के सिद्धांत’ के चलते, सूर्यास्त के बाद शव दफनाने से रोक से लेकर कई जरूरी दिशा-निर्देश लिखे गए हों, उस समाज लोगों का अंतिम संस्कार ‘विधर्मियों’ द्वारा किया जाना कितना उचित है?

दलित हित चिंतक लिबरल गैंग को ये चीज़ नज़र क्यों नहीं आती कि बड़ी ही चालाकी से हिन्दू धर्म के इन सबसे निचले तबके से आने वाले लोगों की नौकरियों पर ‘गैर हिन्दू’ काबिज होकर दलित हिंदुओं के ‘आर्थिक तंत्र’ पर हमला किया जा रहा है। आखिर श्मशान और ‘हिन्दू कब्रिस्तानों’ में मुस्लिमों-ईसाइयों को नौकरियाँ किस नियम के चलते दी जा रही हैं।

सरकारें आँख बंद किए बैठी है और उधर हिन्दू घृणा से सना लिबरल वामी गैंग आम हिंदुओं के मन में ये धारणा बनाने जी कु- चेष्टा कर रहा है कि विधर्मियों द्वारा हिन्दू शवों का अंतिम संस्कार और श्मशान की नौकरियों में विधर्मियों की घुसपैठ अमन का परचम हैं, जिस पर हिंदुओं को गर्व करना चाहिए। खोखली धर्मनिरपेक्षता के नाम पर हिंदुओं की बलि क्या उनके पूरी तरह खत्म होने तक जारी रहेगी?



सहयोग करें
वामपंथी मीडिया तगड़ी फ़ंडिंग के बल पर झूठी खबरें और नैरेटिव फैलाता रहता है। इस प्रपंच और सतत चल रहे प्रॉपगैंडा का जवाब उसी भाषा और शैली में देने के लिए हमें आपके आर्थिक सहयोग की आवश्यकता है। आप निम्नलिखित लिंक्स के माध्यम से हमें समर्थन दे सकते हैं: