EVM पर रोक की माँग कर रही वकील को HC ने ₹10000 का जुर्माना लगाकर भेजा घर

03 अगस्त, 2021 By: डू पॉलिटिक्स स्टाफ़
दिल्ली हाईकोर्ट ने ईवीएम के इस्तेमाल पर रोक लगाने की याचिका खारिज की

मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ ने वकील सीआर जया सुकिन की EVM से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि यह सिर्फ अफवाहों और निराधार आरोपों पर आधारित एक ‘प्रचार हित याचिका’ है।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार (03 अगस्त 2021) को उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के इस्तेमाल को रोकने के लिए निर्देश देने की माँग की गई थी और आगामी चुनावों में बैलेट पेपर के इस्तेमाल का प्रस्ताव रखा गया था।

दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की खंडपीठ ने आदेश पारित करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता द्वारा कुछ भी ठोस तर्क नहीं दिया गया है और ना ही कोई शोध नहीं किया गया है।

न्यायमूर्ति डीएन पटेल ने याचिकाकर्ता पर 10,000 रुपए का जुर्माना लगाते हुए कहा कि यह याचिका जनहित याचिका बिल्कुल नहीं है, यह स्पष्ट रूप से एक ‘प्रचार हित याचिका’ है।

यह याचिका अधिवक्ता सीआर जया सुकिन द्वारा दायर की गई थी, जिसमें लंबी बहस करते हुए कहा गया था कि कई यूरोपीय देश पहले से ही स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के लिए ईवीएम के बजाय बैलेट पेपर का उपयोग कर रहे हैं।

याचिकाकर्ता ने कहा, “लोकतंत्र को बचाने के लिए, हमें देश में चुनावी प्रक्रिया में बैलेट पेपर सिस्टम को वापस लाना होगा। इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) ने भारत में पुराने बैलेट पेपर सिस्टम को बदल दिया है। साथ ही, दुनिया के कई देशों, जैसे- इंग्लैंड, फ्रांस सहित , जर्मनी, नीदरलैंड और संयुक्त राज्य अमेरिका ने ईवीएम के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया है।”

वकील ने कहा, “इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) को पूरे भारत में पारंपरिक मतपत्रों से बदला जाना चाहिए क्योंकि मतपत्रों के माध्यम से मतदान किसी भी देश की चुनावी प्रक्रिया के लिए अधिक विश्वसनीय और पारदर्शी तरीका है।”

वकील ने अपनी याचिका में यह भी कहा कि अमेरिका, जापान, जर्मनी और अन्य जैसे विकसित देशों ने चुनावों के दौरान ईवीएम को खारिज कर दिया है और बैलेट से मतदान प्रणाली को चुना है।

उन्होंने कहा, “इससे संकेत मिलता है कि ईवीएम किसी देश की चुनावी प्रक्रिया के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले संतोषजनक साधन नहीं हैं। ईवीएम को हैक किया जा सकता है। लेकिन मतपत्र प्रणाली बेहद सुरक्षित है।”

इस पर अदालत ने कहा, “याचिकाकर्ता (सुकिन) द्वारा ईवीएम की प्रक्रिया पर कोई भी ठोस तर्क नहीं दिया गया। हमें रिट याचिका में बहस करने का कोई कारण नहीं दिखता है।”



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