गवाहों के बयान विरोधाभासी: दिल्ली दंगों पर पहले फैसले में सुरेश बरी- आसिफ ने लगाया था लूटपाट का आरोप

20 जुलाई, 2021 By: डू पॉलिटिक्स स्टाफ़
दिल्ली दंगे के मामले में आरोपित सुरेश भटूरा को कोर्ट ने बरी कर दिया है (प्रतीकात्मक चित्र)

दिल्ली के न्यायालय द्वारा सुरेश उर्फ भटूरा नामक व्यक्ति को पूर्वोत्तर दिल्ली दंगों (North-east Delhi riots) के मामले में निर्दोष मानते हुए बरी कर दिया है। सुरेश पर दंगा करने और लूटपाट मचाने के आरोप लगाए गए थे। 

फरवरी, 2020 में हुए हिंदू-विरोधी दिल्ली दंगों में एक सुरेश नामक व्यक्ति पर लूटपाट एवं दंगा फसाद करने का आरोप लगाया गया था। सुरेश पर यह आरोप आसिफ नामक व्यक्ति ने लगाया था।

आसिफ ने सुरेश पर यह कहते हुए आरोप लगाया था कि 25 फरवरी, 2020 की शाम को लगभग 4:00 बजे एक भीड़ लोहे की रॉड और डंडों के साथ मेन बाबरपुर रोड पर उसकी दुकान में घुस आई और हमला किया। आरोप था कि इस भीड़ ने दुकान का शटर तोड़ डाला और उसमें लूटपाट भी की।

दुकान के मालिक भगत सिंह ने भी इस मामले को लेकर शिकायत की तथा कहा था कि दुकान में मुस्लिम के होने के कारण उसे निशाना बनाया गया और दुकान का माल लूट लिया गया। दुकान आसिफ नाम के व्यक्ति ने किराए पर ली हुई थी।

भगत सिंह ने मामले को लेकर 7 अप्रैल, 2020 को आरोपित के रूप में सुरेश का नाम लिया था। उन्होंने यह भी कहा कि घटना के दौरान सिंह को मामले के बीच में न आने की हिदायत देते हुए धमकी दी गई।

मामले में सुरेश पर इंडियन पीनल कोड की धारा 143 (अवैध भीड़ जोड़ना), 147 (दंगा-फसाद) और 395 (डकैती) के तहत मामला दर्ज किया गया था। दंगे के दौरान दिल्ली स्थि ‘वेलकम’ इलाके में टीवी रिपेयरिंग की दुकान से लूटपाट और तोड़फोड़ करने के मामले में सुरेश उर्फ भटूरा को 07, अप्रैल 2020 को गिरफ्तार किया गया था।


कोर्ट ने किया बाइज़्ज़त बरी

दिल्ली दंगे के इस मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट का पहला फैसला आया है। पूरे मामले की सुनवाई के बाद दिल्ली कोर्ट ने 20 जुलाई, 2021 को सुरेश के विरुद्ध लगे आरोपों को गलत करार देते हुए उसे बरी कर दिया। जज अमिताभ रावत ने कहा:

“आरोपित को मामले में सभी आरोपों से रिहा किया जाता है, यह स्पष्ट रूप से बरी है।”

सुरेश उर्फ भटूरा को न्यायालय द्वारा बरी करने का मुख्य कारण यह बताया गया कि उसके विरुद्ध शिकायत करने वालों द्वारा प्रस्तुत किए गवाहों के बयानों में विरोधाभास पाया गया था। इसका अर्थ है कि गवाहों की सुरेश के विरुद्ध घटना को लेकर टिप्पणियाँ/बयान आपस में ही मेल नहीं खा रहे थे।

बता दें कि अधिकतर मामलों में ऐसा तब होता है जब किसी भी पक्ष द्वारा पेश किए गए गवाह फ़र्ज़ी या खरीदे गए हों।

योजनाबद्ध था दिल्ली दंगा

24, 25 और 26 फरवरी, 2020 को दिल्ली में भीषण हिंदू-विरोधी दंगे हुए थे। इनमें 53 लोगों की जान चली गई थी। मामले को लेकर कई गिरफ्तारियाँ भी हुई थी, जिनमें आम आदमी पार्टी के काउंसलर ताहिर हुसैन को भी दंगों के मुख्य आरोपित के रूप में हिरासत में लिया गया था।

इसके साथ ही जेएनयू के पूर्व छात्रनेता उमर ख़ालिद जैसे कथित आंदोलनकारियों का भी इन दंगों में नाम आया था। इन लोगों द्वारा ही लगभग 3 महीने पहले से दंगों की योजना और ब्लूप्रिंट तैयार किये गए थे।  

दंगों में इंटेलिजेंस ब्यूरो के एक सदस्य अंकित शर्मा की बेरहमी से हत्या करने के साथ-साथ 42 वर्षीय पुलिस कॉन्स्टेबल रतन लाल को भी गोकुलपुरी में गोली मारी गई थी। अन्य भी कई लोगों को इन सुनियोजित दंगों में मौत के घाट उतार दिया गया था।



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