केदारनाथ: 40 दिन से जारी है देवस्थानम बोर्ड के खिलाफ पुजारियों का विरोध

21 जुलाई, 2021 By: डू पॉलिटिक्स स्टाफ़
केदारनाथ में देवस्थानम बोर्ड के विरोध में तीर्थपुरोहितों का धरना-प्रदर्शन 39वें दिन भी जारी है

केदारनाथ में देवस्थानम बोर्ड को भंग करने की माँग को लेकर तीर्थपुरोहितों का धरना जारी है। मंगलवार (20 जुलाई, 2021) को भी तीर्थपुरोहितों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और धरना दिया।

केदारनाथ मंदिर में अपना विरोध प्रकट कर रहे पुरोहित

बोर्ड को लेकर पूर्व सीएम त्रिवेन्द्र सिंह रावत के बयान का विरोध करते हुए लोगों द्वारा भाजपा से उन्हें तुंरन्त पार्टी से बाहर करने की भी माँग की जा रही है। पुरोहितों ने कहा कि केदारनाथ में वह सीएम का विरोध करेंगे। साथ ही, पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का विरोध करने का आह्वान किया गया है।


बता दें कि उत्तराखंड के चार धामों में से एक केदारनाथ मंदिर के तीर्थ पुरोहित चारधाम देवस्थानम बोर्ड को रद्द करने की माँग को लेकर मौन विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। मंगलवार को विरोध प्रदर्शन का 38वां दिन था।

देवस्थानम बोर्ड को रद्द करने की माँग ने पकड़ा जोर

उत्तराखंड के चार धामों में से एक केदारनाथ मंदिर के तीर्थ पुरोहित चारधाम देवस्थानम बोर्ड को रद्द करने की माँग को लेकर मंदिर के बाहर मौन पर बैठ गए हैं। उनकी जिद है कि जब तक देवस्थानम बोर्ड समाप्त नहीं किया जाएगा, तब तक उनका विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।

बता दें कि उत्तराखंड में केदारनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री और बद्रीनाथ चार धाम हैं। जनवरी, 2020 में उत्तराखंड सरकार ने चार धाम देवस्थानम बोर्ड का गठन किया था। इस बोर्ड के गठन के साथ ही चार धाम समेत राज्य के 51 अन्य मंदिरों का नियंत्रण राज्य सरकार के हाथों में आ गया था।


बोर्ड के खिलाफ पिछले साल बीजेपी सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने भी सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उनका कहना था कि देश में मस्जिद, चर्च समेत दूसरे धार्मिक स्थलों का नियंत्रण सरकार के पास नहीं है, तो फिर मंदिरों का नियंत्रण ही सरकार अपने पास क्यों रखना चाहती है?

इसी देवस्थानम बोर्ड को निरस्त करने की माँग को लेकर केदारनाथ में तीर्थ पुरोहित और पुजारी विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका कहना है कि अगर बोर्ड को जल्द से जल्द समाप्त नहीं किया गया तो इसके खिलाफ एक बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

बिना सलाह लिए मनमानी से बोर्ड के गठन का आरोप

तीर्थ पुरोहितों कहना है कि बिना हक हकूकधारी और तीर्थ पुरोहितों को विश्वास में लिए इस बोर्ड का गठन कर दिया गया। इस वर्ष तीरथ सिंह रावत ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बनते ही बोर्ड पर पुनर्विचार करने का भरोसा दिया था, लेकिन अभी तक इस पर एक भी कदम नही बढ़ाया गया है।

उनका कहना है कि बोर्ड को निरस्त करने के बजाय इसका लगातार विस्तारीकरण किया जा रहा है। पुजारियों का कहना है कि बोर्ड के लागू होने के बाद से स्थानीय लोगों पुरोहितों के हितों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।

पंच पंडा रूद्रपुर श्री केदारनाथ सभा ने कहा कि उत्तराखंड की भाजपा सरकार हिन्दू-विरोधी है। बिना हक हकूकधारियों को विश्वास में लिए बोर्ड का गठन किया जाना चार धामों के लिए विनाशकारी कदम है।

मंदिरों के पुनर्निर्माण के बजाय, बोर्ड के विस्तारीकरण पर ध्यान

पुरोहितों ने आरोप लगाया कि केदारनाथ धाम में आपदा के बाद से उदक कुंड समेत कई अन्य धार्मिक मंदिरों का पुनर्निर्माण करने के बजाय सरकार का ध्यान सिर्फ देवस्थानम बोर्ड के विस्तार में लगा है।

पुरोहितों ने कहा कि सरकार कह रही है कि बोर्ड में तीर्थपुरोहितों व हक-हकूकधारियों के अधिकार पूर्णरूप से सुरिक्षत हैं। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा है तो उन्हें उस अधिनियम की प्रतियाँ सौंपी जाएँ, जिसमें ऐसा उल्लिखित हो।

उन्होंने कहा कि उनकी एकसूत्री माँग बोर्ड भंग करने की है और जब तक इस बोर्ड को सरकार निरस्त नहीं करती है, तब तक केदारनाथ धाम में उनका मौन विरोध लगातार जारी रहेगा।



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