लिबरल्स के 'दुग्गल साब' ध्रुव राठी का टेलीग्राम ग्रुप पोर्न बाँटने पर हुआ सस्पैंड!

22 जुलाई, 2021
ध्रुव राठी के टेलीग्राम ग्रुप में हो रहा था पोर्न सामग्री का आदान-प्रदान

यूरोप में बसे भारतीय मूल के यूट्यूबर और लेफ्ट लिबरल्स के ‘दुग्गल साब’ ध्रुव राठी (Dhruv Rathee) का मोबाइल मैसेजिंग ऐप टेलीग्राम पर बनाया गया एक ग्रुप सस्पेंड कर दिया गया है। इसका कारण है कि इस ग्रुप में पोर्नोग्राफ़िक यानी अश्लील सामग्री का आदान-प्रदान किया जा रहा था। ध्रुव राठी ऐसे ही कई ग्रुप्स की मदद से कई यूट्यूबरों एवं अन्य व्यक्तियों को निशाना बना चुका है।

टेलीग्राम पर ध्रुव राठी का चैनल

राजनीतिक, सामाजिक, गैर-सामाजिक से लेकर हर मुद्दे पर अपनी राय रखने और साझा करने वाले कथित यूट्यूबर ध्रुव राठी पिछले कुछ वर्षों में खासी चर्चा में आए हैं। भाजपा और मुख्यतः प्रधानमंत्री मोदी को चिन्हित कर निशाना बनाने एवं आलोचना करने के साथ ही इस यूट्यूबर का चैनल चर्चा में आया था।

ऐसा करके यूट्यूब पर 50 लाख से अधिक सब्सक्राइबर जोड़ देने वाले इस यूट्यूबर द्वारा कई बार फेसबुक और टेलीग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स पर ग्रुप बनाकर मास रिपोर्टिंग जैसे दूसरों के चैनल बैन कराने के कार्य किए जाते रहे हैं।

नैतिकता की चादर ओढ़ कर अपनी साफ छवि प्रस्तुत करने वाले राठी के ऐसे ही एक टेलीग्राम ग्रुप को पोर्नोग्राफी यानी अश्लील सामग्री के चलते अब सस्पेंड कर दिया गया।

राठी के टेलीग्राम चैनल के डिस्कशन रूम को ब्लॉक कर दिया गया है


ध्रुव राठी का टेलीग्राम ऐप से जो चैटरूम बैन किया गया है, इसमें हिन्दू देवी-देवताओं की अश्लील तस्वीरों को शेयर किया जाता था। साथ ही, इस ग्रुप में मौजूद कुछ लोग जब ध्रुव राठी या उसके समर्थकों के खिलाफ कोई टिप्पणी किया करते थे तो उन्हें डिलीट कर दिया जाता था। इसका अर्थ यह है कि ध्रुव राठी के इस ग्रुप को निरंतर मॉनिटर किया जा रहा था और उसके बावजूद भी इसमें शेयर किए जा रहे आपत्तिजनक कंटेंट पर अंकुश नहीं लगाया गया।

विभिन्न यूट्यूबरों पर हमले

कुछ समय पूर्व ‘तूफान’ फिल्म में लव-जिहाद जैसे मामलों के सामान्यीकरण करने को लेकर वीडियो बनाने वाले रचित नामक व्यक्ति के चैनल ‘सब लोकतंत्र’ पर हफ्ते भर का प्रतिबंध लगा दिया गया था। इसके बाद अपने चैनल और कंटेंट में दक्षिणपंथी राय प्रस्तुत करने वाले कई चैनलों को निशाना बनाया गया।

चर्चित यूट्यूबर एल्विश यादव के चैनल ‘एल्विश यादव ब्लॉग्स’ को भी चेतावनी देने के साथ उनकी एक वीडियो यूट्यूब से हटवा दी गई। दरअसल एल्विश ‘एल्विश यादव व्लॉग्स’ के नाम से एक चैनल चलाते हैं, जिस पर वे विभिन्न यूट्यूबरों, सोशल मीडिया हस्तियों समेत कई लोगों की रोस्टिंग करते हुए वीडियो बनाते हैं। बता दें कि रोस्टिंग एक प्रकार व्यंग्य माना जाता है, जिसमें किसी व्यक्ति या समूह को चुनकर उस पर मज़ाकिया अंदाज़ में कटाक्ष किया जाता है।

यूट्यूब की मानें तो वे रोस्टिंग करने वाले चैनलों को कुछ गालियाँ या अपशब्द तक उपयोग करने की अनुमति देते हैं, परंतु एल्विश के साथ ऐसा नहीं हुआ। एल्विश ने 18 जुलाई, 2021 को ध्रुव राठी का रोस्ट करते हुए यूट्यूब पर एक वीडियो साझा की, जो इंटरनेट पर खूब वायरल हुई और वाहवाही बटोरीं।


इस वीडियो पर ‘द शैम शर्मा शो’ नाम के यूट्यूब चैनल चलाने वाले संभव शर्मा ने एक रिएक्शन वीडियो यानी प्रतिक्रिया देते हुए वीडियो बनाया। शैम का यह वीडियो यूट्यूब द्वारा अपने नियमावली के उल्लंघन का नाम लेकर ‘डिलीट’ कर दिया गया तथा शैम शर्मा के चैनल पर एक सप्ताह का प्रतिबन्ध भी लगा दिया गया।


शैम द्वारा जब यूट्यूब से मामले को लेकर जानकारी ली गई और इस विषय में विस्तार से पूछा गया कि उनका वीडियो किस नियमावली का उल्लंघन करता है? तो यूट्यूब ने शैम से माफी माँगते हुए वीडियो वापस लौटा दी।

इसके एक दिन बाद ही यूट्यूब ने एल्विश के चैनल पर धावा बोला और उनकी एक वर्ष पुरानी वीडियो यूट्यूब से हटवा दी और उनके चैनल पर एक सप्ताह का प्रतिबंध भी लगा दिया। एल्विश समेत कई युटयुबर्स का यह मानना है कि इस वीडियो को मास रिपोर्टिंग का सहारा लेकर हटवाया गया।

एल्विश ने कहा कि अगर वीडियो यूट्यूब की नियमावली के अनुसार नहीं थी तो यूट्यूब ने उसे साल भर पहले ही क्यों नहीं हटवाया? यह कदम अचानक क्यों उठाया गया, वह भी एक साल भर पुरानी वीडियो पर?

पुराना है ध्रुव राठी का यह खेल

इस प्रकार लोगों के समूह बनाकर भेड़ की तरह उन्हें एक रास्ते पर चलवाना और अपने मन मुताबिक कार्य कराना ध्रुव राठी द्वारा पहली बार नहीं किया गया है। बता दें कि कुछ वर्ष पूर्व ‘ध्रुव राठी स्क्वाड’ के नाम से फेसबुक पेज एवं ग्रुप्स बनाए गए थे, जिनमें कई आम लोगों को शामिल किया गया था।

इन ग्रुप्स में विभिन्न दक्षिणपंथी लोगों के निजी अकाउंट या प्रोफाइल साझा किए जाते थे, जिन्हें मास रिपोर्टिंग करवा कर बैन करवाया जाता था। इतना ही नहीं, इस बात का पूरे जोर-शोर से प्रचार भी किया जाता था कि एक भीड़ द्वारा एक व्यक्ति विशेष को चुनकर चिन्हित किया गया और गिरा दिया गया।

इस बार भी राठी द्वारा कुछ ऐसा ही किया जाने का अनुमान लगाया जा रहा है, परंतु स्वयं एक सकारात्मक छवि बना कर लोगों को बेवकूफ बनाने वाले राठी के इन ग्रुप्स पर ही अवैध सामग्री पाई गई। राठी के एक टेलीग्राम ग्रुप पर पोर्नोग्राफिक कंटेंट का आदान प्रदान किया गया, जिसके कारण उस ग्रुप को प्रतिबंधित भी कर दिया गया।

बता दें कि भारतीय कानूनों के अनुसार पॉर्नोग्राफिक सामग्री लेना-देना, खरीदना-बेचना या बाँटना भी अपराध की श्रेणी में आता है।

यूट्यूब का वामपंथ की ओर झुकाव

अब सवाल यह उठता है कि सरकार द्वारा इस गंभीर मामले को लेकर क्या कदम उठाया जाता है। अगर देखा जाए तो इस प्रकार समूह बनाकर किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना भी ‘साइबर बुलिंग’ जैसे कृत्यों में गिना जाता है, परंतु यूट्यूब और फेसबुक जैसी कंपनियों के निजी विचारों और वामपंथ की ओर झुकाव के कारण ऐसे लोगों के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं की जाती है।

‘डिफ़ेंसिव ऑफेंस’ चैनल को बनाया गया था निशाना

यूट्यूब द्वारा नियमावली का नाम लेकर कई ऐसी आवश्यक और तथ्यात्मक वीडियोज़ को हटा दिया जाता है। इसी तरह ‘डिफेंसिव ऑफेंस’ चैनल द्वारा बनाए गए बलूचिस्तान के विषय में एक गाने की वीडियो पर भी यूट्यूब ने कार्रवाई की थी। बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सरकार और सेना द्वारा किए जा रहे अत्याचारों पर बने इस गाने को यूट्यूब ने हिंसक करार देते हुए प्रतिबंधित कर दिया था। यह वीडियो अब भी यूट्यूब द्वारा एक चेतावनी के साथ चलाया जाता है।


वहीं कश्मीर क्षेत्र के कई प्रोपोगैंडा वीडियोज़ यूट्यूब द्वारा न केवल खुलेआम चलाए जाते हैं अपितु कंपनी द्वारा इनका संपूर्ण प्रचार-प्रसार तक होता है।

यूट्यूब ने डू-पॉलिटिक्स की स्वामी नरसिंहानंद से बातचीत का वीडियो भी किया था डिलीट

डासना देवी मंदिर में ‘प्यासा आसिफ़’ प्रकरण के बाद जब डू-पॉलिटिक्स ने स्वामी यति नरसिंहानंद सरस्वती से बात की थी, तो यूट्यूब द्वारा इसे ‘हेट स्पीच’ कहकर हटा दिया गया। हालाँकि, यह वीडियो हमारे फेसबुक पेज पर अभी भी मौजूद है।

क्या है समाधान ?

इस पूरे मामले के निवारण को लेकर अगर बात की जाए तो एक व्यक्ति के तौर पर किसी क्रिएटर या निर्माता के पास कोई विकल्प नहीं है। वीडियो या कंटेंट हट जाने के बाद वे केवल यूट्यूब से आग्रह कर सकते हैं, जिस पर यूट्यूब कोई सीधा जवाब न देते हुए हमेशा ही नियमावली के उल्लंघन की बात कह कर मामला रफा-दफा कर देता है।

फेसबुक, ट्विटर और गूगल जैसी बड़ी कंपनियों का भी वैश्विक स्तर पर वामपंथ की ओर झुका किसी से छिपा नहीं है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तक के अकाउंट पर प्रतिबंध लगा देने वाली ये कंपनियाँ छोटे-मोटे निर्माताओं को कहाँ ही छोड़ने वाली हैं?

इसका निवारण अगर कोई कर सकता है तो वह देश की सरकार ही है। सरकार द्वारा जब तक इन कंपनियों पर नकेल नहीं कसी जाएगी एवं अपने देश के कुछ ऐसे ऐप्स और वेबसाइट तैयार नहीं कराए जाएँगे, जिन पर खुलकर विचारों का प्रचार-प्रसार हो सके, तब तक इस प्रकार के ‘साइबर-बुलिंग’ और शोषण को रोक पाना असंभव है।



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