'विकास' के लिए चीन से उठाया था भारी कर्ज, अब खतरे में है इस पूर्वी अफ्रीकी देश की स्वायत्तता

11 अप्रैल, 2021
चीन की निवेश रणनीति के कारण जिबूती की स्वायत्तता खतरे में है

जिबूती और चीन के बीच वर्तमान में जो कुछ भी चल रहा है, वह इस बात का छोटा सा और बेहद स्पष्ट उदाहरण है कि आखिर कैसे, बीजिंग अपने वैश्विक बुनियादी ढाँचे की निवेश रणनीति, ‘बेल्ट एंड रोड’ प्रोजेक्ट और आर्थिक दबाव का प्रयोग कर विस्तारवाद की अपनी रणनीति को बढ़ावा दे रहा है।

चीन की पूँजी और चीन से बड़े ऋण लेने के बाद, कम्यूनिस्ट राष्ट्र की आर्थिक निर्भरता स्वीकारने वाले जिबूती की स्वायत्तता पर ही खतरा मंडराने लगा है। जिबूती, प्राकृतिक संसाधनों से रहित ‘हॉर्न ऑफ़ अफ्रीका’ कहे जाने वाले हिस्से में स्थित एक छोटा सा अफ्रीकी देश है। जिबूती को रेड सी यानि, लाल सागर का प्रवेश द्वार माना जाता है।

इस हिस्से में चीन ने कूटनीतिक प्रयोगों से जिबूती को ऐसी आर्थिक निर्भरता की स्थिति में ला दिया है, जिससे पीछे हटना बा इस अफ्रीकी देश के लिए बेहद मुशिकल है। यहाँ चीन ने ‘बेल्ट एंड रोड’ योजना के लिए भारी मात्रा में निवेश कर इस देश को अपने दबाव में ले लिया है।

चीन ने इस देश में अपनी पैठ स्थापित करने के लिए यहाँ के राष्ट्रपति इस्माइल उमर गुलेह का इस्तेमाल किया। इस्माइल उमर जिबूती में पिछले पाँच टर्म से राष्ट्रपति के पद पर हैं। ‘फ़्रांस 24’ की रिपोर्ट के अनुसार, जिबूती पर चीन का 70% से ज्यादा कर्ज है। चीन ने श्रीलंका के बंदरगाहों पर कब्ज़ा पाने के लिए भी ऐसे ही प्रयोग किए थे।

बीजिंग ने वर्ष 2000 के दशक की शुरुआत में जिबूती पर अपनी पकड़ बनानी शुरू कर दी थीं। इसके लिए चीन ने इस देश के स्कूलों और स्टेडियमों के निर्माण में निवेश के साथ ही सड़कों और आधिकारिक भवनों का नवीनीकरण किया, जिसमें कि जिबूती का विदेश मंत्रालय भी शामिल था। वर्ष 2012 में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के सत्ता में आने के बाद चीनी निवेश तेज हुआ और अगले वर्ष ‘बेल्ट एंड रोड’ प्रोजेक्ट का उद्घाटन किया गया।

बीजिंग के जिबूती में निवेश करने का पहली बड़ी वजह यह है कि यह चीन को तथाकथित ‘समुद्री सिल्क रोड’ के विशाल नेटवर्क में एक अफ्रीकी मंच उपलब्ध करता है। इस क्षेत्र में अधिकांश देश राजनीतिक अस्थिरता का सामना कर रहे हैं।

दूसरी ओर, जिबूती ने ही चीनी निवेश और ऋण के प्रवाह में स्पष्ट लाभ देखा। इस देश को धन की आवश्यकता थी और उसके पास कोई अन्य विकल्प भी नहीं था।



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