PGI रिपोर्ट में फिसड्डी निकला केजरीवाल का शिक्षा मॉडल: सबसे महत्वपूर्ण मापदंडों में 'जीरो' है दिल्ली

10 जून, 2021 By: डू पॉलिटिक्स स्टाफ़
दिल्ली का शिक्षा मॉडल फिसड्डी

आम आदमी पार्टी की ओर से विज्ञापन जारी कर पिछले चार वर्ष से दिल्ली के स्कूल और स्वास्थ्य का ‘केजरीवाल मॉडल’ दिखाया जा रहा है, लेकिन शिक्षा मंत्रालय के परफ़ॉर्मेन्स ग्रेडिंग इंडेक्स (PGI) में दिल्ली की ‘AAP सरकार’ को जोरदार झटका लगा है।

खासबात यह है कि दिल्ली को छोड़कर लगभग सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने पिछले वर्ष की PGI के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया है। उत्तर प्रदेश ने अपने पिछले प्रदर्शन में करीब 20% का सुधार किया है।

वहीं, बिहार ने भी अपने प्रदर्शन में करीब 10% सुधार किया है, जबकि दिल्ली में शिक्षा का स्तर लगातार पिछले 3 सालों से गिरता जा रहा है

शिक्षा मंत्रालय ने जारी किया परफ़ॉर्मेन्स ग्रेडिंग इंडेक्स

स्कूली शिक्षा में होने वाले बदलावों का अध्ययन करने के लिए शिक्षा मंत्रालय की ओर से सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का हर साल परफारमेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (PGI) तैयार किया जाता है।

रविवार को वर्ष 2019-20 का इंडेक्स जारी किया है, जो मंत्रालय की ओर से जारी की गई स्कूलों के प्रदर्शन से जुड़ी तीसरी रिपोर्ट है।


इससे पूर्व, 2017-18 से जुड़ी पीजीआई रिपोर्ट साल 2019 में जारी की गई थी। यह इंडेक्स सभी राज्यों में स्कूली शिक्षा से जुड़ी गतिविधियों का 70 मानकों पर अध्ययन के बाद तैयार किया जाता है, जिसमें शिक्षा की गुणवत्ता, इंफ्रास्ट्रक्चर, पुस्तकालय, समान शिक्षा, छात्र-शिक्षक अनुपात आदि शामिल होते हैं। इंडेक्स में दिल्ली के गिरते शिक्षा स्तर को लेकर चिंताजनक तस्वीर सामने आई है।

शिक्षण परिणाम एवं गुणवत्ता’ में लगातार पिछड़ रही दिल्ली

किसी भी शिक्षा प्रणाली के मूल्याँकन का सबसे सटीक सूचक ‘सीखने का परिणाम और गुणवत्ता में प्रदर्शन’ होता है। इससे यह पता चलता है कि मौजूदा शिक्षा प्रणाली से छात्र कितना सीख पा रहे हैं और शिक्षा के स्तर में कितना सुधार हो रहा है।

दिल्ली की केजरीवाल सरकार का ‘शिक्षा मॉडल’ शिक्षा प्रणाली के इस सबसे महत्वपूर्ण मापदंड पर ही सबसे खराब है। इस मापदंड पर दिल्ली का खराब प्रदर्शन लगातार तीन वर्षों से जारी है।

केजरीवाल सरकार अपने ‘शिक्षा मॉडल’ की जमकर मार्केटिंग करती रही है


दिल्ली ने जितना काम बुनियादी ढाँचे खड़े करने और उनके विज्ञापनों के लिए किया है, उतना छात्रों के सीखने और शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने पर नहीं किया। इससे पहले, वर्ष 2018-19 और 2017-18 में भी दिल्ली शिक्षा के इस सबसे महत्वपूर्ण मापदंड में 124 अंक लेकर 31वें स्थान पर थी। 2019-20 में यह एक अंक और नीचे लुढ़क कर 32वें स्थान पर आ गई है।

2017 से दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने को लेकर कोई काम नहीं किया। सीखने और गुणवत्ता मापदंड में दिल्ली को लगातार तीन साल से 124 अंक ही प्राप्त हो रहे हैं। राजस्थान ने 168 अंकों के साथ शिक्षा परिणाम और गुणवत्ता प्रदर्शन में पहला स्थान हासिल किया है।

परफ़ॉर्मेन्स ग्रेडिंग इंडेक्‍स में ‘AAP के दिल्ली मॉडल’ को पछाड़ पंजाब आया प्रथम

देशभर के अखबारों के पहले पन्ने पर विज्ञापन में छपने वाला शिक्षा का ‘दिल्ली मॉडल’ शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी 2019-20 के परफ़ॉर्मेन्स ग्रेडिंग इंडेक्स में पंजाब के आस-पास भी दिखाई नहीं देता है।

पंजाब ने आम आदमी पार्टी के ‘दिल्‍ली मॉडल’ को पछाड़ दिया है और 929 अंकों के साथ देशभर में प्रथम आया है। पंजाब परफ़ॉर्मेन्स ग्रेडिंग इंडेक्‍स में पूरे देश में टॉपर रहा है, दिल्ली 898 अंकों के साथ छठे स्थान पर है।


पंजाब सरकार के प्रयासों से राज्य में सरकारी स्‍कूलों की तस्‍वीर बदल गई है, जिसकी प्रशंसा आम आदमी पार्टी से पंजाब के पूर्व नेता विपक्ष एचएस फूलका ने भी की। एचएस फूलका कभी पंजाब विधानसभा में दिल्ली मॉडल का उदाहरण देते नहीं थकते थे।

सभी छात्रों को एक समान शिक्षा देने में भी ‘AAP’ की दिल्ली पीछे

किसी राज्य में सरकारी और सहायता प्राप्त प्रारंभिक स्कूलों में पढ़ रहे सभी अनुसूचित जाति, जनजाति और सामान्य श्रेणी के छात्रों के बीच शिक्षा के प्रदर्शन में शून्य का अंतर होना चाहिए। केंद्र सरकार द्वारा जारी आँकड़ों के मुताबिक, दिल्ली में सभी छात्रों को एक समान शिक्षा भी नहीं मिल रही है।


साल 2017-18 से पहले, दिल्ली शिक्षा में समानता के मामले में पहले नंबर पर थी। साल 2019-20 में ये पाँचवें नंबर पर है। पंजाब राज्य ‘इक्विटी इंडेक्स’ में भी पहले नंबर पर है।

पंजाब में प्राइवेट के बजाय सरकारी स्कूलों का रुख कर रहे हैं छात्र

इस मामले में भी पंजाब की तस्वीर एकदम अलग ही नजर आती है। बड़े शहरों में जहाँ बच्चे सरकारी स्कूलों से निकलकर निजी स्कूलों की ओर जा रहे हैं, वहीं पंजाब सरकार के प्रयासों से निजी स्कूलों से बच्चे सरकारी स्कूलों में दाख़िला ले रहे हैं।

पंजाब के शिक्षा मंत्री ने बताया कि तीन साल पहले हमने ‘पढ़ो पंजाब पढ़ाओ पंजाब’ अभियान शुरू किया था, जिसके तहत पूरे राज्य में सभी वर्गों के बच्चों को एक समान शिक्षा देने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हमने पिछले 3 वर्षों में पंजाब के सरकारी स्कूलों की सूरत ही बदल दी है।

शिक्षा के लिए गिने-चुने काम, विज्ञापनों से बनाई ‘दिल्ली मॉडल’ की छवि

दिल्ली के शिक्षा मंत्री अक्सर देश के अन्य राज्यों को दिल्ली के शिक्षा मॉडल को लेकर अन्य राज्यों को एवं राजनीतिक दलों को चैलेंज करते रहते हैं। दरअसल आम आदमी पार्टी जब सत्ता में आई थी लगभग 1,000 स्कूल दिल्ली सरकार के अधीन थे।

केजरीवाल सरकार सभी स्कूलों के एक समान विकास की चिंता करने की बजाय 6 महीने बाद मॉडल स्कूल के नाम पर अच्छा प्रदर्शन कर रहे गिने-चुने 54 स्कूलों को छाँट लिया और बाकी को उनके हाल पर छोड़ दिया।


दिल्ली सरकार के बजट का अध्ययन करेंगे तो आप देखेंगे कि सामान्य स्कूलों को पुस्तकालय के लिए अधिकतम 15,000 रुपए तक का ही अनुदान दिया जाता है, लेकिन ‘मॉडल स्कूलों’ को एक लाख रुपए दिए जाते हैं।

इन्ही गिने-चुने स्कूलों के बाहर बड़े-बड़े बोर्ड लगाकर और अखबारों में विज्ञापन के जरिए दिल्ली सरकार ने दिल्ली शिक्षा मॉडल की जो छवि बनाई थी, वह केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी इंडेक्स रिपोर्ट में हवा हो गई।



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