धार्मिक आजादी के विरुद्ध है चर्च की जाँच: कर्नाटक में अवैध निर्माण एवं धर्मांतरण पर अधिकारी पड़े नरम

29 अक्टूबर, 2021
ठंडे बस्ते में गया ज़बरन पंथ परिवर्तन करा रहे चर्चों के सर्वेक्षण का प्रस्ताव

कर्नाटक राज्य के बेंगलुरु से चर्चों के माध्यम से चल रहे ज़बरन अवैध पंथ परिवर्तन को लेकर एक महत्वपूर्ण समाचार सामने आया है। भाजपा सरकार द्वारा कुछ समय पूर्व अनाधिकृत चर्चों को हटाने और ज़बरन पंथ परिवर्तन पर अंकुश लगाने के लिए चर्चों और बाइबिल समाजों का सर्वेक्षण करने का प्रस्ताव रखा गया था। बताया जा रहा है कि अब इस प्रस्ताव को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। 

13 अक्टूबर को पिछड़े वर्गों और अल्पसंख्यकों की कल्याण समिति ने ज़िलों के उपायुक्तों को सर्वेक्षण करने को कहा था। पैनल की बुधवार (27 अक्टूबर, 2021) को इसी मुद्दे को लेकर बैठक होनी थी। इस बैठक में कुल 20 में से कम से कम 9 सदस्यों को उपस्थिति आवश्यक थी परन्तु यहाँ केवल 5 सदस्य ही पहुँचे। 

अधिकारियों की मानें तो फिलहाल यह सर्वेक्षण ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। इस पैनल का कार्यकाल 9 नवंबर को समाप्त होगा, इसके बाद ही यह उम्मीद है कि विधानसभा अध्यक्ष विशेश्वर हेगड़े नवंबर माह के मध्य तक एक नई समिति का गठन करेंगे।

मामले को लेकर अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा:

“विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने कहा है कि सर्वेक्षण नहीं किया जा सकता क्योंकि यह धर्म की स्वतंत्रता के संवैधानिक प्रावधान के विरुद्ध है। हालाँकि पुलिस ने इस साल जबरन पंथ परिवर्तन के 36 मामले दर्ज किए, परन्तु उन्होंने कहा कि चर्च चलाना और चर्च में प्रार्थना सभा आयोजित करना आपराधिक प्रक्रिया के दायरे के अंतर्गत नहीं आता है।”


‘लोगों की अनुपस्थिति के कारण हुई बैठक रद्द’

सर्वेक्षण पर सवाल उठाने वाली एक जनहित याचिका भी फिलहाल लंबित है और अधिकारियों ने कहा कि सरकार उच्च न्यायालय के फैसले का इंतजार करना चाहती है।

समिति के अध्यक्ष और कुम्ता से भाजपा विधायक दिनकर केशव शेट्टी ने इस पर कहा:

“मैं पहले से निर्धारित कार्यक्रमों के कारण बुधवार को बैठक में शामिल नहीं हो सका। बैठक रद्द कर दी गई क्योंकि कई अन्य लोग भी अनुपस्थित थे। हमें कई कानूनी और सामाजिक कारणों पर विचार करने की आवश्यकता है। मैं गुरुवार को पुनः एक बैठक बुलाऊँगा।” ।

बता दें कि अध्यक्ष की अनुपस्थिति में, होसदुर्गा के भाजपा विधायक, गूलीहट्टी शेखर ने 13 अक्टूबर को बैठक की अध्यक्षता की थी, जिसमें अल्पसंख्यक कल्याण और राजस्व विभागों के अधिकारियों को सर्वेक्षण करने के लिए कहा गया था।

इस कदम को राजनीतिक दलों और धार्मिक संस्थानों से तीखी प्रतिक्रिया मिली थी। बता दें कि शेखर ने शिकायत की थी कि उनकी माँ ने ईसाई पंथ अपना लिया था, और सत्तारूढ़ भाजपा के नेतृत्व ने कथित तौर पर उन्हें संयम बरतने का निर्देश दिया था।

शेखर ने आगे कहा:

“यह गलत तरीके से बताया गया है कि हम चर्चों का सर्वेक्षण करना चाहते हैं। हम केवल एक डेटाबेस तैयार करने के लिए चर्च, मस्जिद, दरगाह और अन्य धार्मिक संस्थानों के बारे में जानकारी एकत्र करना चाहते हैं। इस तरह के डेटा को एकत्रित करना अवैध नहीं कहा जा सकता है और जानकारी एकत्र करने का प्रयास जारी रहेगी।”



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