किसान आंदोलन होगा वर्चुअल: अंबानी का इंटरनेट रिचार्ज आएगा काम

21 मई, 2021 By: पुलकित त्यागी
किसान नेता गाँवों में कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए आंदोलन को वर्चुअल करने की योजना बना रहे हैं

महामारी के इस नाज़ुक समय में साउथ दिल्ली की शनाया के लिए एक सकारात्मक समाचार आया है। उसे यह जानकर प्रसन्नता की अनुभूति होगी कि अब वह केवल ट्विटर पर #IStandWithFarmers हैशटैग लिखकर ही नहीं बल्कि असल में तथाकथित किसान आंदोलन का हिस्सा बन सकती है।

यह खबर विश्व प्रसिद्ध अन्नदाता राकेश टिकैत ने स्वयं शनाया को व्हाट्सएप की ‘टर्म्स एंड कंडीशन’ स्वीकार करने के बाद मैसेज भेज कर दी है। आजकल टिकैत इतने भयभीत हैं कि हर तरह की टर्म्स एंड कंडीशंस को स्वीकार करने को राजी हैं।

आधे साल तक सड़कें रोककर देश की अर्थव्यवस्था को हजारों करोड़ का नुकसान पँहुचाने, गरीब किसानों को कोरोना संक्रमण से मारने तथा आंदोलन के नाम पर टेंटो में हो रहे बलात्कार की घटनाओं पर पर्दा डालने के बाद अब किसान नेताओं ने तय किया है कि वे इन पूँजीपतियों को उन्हीं के स्वर में उत्तर देंगे।

दरअसल, अन्नदाताओं ने अब अपने आंदोलन को वर्चुअल आंदोलन का रूप देने की ठानी है। अब आंदोलन सड़कों से उठकर सोशल मीडिया की ओर रुख़ करने जा रहा है। इसी मौके पर किसान नेता राकेश टिकैत ने अपने नए यूट्यूब चैनल की घोषणा करते हुए सभी देशवासियों से ‘हे गाइज़’ कहकर सब्सक्राइब करने के उपरांत नोटिफिकेशन वाला घंटा बजाने की भी अपील की। 

सोशल मीडिया से आंदोलन चलाने को लेकर पंजाब के कुछ नेता चिंतित हैं। उन्होंने कहा पंजाब में यह संभव नहीं हो पाएगा क्योंकि गत वर्ष पंजाब के युवाओं को नाक के रास्ते विशेष पदार्थ सुंघाकर वे पहले ही अम्बानी के जिओ के सारे टावर गिरवा चुके हैं।

वर्चुअल आंदोलन के लिए, सर्वप्रथम यह निर्णय लिया गया कि सभी किसान अपनी कुदालों की धार तेज करेंगे तथा राज्य में जिओ के सारे टावर पुनः स्थापित करेंगे। इस निर्णय के बाद योगेंद्र यादव खासे मायूस दिखे। योगेंद्र यादव ने अन्नदाताओं के इस फ़ैसले पर बड़ा बयान देते हुए कहा, “मेरा क्या फायदा। मैं तो अब तक बीएसएनएल की सिम चलाता हूँ।” आईफोन वाले युवा कनैडियन किसानों के लिए यह ‘OK boomer’ मोमेंट था।

अन्नदाताओं ने कहा कि वर्चुअल आंदोलन को सरकार कम आँकने का प्रयास ज़रा भी न करें। क्योंकि यह तकनीक उन्होंने भाजपा से ही सीखी है। जिस तरह भाजपा ने बखूबी बंगाल में चुनावों के बाद हुए हिंदू नरसंहारों का प्रतिकार करते हुए वर्चुअल धरना दिया था, उसी तरह किसान अब अपने-अपने घरों से वर्चुअल आंदोलन करेंगे।

किसान नेताओं को उम्मीद है कि वे इस तरह से भाजपा नेताओं से ज्यादा ही प्रभाव छोड़ने में कामयाब रहेंगे। इस टिप्पणी के बाद बंगाल हिंदू नरसंहार पर अपनी भारी राय रखते हुए संबित पात्रा ने ट्वीट करते हुए कहा कि ‘देखो बंगाल के उपद्रवी और किसान, दोनों एक साथ एक्सपोज़ हो गए हैं।’ 

समस्त आईटी सेल ने इसे भाजपा की एक परोक्ष जीत की लेते हुए उत्सव मनाया तथा कुछ उत्साहित आईटी सेलिए तो भुने जीरे का पाउडर नाक से सूंतने के बाद कुर्ता फाड़ कर ‘अपना टाइम आएगा’ गाने पर नाचते देखे गए।

आंदोलन फ़्रॉम होम

अन्नदाताओं ने यह भी कहा कि जब बड़ी-बड़ी आईटी कंपनी साल भर से Work-from-home कर रही हैं तो ऐसे में ‘म्हारे किसान कोई कोडर्स से कम हैं के’। और ‘Why should corporates have all the fun’ कहकर ‘Work from home’ की अपार सफलता के बाद ‘आंदोलन from home’ का नारा देते हुए किसान नेताओं ने क्रांति को आगे बढ़ाने का ऐलान किया।


 

समाचार सुनते ही सोनम कपूर ने Xo Xo.. एवं #YouGoअन्नदाताzz #MorePowerToYou लिखकर ट्वीटर पर अपना समर्थन व्यक्त किया।

इस निर्णय के बाद भी योगेंद्र यादव का चेहरा उतरा हुआ ही दिखा क्योंकि उन्होंने कहा कि अब मेरे क्रांतिकारी घुटनों की मसाज कैसे हो पाएगी? 

स्वर्गीय रबींद्रनाथ टैगोर के ‘एकला चलो रे’ गीत से प्रेरित एकमात्र आम आदमी पार्टी सांसद भगवंत मान भी इस निर्णय से खासे खुश नहीं दिखे क्योंकि उन्होंने कहा कि अब दरिद्र अन्नदाताओं के लिए दारू का स्टॉक कहाँ से आएगा?

अपने सांसद को दुखी देख आम आदमी पार्टी के फुल टाइम फ्रीलांस मॉडल तथा पार्ट टाइम विधायक राघव चड्डा से रहा न गया। उन्होंने कहा कि भगवंत भाई बिल्कुल चिंता न करें। चड्ढा स्वयं उनके तथा बाकी अन्नदाताओं के घर वाई-फाई राउटर लगाकर जाएँगे। इंटरनेट का प्रयोग कर सभी अन्नदाता ऑनलाइन दारू की डिलीवरी करवा सकेंगे। 

राहुल गाँधी ने अपने सफलता से भरे ट्वीट ‘मुझे भी गिरफ्तार करो’ के बाद ‘मुझे भी डेटा दो’ नामक हैशटैग चलवाया। राहुल गाँधी ने फासीवादी सरकार के सामने अपनी कड़ी माँग रखते हुए कहा, 

“सरकार सभी अन्नदाताओं के मोबाइल में 2-2 जीबी प्रतिदिन का डाटा उपलब्ध कराए ताकि किसान फासीवाद सरकार के विरुद्ध इस जंग में अपने परम पराक्रम का परिचय देते हुए ट्वीट कर सकें।

जिसके बाद मोदी जी ने उंगली के इशारे से ‘प्रस्थान करें श्रीमान’ का इशारा करते हुए राहुल गाँधी पर चुटकी ली कि उनका साबुन कितना स्लो है। मोदी जी ने बताया कि वे पहले ही प्रतिदिन 3-3 जीबी डेटा के लिए धनराशि किसानों के बैंक में पहुँचा चुके हैं, ताकि किसान निरंतर स्वयं को एक्सपोज़ करते रहें।

इस मास्टरस्ट्रोक रूपी निर्णय को सुनने के बाद तो आईटी सैलियों का उत्साह सभी चरम सीमाएँ लाँघ गया तथा वे ‘This is Sparta’ के अंदाज़  में ‘दिस इज़ मोदी जी’s मास्टरस्ट्रोक’ चिल्लाते हुए एक दूसरे को ही लाते मारने लगे।

कुछ आईटी सेल वालों की गारे में गिरकर घायल होने की खबरें आई हैं, जिनपर ‘Dr’ संबित पात्रा ने ट्वीट किया,

“घबराने की कोई बात नहीं है सभी खतरे से बाहर हैं। परंतु कहाँ है लिबरल मीडिया कहाँ है स्वरा भास्कर और शहला राशिद ?

उन्होंने कुछ भारी-भरकम प्रश्न करते हुए पूछा कि ‘राणा अय्यूब घायल भाजपा समर्थकों के लिए चंदा इकट्ठा क्यों नहीं कर रही हैं’?

इस सब के बाद प्राइम टाइम पर व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के फ़ेक न्यूज़ाचार्य एवं पार्ट टाइम पत्रकार रवीश ने कहा,

यह एक ऐतिहासिक निर्णय है। विश्व के किसी मजदूर किसान वर्ग ने आज तक वर्चुअल आंदोलन नहीं किया है। आज फिदेल कास्त्रो एवं चे ग्वेरा जन्नत के किसी कोने में बैठे अपने अपने रेड वाइन के गिलासों को चीयर्स करते हुए ‘रेड सेल्यूट कॉमरेड’ कह रहे होंगे। यह क्रांतिकारी निर्णय एक हाथ में कुदाल, एक में कंप्यूटर की तर्ज पर लिया गया है। इससे यह भी साफ होता है कि मोदी का एक हाथ में कुरान, एक में कंप्यूटर का नारा पूरी तरह विफल रहा। 

अति सम्माननीय नेता एवं इच्छाधारी आन्दोलनजीवी योगेंद्र यादव इस टिप्पणी को सुनकर भी मायूस दिखे। उनका कहना था कि एक हाथ में कुदाल, एक में कंप्यूटर देना भी इसी फासीवादी सरकार की एक चाल है। अगर गरीब के दोनों हाथ ही भर जाएँगे तो वह रोटी किस तरह खाएगा। 

यादव ने इसके बाद कहा कि वे डॉक्टरों एवं वैज्ञानिकों से गरीब के लिए तीसरा हाथ उगाए जाने की माँग रखते हैं तथा वे इसके लिए कल से AIIMS के सामने आंदोलन करेंगे।

नोट- योगेंद्र यादव का यह आंदोलन फिज़िकल होगा या वर्चुअल, ऐसा वे मोदी द्वारा 3GB डेटा रीचार्ज करवाते ही ट्वीट कर के बता देंगे। अभी उनका दिन का 1.5 जीबी जियो सिद्धू मूसे वाले की नई एल्बम सुनने में समाप्त हो गया है।



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