सिंघु बॉर्डर पर लौटी पिज्जा पार्टियाँ और स्वादिष्ट लंगर, '700 किसानों की मौत' की बात भूले अन्नदाता

26 नवम्बर, 2021
सिंघु सीमा पर फिर शुरू हुई पिज्जा पार्टी और लंगर

केंद्र सरकार द्वारा किसानों के हित में लाए गए तीन कृषि कानूनों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू करने के बाद भी कथित किसान आंदोलन खत्म करने को तैयार नहीं है। इस बीच आंदोलन के एक वर्ष पूरे होने के मौके पर आंदोलन स्थलों पर फिर से पिज़्ज़ा पार्टी का दौर शुरू हो गया है।

किसान आंदोलन के एक साल पूरे होने पर कथित किसानों के लिए सिंघु बॉर्डर पर पिज्जा लंगर का आयोजन किया गया। किसानों के लिए चलाए जा रहे पिज्जा लंगर की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं।

सिंघु बॉर्डर पर पिज्जा लंगर का आनंद लेने के लिए किसानों की लंबी-लंबी लाइनें भी देखने को मिल रही हैं। हालाँकि, कुछ लोग सवाल भी उठा रहे हैं कि इन ‘गरीब किसानों के लिए ‘पिज़्ज़ा पार्टी’ का इंतज़ाम कौन कर रहा है।

वहीं कुछ लोग इसे संवेदनहीन मानते हुए ये भी कह रहे हैं कि ये कहते थे 700 किसान मर गए, लेकिन कोई अपना मर जाए तो कौन पिज़्ज़ा पार्टी करता है उसके मरने की वर्षगाँठ पर? लोग यहाँ तक भी कह रहे हैं कि अभी तो ये लोग 25वी वर्षगाँठ मना के उठेंगे… बाल बच्चों का विवाह भी वहीं से हो जाएगा।

गौरतलब है कि यह पहला मौका नहीं है जब किसान आंदोलन में पिज्जा लंगर का आयोजन हुआ है। पिछले साल आंदोलन की शुरुआत के दौरान भी सिंघु बॉर्डर पर पिज्जा लंगर का आयोजन किया गया और तब इसकी वजह से किसानों को आलोचना का भी सामना करना पड़ा था।

हालाँकि, पिज़्ज़ा लंगर का आयोजन करने वालों ने साफ कहा था कि जब किसान पिज्जा बनाने का सामान उगा सकते हैं तो फिर उनके पिज्जा खाने पर सवाल क्यों खड़े किए जा रहे हैं?

किसान आंदोलन का एक वर्ष पूरा होने पर किसान नेता टिकैत ने ट्वीट किया,

“एक साल का लम्बा संघर्ष बेमिसाल। थोड़ी खुशी, थोड़ा गम। लड़ रहे है, जीत रहे हैं, लड़ेंगे, जीतेंगे। न्यूनतम समर्थन मूल्य कानून किसानों का अधिकार।”

राकेश टिकैत ने कहा है कि उनकी सिर्फ एक ही माँग को केंद्र सरकार ने स्वीकार किया है। उन्होंने कहा कि जब तक केंद्र की मोदी सरकार एमएसपी पर कानून समेत बाकी माँगें नहीं मान लेती है तब तक किसान बॉर्डर से वापस नहीं लौटेंगे।

गाजीपुर बॉर्डर से सरकार को धमकी देते हुए टिकैत ने कहा, “जब तक संसद का सत्र चलेगा तब तक सरकार के पास सोचने और समझने का समय है। आगे आंदोलन कैसे चलाना है उसका फ़ैसला हम संसद चलने पर लेंगे। आंदोलन की रूपरेखा क्या होगी उसका फ़ैसला भी 27 नवंबर को हाने वाली संयुक्त किसान मौर्चा की बैठक में होगा।”



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