तालिबान के भय से छिपी हैं 220 महिला जज: जान से मारने को तलाश रहे हैं रिहा हो चुके कैदी

22 अक्टूबर, 2021
जान बचाने के लिए छिप कर जीने को मजबूर हैं अफगानिस्तान की महिला जज

अफगानिस्तान देश में इस्लामी आतंकी संगठन तालिबान का राज आने के बाद जज और वकील साए में जी रहे हैं। जेलों से आज़ाद किए गए कैदी अब महिला जजों के खून के प्यासे बन गए हैं। ये लोग उन महिला जज को मारने के लिए खोज रहे हैं, जिन्होंने तालिबान के शासन से पूर्व उन्हें सज़ा सुनाई थी।

15 अगस्त, 2021 के बाद पड़ोसी देश अफगानिस्तान में इस्लामी आतंकी संगठन तालिबान ने अपना शासन स्थापित कर लिया। इसके बाद से ही तालिबान निरंतर विभिन्न क्षेत्रों में आतंकी गतिविधियों जैसे की हत्याओं और उपद्रव को अंजाम दे रहा है।

दशकों बाद एक बार पुनः अफगानिस्तान में महिलाओं के लिए बुर्का अनिवार्य हो गया है और तालिबान ने साफ किया है कि वे शरिया कानून के अलावा किसी व्यवस्था को देश में नहीं चलने देंगे।

जहाँ एक ओर विश्व के कई कथित बुद्धिजीवी नए तालिबान को नारीवादी और महिलाओं का रक्षक बता रहे थे, वहीं तालिबान द्वारा कई ऐसे मामले सामने आए जहाँ उन्होंने अपनी असलियत सामने रखी। शासन में आते ही तालिबान ने 15 से 45 साल की लड़कियों और विधवाओं की माँग कर दी।

शासन संभालते ही तालिबान ने देश की जेलों से कई भयानक कैदियों को आज़ाद कर दिया था और अब ये कैदी देश में महिला जजों के नरसंहार के लिए इधर-उधर घूम रहे हैं। अफगानिस्तान से कई ऐसे समाचार सामने आए हैं जिन से यह साफ होता है कि देश की महिला जजों को छिप-छिप कर अपना जीवन व्यतीत करना पड़ रहा है।

महिला जज और वकील अपने और अपने परिवार वालों के साथ साथ अपने सगे-संबंधियों की जान को लेकर भी चिंतित हैं क्योंकि ये कैदी इन महिला जजों और वकीलों को खोज रहे हैं और मारना चाहते हैं। 


भयावह हैं हालात 

बता दें कि तालिबान में करीब 220 महिला जज छिपकर जीवन व्यतीत करने को मजबूर हैं। इन्हीं में से एक पूर्व जज नबीला ने बताया कि उन्हें कई धमकी भरे और जान से मारने की बातें करते हुए कैदियों के फोन आते हैं।

उन्होंने आगे कहा:

“तालिबान शासन लागू होते ही मेरी नौकरी चली गई। अब मुझे छिप कर जीवन जीना पड़ रहा है। आलम यह है कि मैं बाहर भी नहीं निकल सकती। यही हालत कई अन्य जजों की भी है। जेल से छूटे कैदी हमारी कभी भी हत्या कर सकते हैं।”

पूरे मामले पर तालिबानी प्रवक्ता बिलाल करीमी ने कहा है कि फिलहाल महिला जजों और वकीलों भविष्य को लेकर कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया है। फिलहाल यह कार्य ‘होल्ड’ पर है।

बता दें कि इन पदों पर बैठे अधिकतर महिला जज और वकील ऐसी शादियों और संबंधों में न्याय दिया करते थे जिनमें महिलाओं के साथ उत्पीड़न और शोषण होता था। कई जज और वकील बलात्कार और अपहरण के मामलों में पीड़ित महिलाओं के संरक्षण का कार्य भी किया करते थे।

ऐसी ही एक महिला जज वहीदा कहती हैं:

“हमने अपना सब कुछ खो दिया है। अपनी नौकरी, अपना घर और जिन हालातों में हम रह रहे हैं वे भयावह हैं।”

घरेलू हिंसा से पीड़ित लोगों के केस लड़ने वाली 25 वर्ष की बेहिस्ता ने बताया कि 15 अगस्त, 2021 से जब से तालिबान ने देश पर शासन किया है वे अपने काबुल से घर से बाहर तक नहीं निकल पाई हैं।

वह अपनी माँ और दो भाइयों के साथ अफ़ग़ानिस्तान से निकलने का निरंतर प्रयास कर रही हैं। उन्होंने बताया कि उनकी नौकरी जा चुकी है और अब केवल उनकी ही नहीं उनके पूरे परिवार की जान को खतरा है।

तालिबान बोला- खुलकर रहें नागरिक 

इस सब इस पूरे मामले पर तालिबान के प्रवक्ता करीमी ने कहा:

“जो भी लोग छिप कर जीवन जी रह रहे हैं वे स्वतंत्र होकर रहें। हम उन्हें कोई नुकसान नहीं पहुँचाएँगे। यह आपका अपना देश है, आप यहाँ खुलकर आज़ादी से रह सकते हैं।”

बता दें कि इन कैदियों के साथ-साथ तालिबानी भी ऐसे कई कुकृत्यों को अंजाम दे चुके हैं। अगस्त 2021 में आए एक मामले में देश के उत्तरी क्षेत्र में तालिबानी आतंकियों ने एक महिला को जलाकर मार डाला था। इस निर्मम हत्या का कारण केवल इतना था कि महिला द्वारा बनाया गया खाना इन आतंकियों को पसंद नहीं आया था।

इसके साथ-साथ अफगानिस्तान से निकल कर और देशों में गई कई महिलाओं ने बताया कि तालिबानी महिलाओं को ‘सेक्स स्लेव’ की तरह उपयोग कर रहे हैं और अफगानी महिलाओं की कई देशों में तस्करी तक की जा रही है।



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