तालिबान से RSS की तुलना करने पर मुंबई पुलिस ने जावेद अख्तर के खिलाफ दर्ज की FIR

04 अक्टूबर, 2021 By: डू पॉलिटिक्स स्टाफ़
तालिबान से आरएसएस की तुलना कर फँसे जावेद अख्तर

अपने विवादित बयानों से चर्चा और आलोचनाओं में रहने वाले बॉलीवुड लेखक और गीतकार जावेद अख़्तर अपने बिना सिर पैर के बयान के चलते इस बार मुसीबत में फँस गए हैं। जावेद अख़्तर द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की तुलना आतंकी संगठन तालिबान से करने पर मुम्बई पुलिस ने FIR दर्ज कर ली है।

एक वकील की शिकायत पर जावेद अख्तर के खिलाफ असंज्ञेय अपराध का मामला मुलुंड थाने में दर्ज़ हुआ है। जावेद अख्तर ने एक टीवी शो में बात करते हुए आरएसएस को आतंकी संगठन तालिबान जैसा बताया था। जावेद ने कहा था कि जैसे तालिबान अफगानिस्तान को इस्लामी राष्ट्र बनाना चाहता है, उसी तरह आरएसएस भी हिंदुस्तान को हिंदू राष्ट्र बनाना चाहता है।

एक न्यूज पोर्टल को दिए इंटरव्यू में जावेद अख्तर ने कहा था कि तालिबान बर्बर है, उसकी हरकतें निंदनीय हैं, लेकिन आरएसएस, विहिप और बजरंग दल का समर्थन करने वाले भी तालिबानियों जैसे हैं। जावेद ने कहा था कि जो लोग आरएसएस का समर्थन करते हैं, उन्हें अपने दिमाग की जाँच कर लेनी चाहिए क्योंकि उसमें और तालिबान में कोई फर्क नहीं है।

अख्तर के इस बयान के बाद हर तरफ उनकी आलोचना शुरू हो गई थी। भाजपा नेता राम कदम ने जावेद अख्तर पर निशाना साधते हुए कहा था कि अगर आरएसएस तालिबान की तरह होता तो जावेद अख्तर इस तरह के बयान नहीं दे पाते।

जावेद अख्तर के बयान के विरोध में बीजेपी कार्यकर्ताओ ने उनका पुतला जलाने की भी कोशिश की थी। भाजपा की यूथ विंग ने जावेद अख्तर के जुहू स्थित आवास तक विरोध मार्च निकाल कर अख्तर से अपने बयान के लिए माफी माँगने की माँग की गई थी।

इससे पहले इसी मामले में आरएसएस कार्यकर्ता विवेक चंपानेरकर ने जावेद अख्तर के खिलाफ मुकदमा दायर किया था। विवेक चंपानेरकर ने ये केस मुंबई के ठाणे कोर्ट में दायर किया था, जिसके बाद कोर्ट ने अख्तर को नोटिस भेज कर 12 नवम्बर को कोर्ट में हाज़िर होने का आदेश दिया था।

शिवसेना ने भी की थी अख्तर की आलोचना

आरएसएस की तुलना तालिबान से करने पर शिवसेना ने भी जावेद अख्तर की आलोचना की थी। शिवसेना के मुखपत्र में कहा गया था कि हिंदुत्व की तालिबान से तुलना करना हिंदू संस्कृति का ‘अपमान’ है।

अपने मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय में जावेद अख्तर पर निशाना साधते हुए कहा गया था-

“आप कैसे कह सकते हैं कि हिंदू राष्ट्र की अवधारणा का समर्थन करने वाले तालिबानी मानसिकता के हैं? हम इससे सहमत नहीं हैं। आरएसएस की तालिबान से तुलना करने में गीतकार जावेद अख्तर ‘पूरी तरह से गलत’ थे।”

‘सामना’ के संपादकीय में अख़्तर की टिप्पणी पर कहा गया था, “भले ही जावेद अख्तर एक धर्मनिरपेक्ष व्यक्ति हैं और कट्टरता के खिलाफ बोलते हैं, लेकिन उनका आरएसएस की तुलना तालिबान से करना पूरी तरह से गलत है। आपका आरएसएस के साथ मतभेद हो सकता है, लेकिन उनके दर्शन को तालिबानी कहना पूरी तरह से गलत है।”

सम्पादकीय में आगे कहा गया था, “जिस विभाजन के कारण पाकिस्तान का निर्माण हुआ वह धर्म पर आधारित था। जो लोग हिंदू राष्ट्र का समर्थन करते हैं, वे बस यह चाहते हैं कि बहुसंख्यक हिंदुओं को दरकिनार न किया जाए। हिंदुत्व एक संस्कृति है और समुदाय के लोग इस संस्कृति पर हमला करने वालों को रोकने के अधिकार की माँग करते हैं।”



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