क्या वाकई महिला आयोग सदस्या ने मोबाइल को रेप का जिम्मेदार बताया?

10 जून, 2021 By: डू पॉलिटिक्स स्टाफ़
यूपी राज्य महिला आयोग सदस्य मीना कुमारी

उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की एक सदस्या लड़कियों को लेकर दिए गए अपने एक बयान के कारण विवाद का विषय बन गई हैं। यूपी राज्य महिला आयोग की इस सदस्या का कहना है कि लड़कियों को मोबाइल फोन नहीं देना चाहिए क्योंकि मोबाइल पर वह गलत लोगों से बात करने लगती हैं और साजिश का शिकार होकर उनके साथ भाग जाती हैं।

महिला आयोग की सदस्या ने कहा कि बेटियों को मोबाइल न दें और यदि दें भी तो माता-पिता, विशेषकर माताओं को मोबाईल और अपनी बेटियों की निगरानी करनी चाहिए।

बुधवार (09 जून, 2021) को अलीगढ़ में महिला संबंधी शिकायतों की जनसुनवाई के दौरान जब एक रिपोर्टर ने यूपी महिला आयोग की सदस्या मीना कुमारी से यूपी में बलात्कार के मामलों में कथित वृद्धि के बारे में पूछा तो उन्होंने इसके लिए लड़कियों के माता-पिता की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया।

यूपी राज्य महिला आयोग की सदस्या ने कहा है कि लड़कियों को मोबाइल फोन नहीं दिया जाना चाहिए क्योंकि इससे बलात्कार होता है। उन्होंने माता-पिता से अपनी बेटियों से मोबाइल उपकरणों से दूर रहने की अपील भी की।

बलात्कार के बढ़ते मामलों की वजह है मोबाइल’

कुमारी ने समाज में महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराधों को लेकर कहा कि समाज को खुद ही जागरूक होना पड़ेगा। ज्यादातर मामलों में मोबाइल एक गंभीर समस्या बनकर सामने आया है, लड़कियाँ मोबाइल पर घंटों लड़कों से बात करती हैं।

उन्होंने कहा कि अभिभावक उनका मोबाइल भी नहीं चेक करते और फिर वह गलत लड़कों के बहकावे में आकर घर से भाग जाती हैं।

मीना कुमारी


बढ़ते बलात्कार के मामलों एवं मोबाइल फोन के सम्बन्ध में पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा:

“मैं प्रतिदिन औसतन 20 महिलाओं की शिकायतें सुनती हूँ, उनमें से कम से कम 5 से 7 मामले सेलफ़ोन पर हुई दोस्ती से संबंधित होते हैं। कई मामलों में लड़कियों को बहला-फुसला कर एक निश्चित स्थान पर बुलाया जाता था और फिर उनका यौन शोषण किया जाता है।”


उन्होंने कहा कि विशेष रूप से माताओं को अपनी बेटियों पर नजर रखनी चाहिए क्योंकि महिलाओं के खिलाफ अपराध अक्सर ‘उनकी लापरवाही’ का परिणाम होता है।

उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की सदस्य के इस बयान से विवाद खड़ा हो गया है। अपने इस बयान के बाद मीना कुमारी को चारों तरफ से आलोचनाएँ झेलनी पड़ रही हैं।

सोशल मीडिया पर उनके बयान को विपरीत नैरेटिव देते हुए यह साबित करने का भी प्रयास किया जा रहा है कि बलात्कार जैसे संवेदनशील विषय को मोबाइल से जोड़ दिया गया।


अपने बयान के बचाव में आईं मीना कुमारी

अपने बयान का बचाव करते हुए मीना कुमारी ने कहा कि उनका मतलब था कि गाँव की नाबालिग लड़कियों को सही तरीके से फोन का उपयोग करना नहीं आता। वे पुरुष मित्र बनाने के लिए फोन का उपयोग करती हैं और बाद में उनके साथ भाग जाती हैं।

उन्होंने कहा कि स्मार्टफोन का इस्तेमाल अनुचित सामग्री देखने के लिए भी किया जा जाता है जिससे यौन हिंसा को बढ़ावा मिलता है।

राज्य महिला आयोग ने ‘सदस्य’ के बयान से बनाई दूरी

मीना कुमारी के बयान से राज्य आयोग ने दूरी बना ली है। आयोग की उपाध्यक्ष अंजू चौधरी ने कहा कि कुमारी का बयान गलत था और सेलफोन न दिया जाना यौन हिंसा का समाधान नहीं है।

चौधरी ने कहा, “यह कहने के बजाय कि हमें लड़कियों को मोबाइल फोन नहीं देना चाहिए, हमें उन्हें अजनबियों के साथ चैट न करने और सेलफोन के सुरक्षित उपयोग के बारे में शिक्षित करने के लिए सिखाना चाहिए।”

बलात्कार एवं यौन शोषण में मोबाइल की भूमिका

यह पहला मौका नहीं है जब महिलाओं से संबंधित यौन हिंसा और अपराधों को लेकर इस तरह का बयान सामने आया है। इससे पहले भी राजनेताओं और अधिकारियों ने अधिकारियों ने देश में बलात्कार की बढ़ती घटनाओं के लिए चाउमीन से लेकर जींस जैसी चीजों को जिम्मेदार ठहराया है।

हालाँकि, अतीत में ऐसी कई घटनाएँ सामने आई हैं, जिनमें पीड़िता को आरोपितों द्वारा मोबाइल फ़ोन या फिर सोशल मीडिया के माध्यम से शिकार बनाया गया था। इनमें से अधिकतर मामले लव-जिहाद के थे।

साथ ही, ऐसी भी कई घटनाएँ सामने आती रही हैं, जब आरोपितों ने अपनी महिला मित्र के साथ बनाई गई अश्लील वीडियो के लिए उन्हें ब्लैकमेल किया और फिर उनका अपने साथियों के साथ मिलकर सामूहिक बलात्कार किया।



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