ग्राउंड रिपोर्ट: ये नमाज पढ़ कर यहाँ PAK-कश्मीर बना देंगे, जानिए गुड़गाँव के हिन्दुओं ने क्यों खोला मोर्चा

04 दिसम्बर, 2021 By: पुलकित त्यागी
गुड़गाँव के कई क्षेत्रों में लम्बे समय से चल रहे विवाद को लेकर स्थानीय लोगों से DoPolitics की बातचीत

दिल्ली से सटे हरियाणा राज्य के गुड़गाँव के कई इलाकों में एक लम्बे समय से मुस्लिम समुदाय द्वारा खुले में नमाज़ पढ़ने को लेकर विवाद चल रहा था। गुड़गाँव के सेक्टर- 12A, 37 और 47 में अक्टूबर माह से ही यह मुद्दा गरमाया हुआ था।

कुछ समय पहले तक हरियाणा प्रशासन द्वारा कई सार्वजनिक स्थानों पर मुस्लिम समुदाय को नमाज़ पढ़ने की अनुमति दी गई थी। हालाँकि स्थानीय लोगों का इस पर यह कहना है कि कि जिस भूमि पर नमाज़ पढ़ी जा रही है, वह सरकारी भूमि नहीं बल्कि गाँव की भूमि है। इसी कारण स्थानीय लोग इस नमाज़ का पिछले कई हफ़्तों से भारी विरोध कर रहे थे। 


डू-पॉलिटिक्स की टीम शुक्रवार (3 दिसंबर, 2021) को इसी के चलते सीधे ग्राउंड ज़ीरो पर पहुँची, और हमने पाया कि सेक्टर-37 में प्रशासन की सहमति स्थानीय लोगों की आपत्ति के बाद भी न केवल नमाज़ पढ़ी गई, बल्कि पुलिस द्वारा नमाज़ पढ़वाने वाले मौलवी एवं अन्य लोगों को पूरी सुरक्षा प्रदान करते हुए नमाज़ के लिए लाया और ले जाया गया। 

इतना ही नहीं, मौके पर खुले में नमाज़ का विरोध कर रहे स्थानीय हिन्दू समुदाय के कई लोगों को पुलिस द्वारा हिरासत में ले लिया गया। बता दें कि इससे पहले 29 अक्टूबर, 2021 को भी पुलिस द्वारा विरोध कर रहे हिन्दू समुदाय के करीब 30 लोगों को पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया था। 


डू-पॉलिटिक्स की टीम सीधे सेक्टर-37 में नमाज़ स्थल पर ही पहुँची और वहाँ के स्थानीय लोगों से इस विषय में बातचीत की। लोगों की एक प्रमुख नाराजगी इस बात को ले कर भी थी कि मुख्यधारा की मीडिया उनका पक्ष नहीं दिखा रही है, और जो मीडिया संस्थाएँ मामले की रिपोर्टिंग कर भी रहीं हैं वे केवल मुस्लिम पक्ष की ओर से बातें करते हुए एकतरफा रिपोर्टिंग कर रही हैं। हमनें इस मामले में विरोध करने वाले हिन्दू पक्ष से लोगों से बातचीत की और उनके विचार सामने रखे। 

पहले पूरे मामले की जानकारी देते हुए स्थानीय व्यक्ति हर्ष ने हमसे बातचीत की और बताया कि किस प्रकार हर हफ्ते नमाज़ के कारण आस-पास रहने वाले लोगों को परेशानियों का सामना कारण पड़ता है।

पूरे विवाद पर मीडिया के रुख की आलोचना करते हुए हर्ष कहते हैं:

“जो भी हमारे नेशनल न्यूज़ पेपर हैं, मैं मुख्यतः ‘इंडियन एक्सप्रेस’ को पढ़ता हूँ। इसमें मैं पिछले एक हफ्ते से समाचार पढ़ रहा हूँ। उन्होंने केवल एक पक्ष की खबर दिखाई है। यह पूरा-पूरा पक्षपाती (Biased) न्यूज़ पेपर है। उन्होंने केवल यह दिखाया कि खाँडसा गाँव वालों ने नमाज़ नहीं पढ़ने दी पर यह नहीं दिखाया कि खाँडसा गाँव के जो बच्चे मैदान में क्रिकेट खेल रहे थे, उन्हें मारा-पीटा गया और उन्हें वहाँ से भगाया गया। बच्चों ने जब घर जाकर शिकायत की, उसके बाद लोगों को आवाज़ उठानी पड़ी।”


आगे हर्ष बताते हैं कि जिस ज़मीन पर नमाज़ पढ़ी जा रही है वह गाँव की ज़मीन है। कोई फोर्स लगाकर या जुडिशरी लगाकर अगर सरकार कह दे कि यह ज़मीन उनकी है, उससे जमीन सरकारी नहीं हो जाती है। जमीन गाँव वालों की है और उनके पूर्वज यहाँ लंबे समय से खेती कर रहे हैं।

हर्ष ने उन लोगों के बारे में भी बताया जिन्हें पुलिस द्वारा हिरासत में लिया गया। हर्ष ने इनकी पहचान अवनीश उर्फ रिंकू, दिनेश भारती, सुमित छोकर, सतपाल के रूप में बताई। इन्हें गिरफ्तार करने की वजह यह बताई गई कि जब मुस्लिम समुदाय के लोग और मौलवी स्थानीय लोगों की आपत्ति के बाद भी नमाज़ पढ़ने आए तो इन लोगों ने वहाँ ‘जय श्रीराम’ के नारे लगाए और खुले में नमाज़ का विरोध किया।

लोगों ने यह भी बताया कि मुस्लिम समुदाय के कई लोगों और मौलवी को पुलिस द्वारा पूरी सुरक्षा प्रदान करके घेराव करते हुए नमाज़ पढ़वाई गई थी।

आगे हर्ष कहते हैं:

“हिंदू समाज पूरी तरह हिंसा का विरोधी है, इसी कारण पहले से ही उन सब जगहों को लेकर पुलिस प्रशासन को ज्ञापन दिया था, जहाँ पर स्थानीय लोग नमाज़ नहीं पढ़ने देना चाहते। इसके बाद भी अगर नमाज़ होती है तो स्थानीय लोग तो विरोध करेंगे ही।”

स्थानीय लोगों की ज़मीन पर नमाज़ पढ़े जाने को लेकर हर्ष ने आगे कहा:

“जिसके घर के बाहर यह होगा दिक्कत तो उसी को होगी ना! इसमें प्रशासन या नेता क्या करेंगे? मेरे घर की, मेरे गाँव की जमीन पर अगर मेरे बच्चे नहीं खेल सकेंगे या मुझे कोई दिक्कत आती है तो उसकी समस्या तो मुझे ही झेलनी पड़ेगी। गाँव वालों को दिक्कत होगी तो आवाज़ तो गाँव वाले ही उठाएँगे नेता या पुलिस क्यों उनके लिए आवाज़ उठाएगी?”

उन्होंने आगे यह भी बताया कि जो लोग नमाज़ पढ़ने आते हैं, उन्हें अगर वे समझाएँ तो शायद वे बात समझ जाएँगे पर मुस्लिम समाज के कुछ ठेकेदार उन्हें यह बात समझ नहीं आने देना चाहते। यह एक षड्यंत्र के तहत किया जा रहा है और यह भी कश्मीर में वर्ष 1990 में हुए कश्मीरी हिंदुओं के नरसंहार की तरह ही है। आगे वे कहते हैं:

“जहाँ पर 35% आबादी इनकी (मुस्लिम समुदाय) हो जाती है, वहाँ कोई अन्य पंथ अपना नेता चुन ही नहीं सकता, इसलिए यह षड्यंत्र किया जा रहा है कि दूर-दूर से आकर भीड़ लगाओ फिर षड्यंत्र के तहत ये यहाँ बस जाएँगे और उसके बाद अपना नेता मुस्लिम चुनेंगे।”

आगे यह भी कहा गया कि जैसा कि हम देख सकते हैं केरल, कश्मीर, पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में तो हिंदू विरोध भी नहीं कर सकता। स्थानीय नेता द्वारा मदद किए जाने को लेकर हर्ष ने कहा:

“मैं नेता के पास क्यों जाऊँ? नेता हमारा सेवक है, नेता को स्वयं आना चाहिए, जैसे भी वोट माँगने आते हैं। वोट माँगने सभी आ जाते हैं परंतु हमारी दिक्कतें ठीक करने कोई नहीं आता। अगली बार जब भी हमारे घरों में ये वोट माँगने आएँगे तो सभी के घरों में काली स्याही रखी रहेगी, जिसे हम इनके मुँह पर लगाएँगे।”


इसके साथ ही गौ-रक्षक दल के लकी ने हरियाणा राज्य में अभी भी खुलेआम चल रही गौ-तस्करी के विषय पर रोशनी डाली। उन्होंने बताया कि कैसे अब भी हरियाणा के विभिन्न गाँवों और कस्बों से गाय चुराई जा रही हैं और इसका विरोध करने वालों पर गौ-तस्करों द्वारा गोलियाँ तक चलाई जाती हैं।

लकी ने नमाज़ के मामले में आगे कहा:

“यह एक शक्ति प्रदर्शन है। अगर नमाज़ पढ़नी ही है तो घर में पढ़ी जा सकती है, जहाँ काम करते हैं वहाँ पढ़ी जा सकती है और सरकार ने गुड़गाँव में हर जगह मस्जिदें दे रखी है वहाँ भी पढ़ी जा सकती हैं।”

लकी ने आगे कहा कि आज जो साथी पकड़े गए हैं उसके विरोध में अगले शुक्रवार को अधिक से अधिक मात्रा में खड़े हों और प्रशासन को बताएँ कि हिंदू मरा नहीं है क्योंकि अगर अभी भी नहीं बोले तो कल इस जगह पर जब मस्जिद बनेगी तब भी किसी की औकात नहीं होगी इस विषय में कुछ कर सके।

आसपास के क्षेत्रों के विषय में जानकारी देते हुए उन्होंने आगे बताया:

“कश्मीर और बंगाल तक जाने की आवश्यकता भी नहीं, मेवात जाकर देख लें। न तो प्रशासन और न ही मीडिया की औकात है कि वहाँ जाकर कुछ कर सके। बड़े-बड़े गाँव हैं जहाँ लड़कियाँ लव-जिहाद का शिकार हो रही हैं और मुस्लिम समुदाय के घर के बहू बनने वाली 95% लड़कियाँ हिंदू हैं।”

गुड़गाँव के सेक्टर 10A पुलिस थाने के बाहर विरोध के लिए एकत्रित हुए स्थानीय लोगों का केवल यह कहना था कि जिस तरह हिंदुओं की पूजा करने के लिए मंदिर हैं, उसी तरह नमाज़ भी केवल मस्जिद में होनी चाहिए, सार्वजनिक स्थान या सड़कों पर कतई नहीं।


नमाज़ के दौरान हुए विरोध में मुख्य रूप से आगे रहे अमित हिंदू ने भी डू-पॉलिटिक्स की टीम से बातचीत की जिसमें उन्होंने कहा कि पूरा गुड़गाँव प्रशासन बिका हुआ है, पता नहीं इनके ऊपर कहाँ से दबाव है? उन्होंने आगे कहा:

“हम किसी भी कीमत पर खुले में नमाज़ नहीं होने देंगे और अगर आगे नमाज़ होती है तो हम भूख-हड़ताल पर जाएँगे और सरकार के खिलाफ जाएँगे।”

उन्होंने पुलिस द्वारा लोगों को हिरासत में लेने को लेकर कहा:

“हम ऐसी गिरफ्तारियों से नहीं डरते, हम वो हैं जो अपना शीश कटा देंगे पर खुले में नमाज़ नहीं होने देंगे।”

मामले की जानकारी देते हुए नीरज हिंदू नामक युवक ने हमसे बातचीत में बताया कि नमाज़ पढ़ने आने वाले लोग स्थानीय बच्चों के साथ मारपीट करते हैं और उन्हें मैदान में खेलने नहीं देते हैं। उन्होंने कहा:

“उनके बाकी घर वाले भी तो नमाज़ पढ़ते हैं। जब इनके घर की औरतें और बच्चे घरों में नमाज़ पढ़ सकते हैं तो इन्हें सार्वजनिक स्थानों पर नमाज़ पढ़ने की क्या आवश्यकता है? ये भी अपने घरों और मस्जिदों में नमाज़ पढ़े।”


‘जय भारत माता वाहिनी’ के एक सदस्य ने हमारी टीम से बातचीत के दौरान बताया कि उन्होंने इस विषय में डीसीपी कार्यालय में ज्ञापन दिया और डीसीपी ने उन्हें यह कहा है कि इस जगह पर नमाज़ नहीं होनी चाहिए।

स्थानीय लोगों ने यह भी कहा कि:

“अगर ऐसा ही चलता रहा और खुले में नमाज़ नहीं रुकी तो स्थानीय लोग कमिश्नर कार्यालय का भी घेराव कर सकते हैं।”




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