हरिद्वार में जनसांख्यिक असंतुलन: हर 10 वर्ष में 40% की रफ़्तार से बढ़ रही है समुदाय विशेष की आबादी

17 सितम्बर, 2021 By: डू पॉलिटिक्स स्टाफ़
हरिद्वार जिले की आबादी इस वर्ष के अंत तक 22 लाख के करीब हो जाएगी, जिसमें ख़ास समुदाय की आबादी 8 लाख से ज्यादा होने की बात कही जा रही है

उत्तराखंड के नए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि धर्मांतरण, लव-जिहाद और बाहर से ​आए जिन लोगों के बारे में ठीक से जानकारी नहीं है उनके बारे में जानकारी जुटाई जाएगी। इसके अलावा उन्होंने लव-जिहाद के बढ़ते मामलों पर चिंता जताई ऐसे सभी मामलों से सख़्ती से निपटने की बात कही है।

इससे पहले, इस माह की शुरुआत में धामी सरकार ने प्रदेश में अप्रत्याशित रूप से बढ़ती मुस्लिम आबादी पर काबू करने के लिए जनसंख्या नियंत्रण नीति लाने पर हामी भरी थी। RSS से जुड़े 35 संगठनों ने सरकार से ये माँग की थी।

हिन्दूवादी संगठनों का दावा है कि देहरादून, हरिद्वार, उधमसिंह नगर और नैनीताल में मुस्लिम आबादी कुछ सालों में बढ़ी है। उनकी माँग थी कि ‘डेमोग्राफ़ी बैलेंस’ के लिए यह नीति आवश्यक है।

हरिद्वार में मुस्लिम आबादी वृद्धि दर 40% के करीब

हरिद्वार हिंदुओं की धार्मिक आस्था का केंद्र रहा है। सनातन धर्म के प्रमुख केंद्रों में एक, जहाँ सभी मठ, अखाड़े और आध्यात्मिक केंद्र स्थित हैं। यह हिंदुओं के सबसे बड़े धार्मिक कर्मकांडो की पवित्र भूमि है। हिन्दू यहाँ अस्थि विसर्जन से लेकर जनेऊ संस्कार और काँवड़ के लिए गंगा जल तक लेने आते हैं।

लेकिन अब धीरे-धीरे एक साजिश में तहत पूरे हरिद्वार शहर को मुस्लिम आबादी ने घेर लिया है। गंगा किनारे की इस पावन भूमि में साजिश के तहत बेतहाशा मुस्लिम आबादी बढ़ती जा रही है। आँकड़ों के मुताबिक हरिद्वार की मुस्लिम आबादी हर दस साल में 40% की रफ्तार से बढ़ रही है। ये आँकड़े बेहद चौकाने वाले और चिंताजनक हैं।

अनुमान के अनुसार हरिद्वार में मुस्लिम समुदाय की आबादी अब यहाँ की कुल आबादी की 39% के आसपास हो गई है और इस साल के अंत तक 22 लाख के करीब हो जाएगी। हरिद्वार को पूरी तरह घेरने के बाद अब मुस्लिम समुदाय अवैध रूप से गंगा किनारे वन विभाग और कैनाल की जमीन पर बसने लगा है।

सीमांत जिलों से हुई घुसपैठ

विशेषज्ञों की मानें तो हरिद्वार जिले में बढ़ती मुस्लिम आबादी के पीछे अवैध घुसपैठ और सीमांत जिलों से होने वाला पलायन है। दरअसल हरिद्वार जिले के साथ यूपी के बिजनौर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, सहारनपुर जिला लगते हैं। इन जिलों में मुस्लिम आबादी बड़ी संख्या में है।

उत्तराखंड बनते ही हरिद्वार जिले में उद्योगों का जाल बिछा, जिसमें लेबर सप्लाई करने वाले ठेकेदारों ने काम की तलाश में आए यूपी के जिलों के मुस्लिमों की भर्ती बड़े पैमाने पर की। इसके अलावा गंगा और उसकी सहायक नदियों में खनन के काम में बिहार से आए मजदूर यहाँ आकर नदी किनारे बसते चले गए।

उधमपुर नगर में सबसे तेजी से बढ़ रही मुस्लिम आबादी

हरिद्वार से लेकर देहरादून, ऋषिकेश में पिछले बीस सालों में आबादी का विस्तार हुआ है। इमारतें बनाने वाले मजदूर, बढ़ई, फिटर का धंधा करने वाले कुम्भ क्षेत्र के बाहर आकर बसने लगे। नवीन आँकड़ों के मुताबिक प्रदेश में मुस्लिम समुदाय की अधिकतर आबादी देहरादून, उधमसिंहनगर और हरिद्वार में सिमटी हुई है,जो लगातार और अप्रत्याशित तेजी से बढ़ रही है।

प्रदेश में यही तीन जिले हैं जहाँ जनसंख्या बढ़ने की दशकीय वृद्धि दर प्रदेश के अन्य जिलों के मुकाबले कहीं अधिक है। इनमें भी उधमसिंह नगर में मुस्लिम आबादी बढ़ने की रफ्तार सबसे अधिक है। आँकड़ों की मानें तो उधमसिंह नगर में एक दशक में जनसंख्या वृद्धि दर प्रदेश की औसत दर से भी दो गुना अधिक है।

विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तराखंड में मुस्लिम समुदाय की जनसंख्या के तेजी से बढ़ने के पीछे सीमांत क्षेत्रों से प्रदेश में पलायन भी मुख्य वजह है। दरअसल उधमसिंह नगर से जुड़े हुए रामपुर, मुरादाबाद, बिजनौर और बरेली जिले हैं। इन जिलों से उधमसिंह नगर में मुस्लिम समुदाय का आना जाना पिछले लंबे समय से जारी है।

यूपी के इन जिलों में भी मुस्लिम आबादी पहले से ही ज्यादा है। ऐसे में रोजगार की तलाश में यूपी के इन जिलों से मुस्लिम समुदाय के लोग उधमसिंह नगर आकर बसते जा रहे हैं। आशंका है कि राजनीतिक फायदे के लिए भविष्य में इन्हें यहाँ के निवासी होने के दस्तावेज भी दिला दिए जाएँगे।

इसके अतिरिक्त, हिन्दू संगठनों का कहना है कि इन इलाकों में न केवल मुसलमानों की आबादी बढ़ रही है, बल्कि मुसलमानों से जुड़े धार्मिक स्थलों का भी अवैध रूप से विकास हुआ है, जिनकी पहचान कर जरूरी एक्शन लिया जाना चाहिए।

हाल ही में धामी सरकार के एक फैसले से स्थानीय लोग नाराज भी नजर आ रहे हैं। दरअसल, उधम सिंह नगर जिले के कई इलाकों में बंगाली समुदाय के करीब ढाई लाख से अधिक लोग निवास करते हैं।

इस समुदाय के लोग काफी समय से माँग कर रहे थे कि उनके पहचान पत्र में ‘पूर्व पाकिस्तानी’ नाम लिखे जाने के कारण उन्हें शर्मिंदा होना पड़ता है। आखिरकार गत अगस्त माह में राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए फैसल बंगाली समुदाय के लोगों को कोई भी पूर्व पाकिस्तानी नहीं कहेगा।

जाति प्रमाण पत्र पर लिखे गए ‘पूर्व पाकिस्तानी’ शब्द को अब हटा दिया जाएगा। इसका निर्णय धामी सरकार की हुई कैबिनेट बैठक में ले लिया गया है।

मुस्लिम समुदाय की बढ़ती आबादी बानी है चिंता का कारण

प्रदेश में समुदाय विशेष की बढ़ती आबादी के आँकड़ों से जो तस्वीर उभर कर सामने आई है, वह सोचने पर मजबूर कर रही है। उत्तराखंड की जनगणना के आँकड़ों पर नजर डालें तो उधमसिंह नगर जिले में मुस्लिम समुदाय की दशकीय वृद्धि दर 33.40% है।

देहरादून के लिए यह दर 32.48% और हरिद्वार में 33.16% है, जबकि प्रदेश की औसत दशकीय वृद्धि दर कुल 17% है। 2001 की जनगणना के मुताबिक प्रदेश में मुस्लिम समुदाय की दूसरी सबसे अधिक जनसंख्या उधमपुर में थी, जो करीब 2.55 लाख थी।

इनमें से उधमसिंह नगर की दशकीय मुस्लिम जनसंख्या वृद्धि डर सबसे अधिक है। आँकड़ों के मुताबिक वर्ष 2022 तक उधमसिंह नगर में करीब 7 लाख की मुस्लिम आबादी हो जाएगी। राज्य में इतनी तेजी से एक समुदाय विशेष की आबादी का बढ़ना, देवभूमि के स्वरूप को खंडित करने की साजिश की ओर इशारा करता है।

2001 की जनगणना के अनुसार उधमसिंह नगर की आबादी 12,35,614 थी, जिसमें 2,55,000 मुस्लिम थे। 2011 में जिले की आबादी 16,48,902 थी, जिसमें 22.58% यानी, 3,72,267 की मुस्लिम आबादी हो गई।

लेकिन ताज़ा आँकड़े इस ओर मजबूती से इशारा कर रहे हैं कि 2022 में जिले में समुदाय विशेष की आबादी बढ़कर 33.40% होने जा रही है। सरकारी अनुमान के अनुसार उधमसिंह नगर की आबादी 2022 में 19,12,726 हो जाएगी और इसमें मुस्लिम आबादी करीब 7 लाख हो जाने का अनुमान है।

कॉन्ग्रेस सरकार के समय में हुई अवैध मुस्लिम घुसपैठ

जानकारी के मुताबिक पिछली हरीश रावत सरकार के समय जिले में सबसे ज्यादा मुस्लिम आबादी बढ़ी थी। दावा किया जाता है कि हरीश रावत ने जिले की किच्छा सीट से चुनाव लड़ने से पहले अपने गुर्गों को वोटर लिस्ट में मुस्लिम वोट बढ़ाने के एक अभियान में लगाया था।

अक्सर आरोप लगते रहे हैं कि इस अभियान के तहत विशेष मजहब के बाहरी लोगों को आधार और राशनकार्ड उपलब्ध करवाने के अलावा वोटर लिस्ट में उनके नाम जोड़ कर उन्हें स्थानीय नागरिक बना दिया गया। हालाँकि योगी आदित्यनाथ के रैली करने से रावत का दाँव उल्टा पड़ गया और वह मुख्यमंत्री होते हुए भी विधानसभा चुनाव हार गए थे।

अगर पूरे प्रदेश की हिन्दू आबादी वृद्धि दर पर नज़र डालें तो यह 11.9% है, जबकि मुस्लिम वृद्धि दर करीब 14% है। लेकिन उधमसिंह नगर में मुस्लिम आबादी वृद्धि दर 34-35% होने की आशंका है, जो कि चिन्ताजनक वृद्धि दर कही जा सकती है।

यह वो आँकड़े हैं जो सरकारी दस्तावेजों में दर्ज हैं, जबकि जिले में अवैध रूप से रहने वाली एक बड़ी मुस्लिम आबादी दस्तावेजों में दर्ज ही नहीं है। जिले के अंदर नदियों में खनन करने वाले मजदूर और निर्माण कार्य मे जुटे हजारों मिस्त्री लेबर श्रमिक बिना किसी दस्तावेज के रह रहे हैं।

उत्तराखंड के यूपी से लगे इस सीमावर्ती जिले उधमपुर नगर में मुस्लिम आबादी तो बढ़ ही रही है, साथ ही साथ अवैध मस्जिद और मजारें भी बढ़ रही हैं। उत्तराखंड के कानून के अनुसार कोई भी मजहबी स्थल बनाने से पहले उसकी इजाजत जिलाधिकारी से लेनी जरूरी है, बावजूद इसके मुस्लिम श्रमिक बस्तियों में लगातार मस्जिद-मजार बनती जा रही हैं।

स्थानीय नहीं, बाहरी घुसपैठ बिगाड़ रहे समीकरण

सामाजिक आर्थिक विश्लेषक आदित्य गौतम के मुताबिक जनगणना 2001 के अनुसार पर्वतीय जिलों में मुस्लिम आबादी न के बराबर है और इसमें बहुत अधिक बदलाव की संभावना भी नही है। उदाहरण के लिए देहरादून में ही मुस्लिम आबादी के एक दर्जन गाँव हैं, जहाँ जनसंख्या में बहुत अधिक परिवर्तन देखने को नहीं मिल रहा है।

गढ़वाली मुस्लिम समुदाय पर शोध कर चुके गौरव मिश्रा के मुताबिक गढ़वाली मुस्लिम का रहन-सहन, खान-पान आदि यहाँ के अन्य समुदायों के समान ही हैं, इसलिए इनसे समाजिक या राजनैतिक समीकरण बिगड़ने का कोई खतरा नही है, असल समस्या सीमांत जिलों से घुसपैठ कर प्रदेश में बसने वाले मुस्लिम हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार पलायन कर बाहर से आने वाले मुस्लिम समुदाय के लोग कृषि कार्य से जुड़ने की बजाय शहरी क्षेत्रों में छिटपुट काम से जुड़ना ज्यादा पंसद करते हैं, जबकि गढ़वाली मुस्लिम अब भी खेती बाड़ी से जुड़े हुए हैं। समुदाय विशेष के ये बाहरी व्यक्ति वैल्डिंग, कारीगरी, मजदूरी आदि क्षेत्रों से जुड़े हुए हैं जो यही बस कर धीरे-धीरे जनसंख्या समीकरण को बिगाड़ रहे हैं।

हरिद्वार के ज्वालापुर क्षेत्र के भाजपा विधायक सुरेश राठौर ने अक्तूबर, 2019 में सार्वजनिक रूप से यह बयान दिया था कि हरिद्वार में गंगा किनारे 67 किमी तक मुस्लिम आबादी बढ़ती जा रही है, इसकी जाँच होनी चाहिए कि ये कौन लोग हैं जो यहाँ बस रहे हैं। हालाँकि राजनीतिक कारणों से उनके बयान को गम्भीरता से नहीं लिया गया।

आबादी के असंतुलन से राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश में कॉन्ग्रेस

उत्तराखंड में बढ़ती मुस्लिम आबादी से राजनीतिक और सामाजिक समीकरण भी गड़बड़ा रहे हैं। पहले भी हरिद्वार जिले में मुस्लिम वोटर राजनीति को प्रभावित कर चुके हैं और अब उधमसिंह नगर में भी इसका असर दिखाई देने की आशंका बढ़ गई है। जसपुर, गदपुर, किच्छा, खटीमा, काशीपुर और रुद्रपुर विधानसभा में मुस्लिम आबादी पहले ही निर्णायक भूमिका में आ गई है।

अभी तक उधमसिंह नगर में भाजपा का दबदबा रहता आया है, लेकिन इस बार कॉन्ग्रेस ने यहाँ से किसान आंदोलन की आड़ में मुस्लिम-सिख गठजोड़ को हवा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि कॉन्ग्रेस अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को साधने के लिए पंजाब की तर्ज पर उधमसिंह नगर में सिख, किसान और मुस्लिम गठजोड़ को उभार रही है।

बढ़ती मुस्लिम आबादी के चलते ही उत्तराखंड में सशक्त भू- कानून बनाने को लेकर मजबूत आवाज उठ रही है। रामपुर, मुरादाबाद से मुस्लिम यहाँ आकर तेज़ी से बस रहे हैं। जिसके चलते मुस्लिम आबादी वाले क्षेत्रों में जमीन के रेट आसमान छू रहे हैं।

राज्य में मुस्लिम आबादी का बढ़ना, भविष्य में देवभूमि के स्वरूप को खंडित करने की दीर्घकालीन साज़िश का स्पष्ट संकेत है। सनद रहे कि कॉन्ग्रेस ने पंजाब और हरियाणा में अपने शासन में ऐसे जिले बनाए, जो आज मुस्लिम बहुल हो चुके हैं। उत्तराखंड भी आज उसी मुहाने पर है, जहाँ समुदाय विशेष की बढ़ती आबादी चिंता पैदा कर रही है।



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