रवीश चिल्लाते रहे अर्थव्यवस्था बर्बाद हो गई, भारत में आया सबसे ज्यादा विदेशी निवेश

25 मई, 2021
भारत में कोरोनाकाल में 81.72 अरब डॉलर का रिकॉर्ड विदेशी निवेश आया है

कारोबारी सुगमता जैसे नीतिगत सुधारों के कारण कोरोना वायरस महामारी के बीच भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) में बड़ा उछाल देखा गया, जो कि वित्तीय वर्ष 2019-20 की तुलना में 10% अधिक है।

वाणिज्य मंत्रालय ने सोमवार (24 मई, 2021) को कहा कि देश ने वर्ष 2020-21 में कुल एफडीआई 81.72 अरब डॉलर (करीब 6 लाख करोड़ रुपए) रहा। सबसे ज्यादा 29% निवेश सिंगापुर ने किया, जिसके बाद 23% अमेरिका और 9% मॉरीशस का है।

सरकार ने एक बयान में कहा, “प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नीतिगत सुधारों, निवेश की सुविधा और व्यापार करने में आसानी के मोर्चे पर सरकार द्वारा उठाए गए उपायों के परिणामस्वरूप देश में एफडीआई प्रवाह में वृद्धि हुई है।”

इसके अलावा, सरकार ने कहा कि वित्त वर्ष 2020-21 में एफडीआई इक्विटी प्रवाह पिछले वर्ष की तुलना में 19% बढ़कर 59.64 अरब डॉलर हो गया। पिछले वर्ष यह 49.98 अरब डॉलर था।

गुजरात विदेशी निवेशकों का फिर सबसे पसंदीदा राज्य बना है। गुजरात में वर्ष 2020-21 में कुल एफडीआई का 37% निवेश हुआ।

गुजरात के बाद 27% निवेश के साथ महाराष्ट्र दूसरे स्थान पर एवं 13% के साथ कर्नाटक तीसरे स्थान पर रहा। इन राज्यों में इक्विटी के रूप में सबसे ज्यादा एफडीआई आया है।

मंत्रालय के बयान में कहा गया है कि ‘कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर’ कुल एफडीआई इक्विटी प्रवाह में लगभग 44% हिस्सेदारी के साथ शीर्ष क्षेत्र के रूप में उभरा, इसके बाद निर्माण (बुनियादी ढाँचा) 13% और सर्विस क्षेत्र 8% का स्थान रहा।

शीर्ष 10 देशों की सूची में, सऊदी अरब वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान प्रतिशत वृद्धि के मामले में सबसे बड़ा निवेशक बन गया है। सऊदी अरब ने साल-दर-साल आधार पर $89.93 मिलियन की तुलना में $ 2816.08 मिलियन का निवेश किया।

अन्य देशों में अमेरिका और ब्रिटेन शामिल हैं, जिन्होंने वित्त वर्ष 2019-20 की तुलना में वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान एफडीआई इक्विटी प्रवाह में 227% और 44% तक की वृद्धि की।

रवीश कुमार करते रहे हैं ‘अर्थव्यवस्था बर्बाद हो गई’ का प्रपंच

तथ्यों से एकदम अलग, कोरोना वायरस महामारी की शुरुआत से ही एनडीटीवी के प्रॉपगैंडा पत्रकार रवीश कुमार निरंतर ही अर्थव्यवस्था बर्बाद होने की दुहाई देते नजर आए हैं।

यह और बात है कि अपने फेसबुक पोस्ट के अलावा, रवीश कुमार के पास अपनी बात को साबित करने के लिए कोई प्रमाण, डेटा या तर्क नहीं है, लेकिन वो दिन में तीन बार यह लिखना नहीं भूलता कि अर्थव्यवस्था चौपट हो गई।

हाल ही में, 20 मई को लिखे एक फेसबुक पोस्ट में रवीश कुमार ने कहा, “पिछले साल कड़े निर्णय की सनक के कारण एक फ़ैसला हुआ था। तालाबंदी। पूरा देश ठप्प। उसी का नतीजा था कि हमारी अर्थव्यवस्था बैठ गई। थोड़ी बहुत स्थिति संभली भी तो दूसरी लहर ने लंगड़ी मार कर धक्का दे दिया है।”

सरकारी खजाने को बिना किसी प्रमाण के रिक्त बताते हुए रवीश ने लिखा, “सरकार बोलती नहीं है लेकिन उसका ख़ज़ाना ख़ाली है। आप कह सकते हैं कि अर्थव्यवस्था चौपट हो चुकी है। जो बिज़नेस में है उन्हें सच्चाई मालूम है।”

रवीश का प्रपंच सूर्य-चन्द्रमा की रौशनी से शुरू होकर पैट्रोल और डीजल के दाम पर ठहर जाता है। उन्होंने लिखा, “इसी का नतीजा है कि 4 मई से लेकर अब तक 11 वीं बार पेट्रोल डीज़ल के दाम बढ़े हैं। लोगों के पास पैसे नहीं हैं। वे दूसरी चीज़ों का उपभोग भी कम कर रहे है तो उससे भी सरकार को कम टैक्स आ रहा होगा। नौकरी फिर जाने लगी है तो उससे भी नहीं आ रहा होगा।”

उन्होंने केंद्र की दक्षिणपंथी सरकार पर निशाना साधते हुए लिखा, “थाली बजा कर और अस्पताल के बाहर सेना के बैंड से बैंड बजवा कर लोकप्रियता तो हासिल कर ली गई कि मोदी जी का इतना प्रभाव है कि एक आवाज़ में सावधान बोल दें तो देश सावधान की मुद्रा में खड़ा हो जाएगा।”

प्रॉपगैंडा पत्रकार ने लिखा, “मूर्खों ने यह नहीं बताया कि इससे अर्थव्यवस्था विश्राम की मुद्रा में आ जाएगी। जो है आपके सामने है। महामारी के साथ-साथ महँगाई भी महामारी बनती जा रही है।”

तथ्यों से परे प्रॉपगैंडा पत्रकार के साहित्यिक आँकड़े

हालाँकि, रवीश कुमार के इन झूठे एवं साहित्यिक दावों से एकदम हटकर जो वास्तविक आँकड़े हैं, वो वाणिज्य मंत्रालय ने सामने रखे हैं और वैश्विक महामारी के बीच भी भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति पर प्रकाश डालने के लिए काफ़ी हैं।



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