COVID महामारी में भारत ने कब और कैसे जीता 'वैक्सीन गेम', 40 अहम चरण से जानिए

05 जून, 2021 By: संजय राजपूत
भारत ने विश्व की बड़ी से बड़ी फार्मास्युटिकल कम्पनीज़ को वैक्सीन अभियान में पीछे छोड़ दिया

चीन के वुहान प्रांत में कोरोना वायरस संक्रमण का पहला मामला सामने आए एक साल से अधिक समय बीत चुका है। इस बीच दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी आबादी वाले देश भारत ने दुनिया में सबसे बड़ी दवा निर्माण क्षमताओं के साथ कोविड -19 टीकाकरण प्रयास में एक केंद्रीय भूमिका निभाई।

कोविड -19 से पहले भी, भारत ने दुनिया के लगभग 60% टीकों का उत्पादन किया था, वो भी अपेक्षाकृत कम लागत पर। इसलिए यह आश्चर्य की बात नहीं है कि गुजरात स्थित दो भारतीय कंपनियाँ- Zydus Cadila और पुणे का सीरम संस्थान मार्च, 2020 की शुरुआत में ही COVID-19 वैक्सीन विकास के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की सूची में थे।

वैक्सीन के विकास और उत्पादन में भारत का अनुभव पूरी दुनिया के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रबंधन और टीकाकरण के लिए महत्वपूर्ण सबक हो सकता है।

यह रिपोर्ट 9 मार्च, 2020 से शुरू भारत के कोविड-19 वैक्सीन विकास से अब तक वैक्सीन निर्माण एवं कूटनीतिक फैसलों की प्रक्रिया में 40 महत्वपूर्ण घटनाओं पर प्रकाश डालती है


वैक्सीन प्रतिस्पर्धा में भारत ने जीती रेस


चरण -1: कोविड-19 के खिलाफ वैक्सीन की दौड़ में दो भारतीय कंपनियाँ

मार्च, 2020 को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 35 वैक्सीन उम्मीदवारों को सूचीबद्ध किया, जिन्हें कोविड -19 से बचाने के लिए वैक्सीन तैयार करने की इजाज़त दी जानी थी। ‘ड्राफ्ट लैंडस्केप’ में दो भारतीय कंपनियाँ- गुजरात स्थित ज़ायडस कैडिला और पुणे की सीरम इंस्टीट्यूट शामिल थीं, जो इस परियोजना में अमरीकी बायोटेक कंपनी कोडाजेनिक्स की भागीदार है।

जायडस ने 2019-nCoV वैक्सीन विकसित करने के लिए भारत और यूरोप में कई टीमों के साथ एक त्वरित अनुसंधान कार्यक्रम की घोषणा की।

चरण-2: सीग़ल बायोसॉल्यूशन को कोविड वैक्सीन के लिये पहली सरकारी फंडिंग

केंद्रीय विज्ञान मंत्रालय ने पुणे स्थित एक फर्म ‘सीगल बायोसॉल्युशन’ को कोविड -19 के लिए वैक्सीन विकसित करने के लिए धनराशि देने की घोषणा की।

सीग़ल बायोसॉल्युशन (Seagull Biosolutions) पहली कंपनी थी, जिसे सरकार से वित्तीय समर्थन मिलने की घोषणा हुई। ये फर्म घर पर एसिम्पटमेटिक लक्षणों का पता लगाने के लिए एक टेस्ट किट भी तैयार कर रही थी।

चरण -3: ICMR, भारत बायोटेक ने भारतीय कोविड-19 वैक्सीन के लिए समझौता किया

इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च (ICMR) ने कोविड-19 वैक्सीन विकसित करने के लिए हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक इंटरनेशनल लिमिटेड (BBIL) के साथ एक शोध में सहयोग करने की घोषणा की।

समझौते के तहत, फ्लूजेन अपनी मौजूदा वैक्सीन निर्माण प्रक्रियाओं को भारत बायोटेक को हस्तांतरित करेगा, ताकि कंपनी को उत्पादन बढ़ाने और क्लीनिकल टेस्ट के लिए वैक्सीन का उत्पादन करने में सक्षम बनाया जा सके।

समझौते की घोषणा करते हुए भारत बायोटेक कंपनी के बिजनेस डेवलपमेंट प्रमुख राचेस एला ने तब कहा था, “भारत बायोटेक वैक्सीन का निर्माण करेगा, क्लिनिकल करेगा और वैश्विक वितरण के लिए वैक्सीन की लगभग 300 मिलियन खुराक का उत्पादन करने की तैयारी करेगा।

चरण-4: SII द्वारा मरीजों पर COVID-19 वैक्सीन के तीसरे चरण के परीक्षण की शुरुआत

कोविड वैक्सीन के तीसरे क्लिनिकल परीक्षण के तहत कोरोना संदिग्धों, पॉजिटिव लक्षण वाले और पॉजिटिव एसिम्प्टोमैटिक के मरीजों को टीका लगाने का काम शुरू किया गया।

पुणे स्थित फर्म ने खुलासा किया कि कोविड वैक्सीन की अंतिम मंजूरी के लिए जाने से पहले बहुत सारे साँख्यिकीय डेटा एकत्र करने की आवश्यकता होती है। यदि वैक्सीन के क्लिनिकल परीक्षण सफल होते हैं तो अक्टूबर तक COVID वैक्सीन बाजार में आ जाएगी।

इससे पहले, सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) ने ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय द्वारा विकसित किए जा रहे COVID-19 वैक्सीन के उत्पादन पर काम शुरू करने की घोषणा की थी, लेकिन प्रायोगिक परीक्षणों में टीके की सफलता का प्रतिशत के 50% ही पाया गया।

यह वैक्सीन ऑक्सफोर्ड का जेनर संस्थान और एक दवा कंपनी एस्ट्राजेनेका पीएलसी मिलकर विकसित कर रहे थे, जो इतिहास में किसी भी अन्य वैक्सीन विकास कार्यक्रम की तुलना में सबसे तेज था।

चरण-5: भारत सीरम्स एंड वैक्सीन्स लिमिटेड को COVID से लड़ने के लिए यूलिनस्टैटिन के इस्तेमाल की मंजूरी मिली

भारतीय दवा निर्माताओ को एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम से पीड़ित कोरोना वायरस रोगियों के संभावित इलाज के लिए यूलिनस्टैटिन के उपयोग के लिए तीसरे चरण के परीक्षण करने के लिए ड्रग रेगुलेटर्स से मंजूरी मिली।

यूलिनस्टैटिन (Ulinastatin) एक ड्रग बेस्ड दवाई होती है, जिसे पारंपरिक रूप से गंभीर श्वसन सम्बंधित बीमारियों के उपचार के लिए उपयोग किया जाता है।

चरण-6: भारत में शुरू हुआ COVID-19 वैक्सीन के लिए मानव परीक्षण

जुलाई, 2020 में ICMR ने 1,000 स्वयंसेवको पर देश में विकसित दो कोविड वैक्सीन का मानव ​​​​परीक्षण शुरू किया।

पहली वैक्सीन भारत बायोटेक इंटरनेशनल लिमिटेड ने भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के सहयोग से तैयार की थी तथा दूसरी Zydas Cadila Healthcare Ltd ने। ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने दोनों वैक्सीन के मानव परीक्षण के पहले और दूसरे चरण की अनुमति दी थी।

चरण-7: स्वदेशी कोवैक्सिन का मानव परीक्षण शुरू

ICMR, भारत बायोटेक और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी, पुणे द्वारा निर्मित भारत के पहले स्वदेशी टीके कोवैक्सिन का PGI रोहतक में मानव परीक्षण शुरू कर दिया।

चरण-8: भारत की पहली कोवैक्सिन के ट्रायल का कोई साइड इफेक्ट नहीं मिला

PGI रोहतक में हुए मानव परीक्षण की शुरुआती रिपोर्ट में कोवैक्सिन का कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पाया गया। वैक्सिनेशन के बाद वॉलंटियर्स के ब्लड सैम्पल इकट्ठा कर के ये जाँच की गई कि वैक्सीन लगने के बाद विकसित होने वाली एंटीबॉडी के स्तर के संदर्भ में वैक्सीन कितनी प्रभावी रही। सुरक्षा की अवधि का आँकलन करने के लिए वॉलंटियर्स के ब्लड सैम्पल भी अलग-अलग 28, 42, 104, 194 दिनों पर एकत्र किए गए।

चरण-9: हैदराबाद स्थित फर्म ने COVID Vaccine का मानव परीक्षण शुरू किया

हैदराबाद स्थित फर्म ‘बायोलॉजिकल ई लिमिटेड’ ने वैक्सीन के पहले और दूसरे चरण के मानव परीक्षण शुरू किए। भारत के ड्रग कंट्रोलर जनरल की अनुमति के बाद ह्यूस्टन, टेक्सास में बायलर कॉलेज ऑफ़ मेडिसिन और यूएस-आधारित डायनावैक्स टेक्नोलॉजीज कॉर्प के साथ ये परीक्षण किये गए।

चरण-10: लैंसेट अध्ययन में कोवैक्सिन सुरक्षित पाई गई

प्रतिष्ठित चिकित्सा पत्रिका लैंसेट के अध्ययन में बताया गया कि 375 वॉलंटियर्स के साथ हुए पहले चरण के परीक्षण से मिले डेटा से पता चला कि कोवैक्सिन कोरोना वायरस के खिलाफ मजबूत एंटीबॉडी बनाता है जो संक्रमण के असर को कम करती है।

चरण- 11: भारत में 7 और COVID-19 टीके विकसित करने का काम शुरू

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने जानकारी देते हुए बताया भारत की विभिन्न संस्थाएँ 7 और कोरोना टीके विकसित कर रही है। उन्होंने बताया कि तीन टीके अभी ट्रायल में हैं, दो पूर्व-नैदानिक ​​​​चरण में हैं, एक फेज-1 में है एक फेज -2 में है।

साथ ही, स्वास्थ्य मंत्री ने 50 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के लिए COVID-19 टीकाकरण प्रक्रिया अगले महीने मार्च 21 से शुरू करने की बात भी कही।

चरण-12: भारत में पहली बार एक दिन में 10 लाख से अधिक लोगों को टीका लगाया

भारत में 16 जनवरी को अभियान शुरू करने के बाद से 3 मार्च तक 1.77 करोड़ लोगों का टीकाकरण किया गया। इस टीकाकरण अभियान में फ़्रंट लाइन वर्कर्स से लेकर 45 से 60 वर्ष आयु के लोगों का टीकाकरण किया गया।

16 जनवरी से शुरू हुई इस कोरोना टीकाकरण की प्रक्रिया में मार्च में भारत मे एक ही दिन में एक लाख से अधिक लोगों को COVID-19 की वैक्सीन लगाई गई। मार्च को शाम सात बजे तक करीब 10.93 लाख लोगों को वैक्सीन दी गई।

भारत ने 16 जनवरी, 2021 को अपना टीकाकरण कार्यक्रम शुरू किया, जिसमें शुरुआत में 3,006 टीकाकरण केंद्रों से संचालन किया गया


चरण -13: अन्य देशों की मदद के लिए भारत मे कोविड-19 टीके बनाने की योजना

इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में देशों की मदद के लिए ‘क्वाड इनिशिएटिव’ के तहत ‘जॉनसन एंड जॉनसन’ (J&J) की सिंगल-डोज़ कोविड-19 वैक्सीन बनाने की जानकारी सामने आई।

पहली ‘क्वाड वैक्सीन’ की पहल के रूप में भारत को संयुक्त राज्य अमेरिका स्थित फार्मास्युटिकल दिग्गज जॉनसन एंड जॉनसन (J&J) द्वारा विकसित एकल-खुराक COVID-19 वैक्सीन का निर्माण करना था।

इस पूरी परियोजना को जापान और अमेरिका द्वारा वित्तीय सहायता की गई। इस परियोजना के तहत ऑस्ट्रेलिया ने ‘मेड इन इंडिया’ टीकों को दक्षिण पूर्व एशिया और प्रशांत देशों में भेजने के लिए अपना बुकमार्क लगाने की अनुमति थी।

इस पूरी पहल में भारत की भूमिका एक भरोसेमंद और विश्वसनीय निर्माता और गुणवत्ता वाले टीकों के आपूर्तिकर्ता देश के रूप में बनी।

चरण-14: इंडियन ऑयल ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका

इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOC) जम्मू और कश्मीर, तमिलनाडु, बिहार और मणिपुर में कोल्ड चेन उपकरण (बुनियादी ढाँचे) परिवहन में मदद करके देश में चल रहे टीकाकरण अभियान में मदद की।

इंडियन ऑयल ने वैक्सीन के भंडारण और परिवहन में मदद की


भारत का सबसे बड़ा ईंधन विक्रेता IOC आइस-लाइन रेफ्रिजरेटर (ILR), डीप फ्रीजर (DF), वॉक-इन-कूलर (WIC), वॉक-इन-फ्रीज़र (WIF) और रेफ्रिजेरेटेड ट्रक (RT) जैसे कोल्ड चेन उपकरणों को खरीद कर टीकों के भंडारण और परिवहन में मदद करता रहा।

चरण-15: ‘Covovax’ का परीक्षण शुरू

पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के सीईओ अदार पूनावाला ने कहा कि ‘ Novavax’ द्वारा विकसित एक कोविड-19 वैक्सीन ‘कोवोवैक्स’ का परीक्षण भारत में शुरू हो गया है। उन्होंने कहा उम्मीद है कि इस साल सितंबर तक वैक्सीन लॉन्च हो जाएगी।

वैक्सीन को ‘नोवावैक्स’ और ‘सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया’ के साथ साझेदारी के माध्यम से बनाया गया है। अफ्रीकी और यूके वेरिएंट के खिलाफ परीक्षण में कोवोवैक्स की प्रभावकारिता 89% रही।

चरण -16: Covaxin को 2-18 साल के बच्चों पर अगले चरण के परीक्षण की मंजूरी

बायोलॉजिकल ई कंपनी ने भारत में अपने कोविड-19 सब-यूनिट वैक्सीन के पहले और दूसरे चरण के क्लिनिकल टेस्ट को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया, जिसके बाद इसे तीसरे चरण का क्लिनिकल टेस्ट शुरू करने के लिए आधिकारिक रूप से मंजूरी भी मिल गई।

चरण-17: बायोलॉजिकल ई की कोविड वैक्सीन के तीसरे चरण का क्लिनिकल टेस्ट शुरू

सेंट्रल ड्रग स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन की कोविड विशेषज्ञ समिति (एसईसी) ने हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक द्वारा सुरक्षा, प्रतिक्रियात्मकता और इम्यूनोजेनेसिटी का मूल्यांकन के लिए 2 से 18 वर्ष तक की आयु के बच्चो में पर वैक्सीन के दूसरे औऱ तीसरे चरण की मंजूरी दे दी।

देश में कोविड वायरस की संभावित तीसरी लहर में बच्चों पर जोखिम होने की संभावना अधिक है। विशेषज्ञों के अनुसार, वायरस की पहली लहर ने जहाँ बुजुर्गों पर हमला किया, वहीं दूसरी लहर में युवा सर्वाधिक प्रभावित हुए इसलिए तीसरी लहर बच्चों के लिए खतरनाक हो सकती है।

चरण- 18: कोवैक्सिन को 2-18 साल के बच्चों पर अगले चरण के परीक्षण की मंजूरी मिली

ड्रग कंट्रोल जनरल ऑफ इंडिया ने सब्जेक्ट एक्सपर्ट कमेटी के की सिफारिश को स्वीकार करते हुए भारत बायोटेक लिमिटेड को 18 वर्ष तक आयु वर्ग तक के लोगों पर Covaxin के दूसरे और तीसरे चरण के परीक्षण की मंजूरी दे दी। परीक्षण के दौरान पहली खुराक 0 दिन और दूसरी 28 दिन पर दी जानी है।

चरण-19: Zydus Cadila की स्वदेशी कोविड वैक्सीन जल्द होगी बाजारों में

अहमदाबाद स्थित फार्मास्युटिकल फर्म Zydus Cadila द्वारा निर्मित कोविड वैक्सीन ZyCoV-D की जून में आपूर्ति शुरू करने की संभावना बनी।

भारत बायोटेक के कोवैक्सिन के बाद, ZyCoV-D कोरोना वायरस के खिलाफ देश का दूसरा स्वदेशी रूप विकसित टीका है।

कम्पनी एक साल में ZyCoV-D की 24 करोड़ खुराक बनाने की योजना पर काम कर रही है। DCGI से मंजूरी मिलने के तुरंत बाद वैक्सीन के बाजार में आने की संभावना है।

चरण-20: कोवैक्सिन के आपातकालीन उपयोग के लिए WHO में आवेदन

भारत बायोटेक लिमिटेड ने कोवैक्सिन की आपातकालीन उपयोग सूची के लिए WHO में आवेदन करते हुए दस्तावेज जमा करवाए। मई-जून में होने वाली प्री-सबमिशन मीटिंग में पास होने के बाद इसे दो और चरणों से गुजरना होगा।

इस प्रक्रिया में, भारत बायोटेक इंटरनेशनल लिमिटेड (बीबीआईएल) ने सरकार को अवगत कराया है कि उसने कोवैक्सिन वैक्सीन के लिए आपातकालीन उपयोग सूची प्राप्त करने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन को 90% दस्तावेज जमा किए हैं।

चरण-21: डायाडिक ने भारत में कोविड वैक्सीन के निर्माण की घोषणा की

वैश्विक जैव प्रौद्योगिकी कंपनी ‘डायडिक इंटरनेशनल’ ने भारत में सिनजीन इंटरनेशनल के सहयोग से कोविड -19 वैक्सीन विकसित करने की घोषणा की।

चरण-22: भारत बायोटेक का एम्स पटना और दिल्ली में COVID Vaccine के तीसरा डोज का ट्रायल शुरू

भारत बायोटेक को ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) के विशेषज्ञ पैनल से अप्रैल माह में अपनी कोवैक्सिन की तीसरी बूस्टर खुराक के लिए क्लिनिकल टेस्ट करने की अनुमति मिल गई।

कोवैक्सिन बनाने वाली कंपनी भारत बायोटेक ने 24 मई से एम्स पटना और दिल्ली में बूस्टर डोज का ट्रायल शुरू कर दिया। बूस्टर खुराक परीक्षण में वैक्सीन की तीसरी खुराक वॉलंटियर्स को सितंबर और अक्टूबर 2020 के बीच दूसरी लेने के छह महीने बाद दी गई।


वैक्सीन प्रोडक्शन


चरण -23: सितंबर-अक्टूबर माह तक 20-40 मिलियन डोज का लक्ष्य

पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट, जिसे निमोनिया और डेंगू मोनोक्लोनल टीके जैसी अफोर्डेबल और नवीन चिकित्सा का श्रेय दिया जाता है, भारत में प्रस्तावित कोविड वैक्सीन की वैश्विक कीमत लगभग 1,000 रुपए प्रति खुराक रखने की योजना का खुलासा किया।

वैक्सीन वितरण में भारत के लोगों को प्राथमिकता दी जाएगी और ये फ्री भी हो सकती है। सीरम इंस्टीट्यूट के सीईओ और प्रमोटर अदार पूनावाला ने बताया कि हम सितंबर-अक्टूबर तक इसे 20-40 मिलियन खुराक तक बनाने की सोच रहे हैं और सफल होने पर, हम भारत सहित अधिक से अधिक देशों में उत्पाद उपलब्ध कराएँगे।

सीरम वैश्विक निर्माताओं में से एक है जिसने 23 अप्रैल को ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के नेतृत्व में वैश्विक स्तर की परियोजना के तहत मानव ​​परीक्षण शुरू करने की घोषणा की थी।

मात्रा के हिसाब से दुनिया के सबसे बड़े वैक्सीन निर्माताओं में से एक पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) ने परीक्षण और वैक्सीन विकास को गति देने के लिए ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के साथ भागीदारी की है।

चरण-24: आपूर्ति के लिए मैन्युफैक्चरिंग क्षमता का विस्तार करेगा भारत बायोटेक

एंटी-कोरोना वायरस शॉट का निर्माण वर्तमान में भारत बायोटेक के हैदराबाद स्थित प्लांट में किया जा रहा है। कंपनी ने जल्द ही कर्नाटक के मलूर कोलार जिले में एक नई उत्पादन इकाई बनाएगी।

आधिकारिक तौर पर लॉन्च होने के तुरंत बाद मलूर कोलार संयंत्र में उत्पादन शुरू हो जाएगा औऱ जुलाई के अंत तक संयंत्र की निर्माण क्षमता पाँच गुना बढ़ाई जाएगी।

हैदराबाद में मौजूदा निर्माण क्षमता को बढ़ा कर दोगुना किए जाने की जानकारी भी दी गई।अपने हैदराबाद संयंत्र में कोवैक्सिन की 40 लाख खुराक प्रति माह उत्पादन हो रहा है।

चरण-25: विरचो बायोटेक भारत में स्पूतनिक-वी वैक्सीन का उत्पादन करेगा

रूसी प्रत्यक्ष निवेश कोष (आरडीआईएफ) और हैदराबाद स्थित विरचो बायोटेक ने भारत में स्पूतनिक-वी वैक्सीन की 200 मिलियन खुराक तक उत्पादन करने के लिए एक समझौते की घोषणा की। स्पूतनिक-वी की प्रभावकारिता 91.6% है।

चरण-26: भारत बायोटेक-SII ने वैक्सीन उत्पादन में तेजी लाने के लिए 100 करोड़ की माँग की है

भारत बायोटेक ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर ‘कोवैक्सिन’ के उत्पादन में तेजी लाने के लिए 100 करोड़ की धनराशि माँगी है। सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने भी मौखिक रूप से सरकार की कोविड सुरक्षा योजना से अपना उत्पादन बढ़ाने के लिए धन का अनुरोध किया है।

भारत वर्तमान में दो टीकों का उपयोग कर रहा है- कोविशील्ड, जो सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा निर्मित है और कोवैक्सिन, जिसे भारत बायोटेक द्वारा निर्मित किया जा रहा है।

चरण-27: पैनासिया बायोटेक प्रतिवर्ष बनाएगी स्पूतनिक वी की 100M खुराक

पैनासिया बायोटेक लिमिटेड (Panacea Biotec Ltd) ने प्रति वर्ष स्पूतनिक वी वैक्सीन की 100 मिलियन खुराक के निर्माण के लिए रूसी प्रत्यक्ष निवेश कोष (RDIF) के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए जाने की जानकारी दी।

स्पूतनिक वी वैक्सीन भारत में उपलब्ध होने वाली हाइली इफेक्टिव वैक्सीन में से एक है। पैनासिया बायोटेक भारत में पहला अनुभवी वैक्सीन निर्माता है जिसके साथ आरडीआईएफ का वैक्सीन निर्माण समझौता हुआ है।

चरण-28: सितंबर तक कोवैक्सिन का उत्पादन बढ़ाकर 10 गुना बढ़ाने का लक्ष्य

केंद्र सरकार ने आने वाले महीनों में कोवैक्सिन की उत्पादन क्षमता में कई गुना वृद्धि करते हुए सितंबर, 2021 तक 10 मिलियन खुराक से बढाकर 100 मिलियन खुराक तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा है।

चरण-29: वैक्सिन निर्माता कम्पनियों को उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकारी अनुदान

केंद्र सरकार ने कोवैक्सिन निर्माता भारत बायोटेक को 65 करोड़ रुपए का अनुदान प्रदान किया। सरकार को उम्मीद है कि सितंबर तक कोवैक्सिन का उत्पादन 1 करोड़ से 10 करोड़ खुराक तक पहुँच जाएगा।

भारत बायोटेक के अलावा केंद्र सरकार ने महाराष्ट्र की दवा कंपनी हैफकिन बायोफार्मास्युटिकल कॉर्पोरेशन लिमिटेड, हैदराबाद स्थित कंपनी इंडियन इम्यूनोलॉजिकल लिमिटेड और भारत इम्यूनोलॉजिकल एंड बायोलॉजिकल लिमिटेड, बुलंदशहर को भी उनकी उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए अनुदान दिया।

दवा कंपनी हैफ़किन (Haffkine)छह महीने के भीतर प्रति माह 20 मिलियन खुराक का उत्पादन करेगी जबकि इंडियन इम्यूनोलॉजिकल्स लिमिटेड एंड बायोलॉजिकल्स लिमिटेड बुलंदशहर अगस्त-सितंबर 2021 तक प्रति माह 10-15 मिलियन का उत्पादन करेगी

चरण-30: सीरम इंस्टीट्यूट, भारत बायोटेक को ₹4,500 करोड़ के क्रेडिट को मंजूरी

वित्त मंत्रालय ने कोविड -19 वैक्सीन निर्माताओं भारत बायोटेक और सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया को वैक्सीन उत्पादन बढ़ाने के लिए आपूर्ति ऋण को मंजूरी देने के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दे दी।

मंत्रालय ने SII के लिए ₹3,000 करोड़ और भारत बायोटेक के लिए ₹1,500 करोड़ के ऋण को मंजूरी दी है।

चरण 31: सरकार ने SII और भारत बायोटेक को ₹4,500 करोड़ क्रेडिट को मंजूरी दी

वित्त मंत्रालय न कोविड -19 वैक्सीन निर्माताओं भारत बायोटेक और सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया को उत्पादन में तेजी लाने के लिए आपूर्ति ऋण की सैद्धांतिक मंजूरी दे दी। मंत्रालय ने SII के लिए ₹3,000 करोड़ और भारत बायोटेक के लिए ₹1,500 करोड़ के ऋण को मंजूरी दी।

चरण-32: भारत के पास जून तक 20 करोड़ टीके होने की संभावना

भारत बायोटेक ने कहा कि वह उत्पादन बढ़ाकर 700 मिलियन कोविड -19 शीशियों के निर्माण के साथ 60 देशों को वैक्सीन निर्यात करने की योजना बना रही है। कम्पनी ने अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिए प्रति शीशी 15-20 डॉलर की कीमत रखी।

SII और भारत बायोटेक से उत्पादन में वृद्धि और स्पूतनिक के आयात को ध्यान में रखते हुए जून तक भारत में खुराक की आपूर्ति 200 मिलियन तक बढ़ने की उम्मीद जगी, वर्तमान में यह 70 मिलियन है।

चरण-33: भारत बायोटेक ने अपनी विनिर्माण क्षमता का विस्तार किया

भारत बायोटेक ने सालाना कोवैक्सिन की 700 मिलियन खुराक का उत्पादन करने के लिए हैदराबाद और बेंगलुरु में कई सुविधाओं में अपनी विनिर्माण क्षमता का विस्तार किया।

कंपनी ने कहा कि वह विशेष रूप से डिजाइन की गई नई बीएसएल-3 सुविधाओं की उपलब्धता के कारण कम समय में कोवैक्सिन की विनिर्माण क्षमता का विस्तार करने में सक्षम है। भारत बायोटेक जुलाई तक सरकार को 150 रुपए प्रति खुराक की पूर्व-सहमत दर पर 90 मिलियन खुराक की आपूर्ति करेगी।

चरण-34: भारत में स्पूतनिक वी की प्रति वर्ष 850 मिलियन खुराक का उत्पादन लक्ष्य

भारत में स्पूतनिक वी वैक्सीन के पहले बैच की डिलीवरी पर खुशी व्यक्त करते हुए रूसी दूत निकोले कुदाशेव ने कहा कि स्थानीय उत्पादन जल्द ही शुरू होने वाला है और इसे धीरे-धीरे बढ़ाकर प्रति वर्ष 850 मिलियन खुराक तक करने की योजना है।

चरण-35: बुलंदशहर प्लांट में बनेगी हर महीने कोवैक्सिन की 2 करोड़ खुराक

कोविड -19 के लिए केंद्र ने भारत इम्यूनोलॉजिकल एंड बायोलॉजिकल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BIBCOL) के बुलंदशहर संयंत्र में कोवैक्सिन के उत्पादन को मंजूरी दे दी। यह हर महीने कोवैक्सिन की 2 करोड़ डोज का निर्माण करेगी।

कोवैक्सिन निर्माता भारत बायोटेक और बिबकोल ने बुलंदशहर संयंत्र में वैक्सीन के उत्पादन के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। स्वास्थ्य मंत्रालय कोवैक्सिन के उत्पादन के लिए 30 करोड़ रुपए की वित्तीय सहायता प्रदान करेगा।

पोलियो वैक्सीन बनाने वाली कंपनी बिबकोल (BIBCOL) सरकार का एक सार्वजनिक उपक्रम है। इसकी स्थापना 1989 में बुलंदशहर में हुई थी।

चरण-36: वॉकहार्ट ने की एक साल में 2 अरब कोविड वैक्सीन खुराक बनाने की पेशकश

भारतीय दवा कंपनी वॉकहार्ट ने सरकार से कहा कि वह फरवरी, 2022 तक अधिकांश कोविड -19 टीकों की एक वर्ष में दो बिलियन खुराक का उत्पादन कर सकती है।

मुंवॉकहार्ट ने सरकार से कहा है कि उसके पास एक विविध पोर्टफोलियो बनाने के लिए विनिर्माण और अनुसंधान क्षमता है जो इसे mRNA, प्रोटीन-आधारित और वायरल वेक्टर-आधारित टीकों के उत्पादन और आपूर्ति करने की क्षमता प्रदान करता है। सरकार कंपनी की पेशकश की जाँच कर रही है।

चरण-37: कोवैक्सिन बनाने के लिए भारत बायोटेक गुजरात की इकाई में काम शुरू

कोवैक्सिन निर्माता भारत बायोटेक ने कहा कि वह गुजरात के अंकलेश्वर में अपनी Chiron Behring Vaccines इकाई में वैक्सीन का उत्पादन शुरू करने जा रही है, जिससे प्रति वर्ष 200 मिलियन वैक्सीन खुराक का उत्पादन होगा। खुराक 2021 के अक्टूबर-दिसंबर के मध्य उपलब्ध हो जाएगी।

चरण-38: शिल्पा मेडिकेयर का स्पूतनिक वी उत्पादन के लिए डॉ रेड्डीज के साथ समझौता

शिल्पा मेडिकेयर लिमिटेड ने स्पूतनिक वी वैक्सीन के उत्पादन के लिए डॉ रेड्डीज लैबोरेटरीज लिमिटेड के साथ करार किया। कंपनी ने घोषणा की कि उसकी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी शिल्पा बायोलॉजिकल ने कर्नाटक के धारवाड़ में अपने एकीकृत बायोलॉजिक्स आरएंडडी सह निर्माण केंद्र से स्पूतनिक वी वैक्सीन के उत्पादन-आपूर्ति के लिए डॉ रेड्डीज के साथ 3 साल का निश्चित समझौता किया है। पहले 12 महीनों के लिए दोहरे वेक्टर स्पुतनिक वी का लक्षित उत्पादन 50 मिलियन खुराक है।

चरण-39: वैक्सीन पासपोर्ट का विरोध

भारत ने आज ही स्वास्थ्य मंत्रियों की G7 बैठक में कोरोना वायरस ‘वैक्सीन पासपोर्ट’ पर गंभीर चिंता और अपनी नाराजगी व्यक्त की। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने इसे ‘भेदभावपूर्ण’ करार देते हुए कहा कि यह विकासशील देशों में रहने वाले लोगों के लिए नुकसानदेह होगा।

दरअसल, कोरोना महामारी को देखेत हुए कई देशों ने वैक्सीन पासपोर्ट (Vaccine Passport) का प्रस्ताव रखा है। भारत सरकार ने प्रस्तावित वैक्सीन पासपोर्ट के मुद्दे का विरोध किया है।

सात विकसित देशों की इस बैठक में भारत को इस वर्ष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया था। बैठक में डॉ हर्षवर्धन ने विकासशील देशों में टीकों की उपलब्धता और टीकाकरण की कम दरों के बारे में चिंता व्यक्त की।

चरण-40: सीरम इंस्टीट्यूट को स्पूतनिक वी वैक्सीन बनाने की प्रारंभिक मंजूरी

अदार पूनावाला के सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया को राष्ट्रीय दवा नियामक संस्था से रूसी COVID-19 वैक्सीन, स्पूतनिक-वी बनाने की अनुमति मिल गई है। पूनावाला की कंपनी अपने पुणे संयंत्र में वैक्सीन का परीक्षण, विश्लेषण और फिर निर्माण करेगी।

सीरम संस्थान को दिए गए परीक्षण लाइसेंस का मतलब है कि यह परीक्षण के लिए उत्पाद का विकास और निर्माण कर सकता है, लेकिन इसे बेच नहीं सकता।

सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) के प्रवक्ता ने कहा कि हमें स्पूतनिक वी के लिए प्रारंभिक मंजूरी मिल गई है। लेकिन वास्तविक निर्माण में कई महीने लगेंगे। उन्होंने कहा कि इस बीच, हमारा ध्यान कोविशील्ड और कोवोवैक्स पर रहेगा।



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