व्यंग्य: भारत-पाक मैच पर प्रातः स्मरणीय अजीत भारती का रोस्ट

25 अक्टूबर, 2021 By: अजीत भारती
भारत-पाक मैच पर प्रातः स्मरणीय अजीत भारती जी का व्यंग्य

“बैठता हूँ तो दर्द उठता है
दर्द उठता है बैठ जाता हूँ”

जज्बात बदल दिए, हालात बदल दिए… हजार लानतें उन दस गेंदों को जो दस विकेट नहीं ले पाईं। यूँ तो पटाखे प्रतिबंधित हैं लेकिन भारत के कई हिस्सों में पाकिस्तान की जीत पर जम कर पटाखेबाजी हुई।

पटाखेबाजी से आहत हुए विराट कोहली ने पोस्ट मैच कॉन्फ्रेंस में कहा, “कैंचो! इसी पटाखों को प्रदूषण से बचने के लिए मैं शुरु से अंत तक खेलता रहा, हारा भी, लेकिन इस देश के पागल लोग हमारे हारने पर भी पटाखे चलाते हैं। हद है!”

Ajeet Bharti Roasts Virat Kohli | India Vs Pakistan Match Satire | भारत-पाक मैच रोस्ट

वहीं इरफान पठान पाकिस्तान की इनिंग के दौरान काफी चर्चा में रहे जब उन्होंने यह कहा कि मैदान में शबनम गिरी है। यह सुन कर हार्दिक पांड्या अपना कंधा सेट करवा कर बाउंड्री के पास जा कर देखते रहे कि शबनम कहाँ है। किसी ने बताया कि इरफान भाई ओस के बारे में बोल रहे थे।

पांड्या की तो हालत ऐसी थी कि वो यह भी नहीं कह पा रहा था कि ‘मैं कर के आया’ क्योंकि वो कुछ भी कर के नहीं आया। खैर, कर के तो वरुण चक्रवर्ती भी नहीं आया, जो पहली ही गेंद पर बता चुका था कि मिस्ट्री स्पिनर होने की असली मिस्ट्री यह है कि उससे फील्डिंग नहीं होती।

रवीश कुमार ने इस मैच को अपने नजरिए से देखा और कहा कि मोदी पहले पीएम बने जिसके राज में भारत वर्ल्ड कप में पाकिस्तान से हार पाई। फिर भी वह खुश इस बात से थे कि अल्पसंख्यकों की एक टीम को भारत के जहरीले हिन्दू-मुसलमान वाले नशा करने वाली भीड़ के चुटकुलों से कुछ हद तक मुक्ति मिली।

उन्होंने कहा कि अब वो पाकिस्तानी की रचनात्मकता देखना चाहेंगे जिसमें वो मौका-मौका के अश्लील विज्ञापन का मुँहतोड़ जवाब देंगे। रवीश जी ने कहा है कि पाकिस्तान जीतने के बाद भी जिस ग्रेस से, जिस विनम्रता से मैदान में पेश आ रहा था, वह बताता है कि भारतीय हिन्दू सवर्णों को उनसे कितना सीखने की आवश्यकता है।

ट्विटर पर अलग ही माहौल बना हुआ था जबसे भारतीय टीम ने अमेरिका के अश्वेतों के लिए घुटने टेक कर अंतरराष्ट्रीय और वोक स्टाइल में समर्थन जताया। भारतीय टीम ने भारत में हिन्दुओं की हो रही हत्याओं पर घुटने नहीं टेके, काली पट्टी नहीं बाँधी। बंगाल में काटे गए हिन्दुओं के लिए मौन नहीं रखा। कश्मीर में मारे जा रहे बाहरी हिन्दुओं के लिए घुटने मिट्टी को नहीं छुआए। बांग्लादेश में हो रहे मानवाधिकारों की हत्या, हिन्दुओं के घर जलाने पर उनके लिए नहीं बोला। लेकिन हाँ, दो साल पहले के एक वोक आंदोलन पर, जिसका दूर-दूर तक भारत से कोई संबंध नहीं, उसके लिए जब वह पूरी दुनिया की चर्चा से हट चुका है, फोटो खिंचाया। फिर तो यही रिजल्ट आएगा।

या तो आप बिलकुल भी पॉलिटिकल मत रहो, या फिर उचित समय पर बोलो। कप्तान ही जब वोक हो चुका हो, जिसे दीवाली पर पटाखों से समस्या होती हो, पिंटरेस्ट पर प्रमोशन के लिए कुछ भी बोलता रहता हो, वो आखिर ऐसे ही क्यूटियापों से तो लीड करेगा।

वैसे भी ट्विटर के बायो में वो बस एक पिता और पति है, न वो भारतीय क्रिकेटर है, न कप्तान… हम लोग ही ज्यादा लोड ले लिया करते हैं मैचों में। रवि शास्त्री को ही देख लीजिए, पूरे मैच के दौरान लग रहा था कि ड्राय स्टेट बिहार का कोई आदमी अचानक दुबई पहुँच गया है और उसके बाद उसका स्वयं पर से नियंत्रण गायब है।

एक व्यक्ति ने पूछा है कि कोहली जी, वो सब तो ठीक है, ये बताइए कि दीपक जला लें घर में, आर्कटिक की बरफ तो नहीं पिघलेगी? एक ने सुझाव दिया कि विराट कोहली अगर ‘मान्यवर मोहे’ के कुर्ते पहन कर मैदान में जाते तो दो-तीन पाकिस्तानी खिलाड़ी तो उन्हें देख कर आहें भरते हुए ही हिट विकेट हो जाते।

लोग काफी क्रोध में थे। ज्यादा क्रोध में वैसे लोग थे जिन्होंने लाइट कटने पर जेनरेटर का कनेक्शन ले रखा था और दो दिन पहले ही दोस्तों को इकट्ठा कर लिया था कि मैच जीतने की खुशी में पार्टी होगी। पार्टी तो पाकिस्तान की बैटिंग के दस ओवर तक होती रही, फिर चला विश्लेषण का दौर। एक आदमी सुरापान करने के बाद इस बात पर अटक गया कि इरफान पठान से कमेंट्री क्यों करवाई जा रही है, वही है हार का कारण।

काफी मंथन के बाद किसी ने बताया कि कोहली को लगा ये प्रैक्टिस मैच है तभी तो मैच हारने के बाद कोहली अत्यंत प्रसन्न थे कि चलो ये मैच तो हार गए, अब टीम की क्लास लूँगा कि सीरियस वाले मैच में ऐसे नहीं खेलना है।

कोहली तो आरसीबी का मैच हारते हैं तो बहुत परेशान हो जाते हैं, देश वाला सीरियस मैच हारने पर परेशान थोड़े ही होंगे। फिर याद आया कि जो आदमी ‘ब्लैक लाइव्स मैटर’ पर घुटने टिका रहा हो, वो क्या भारत-पाकिस्तान मैच को भारत-पापुआ न्यू गीनिया वाला मैच नहीं मानेगा ताकि लगे कि भारत हर जगह शांति चाहता है।

कई जानकार तो यह कह रहे हैं कि अगर भारत जीत जाता तो कोहली उदास हो जाते ताकि पाकिस्तानियों को फील न हो। सही बात है, हमारी तो कोई फीलिंग ही नहीं है!

वैसे देखा जाए तो बीसीसीआई के पास इतना पैसा तो है कि भारत अभी भी आइसीसी को कह सकता है कि इस मैच को प्रैक्टिस मान कर, तीन दिन बाद से एक दूसरा सीरियस मैच करवाया जाए और लोगों को कहा जाए कि विज्ञापनों की दर कितनी रखी जाए इसलिए इस मैच को असली मैच मान कर दिखाया गया।

पाकिस्तान को भी दो-तीन सौ रुपए दे कर मनाया जा सकता है कि वो दोबारा खेल ले। पाकिस्तान तो टॉस जीत कर सिक्का रख लेने वाला देश है, वो तो मान ही जाएगा। जय शाह तो अपने आदमी हैं, वो चाहे तो ऐसा कर सकते हैं। ये बात और है कि उन्हें यह तीन लाइन बोलने के लिए भी लिख कर देना होगा और वो भी वो पढ़ पाएँगे कि नहीं, इस पर संदेह है।

पानीपत के बाद बाबर ने फिर से हरा दिया जबकि श्री संदीप आचार्य जी ने इस रोग की औषधि बहुत पहले बता दी थी कि बाबर को कैसे मिटाना है। इतनी बड़ी संस्था है बीसीसीआई, मसाज करने वाले भी हैं अपने पास तो क्या एक शीशी डाबर का तेल नहीं ले सकते थे? या मोदी जी ने बाबा रामदेव वाला तेल लगाने तो नहीं कह दिया है! कह भी दिया है तो भी डाबर का तेल इस मैच में तो लगा ही सकते थे।

अब आप कहेंगे कि प्रातःस्मरणीय श्री अजीत भारती जी ब्रो, डाबर का तेल लगाने से पाकिस्तान की टीम कैसे हार जाती? देखिए कई लोग शुरु से ही कह रहे थे कि पाकिस्तान का बाबर आजम आउट हुआ तो बाकी सब धर-धरा के आउट हो जाएँगे। अगर कोहली ने पूरी टीम को डाबर का तेल लगवा दिया जाता तो मैच शुरु होने से पहले ही टीम वाले पेपर से बाबर का नाम मिट जाता, वो खेलने ही नहीं आता। इस तरह से भारत की जीत सुनिश्चित हो जाती।

जय शाह से याद आया, किसी ने कहा कि अमित शाह जी ने कहा था कि भारत यह मैच हार जाए। कहा जा रहा है कि काफी समय से राष्ट्रवादियों से अंट-शंट ट्रेंड चलवाए जाने और आयरन मैन से स्पंजमैन बताए जा चुके श्री अमित शाह ने कहा है कि अब उनके पास एक कारण मिल गया है पाकिस्तान पर हमला कर के पीओके वापस ले लेने का। इससे राफेल की भी टेस्टिंग हो जाएगी।

एक समय तो मोदी जी ने भी पैड पहन लिया था, उनकी एक तस्वीर काफी चर्चा में आ गई जब भारत की बेकार बैटिंग को देख कर उन्होंने वैक्सीन सेंचुरी के बाद क्रिकेट में सेंचुरी बनाने की ठानी। किसी ने बताया कि टीम का नाम पहले देना होता है, और ‘घर वाले नहीं मानेंगे’ का झूठा बहाना मारने वाली लड़कियों की तरह रवि शास्त्री ने उन्हें बताया कि आईसीसी वाले नहीं मानेंगे। मोदी जी ने इस पर कहा कि पाकिस्तान के का क्रिकेटर जब पीएम बन सकता है तो भारत का पीएम क्रिकेटर क्यों नहीं बन सकता?

वहीं एक समस्या कुर्ता पायजामा, काणा खूब और ढाई थकवी जैसे लोगों को हो गई थी। भारत से घृणा करने वाले लोगों को ऐसे समयों पर डबल शिफ्ट करनी होती है। वो ट्वीट ऐसे करते हैं जैसे बाकियों के घर में टीवी या मोबाइल नहीं है, और वो मैच के टाइम ट्विटर पर ही कमेंट्री पढ़ते रहते हैं।

ये लोग बाकी लोगों से अधिक निराश दिखते हैं और इनके ट्वीट में यह लगता है कि इनसे बड़ा राष्ट्रवादी कोई नहीं। लेकिन, सर्प तो सर्प है, सर्पिनी अपना आचरण कैसे भूल जाएगी। जैसे ही पाकिस्तान की बैटिंग आई, इन्हें बाबर और रिजवान में खसम दिखने लगा और इनकी आहें तीव्र होने लगीं। वैसे असली आहें तो इरफान पठान की सुनने लायक थीं जब वो बाबर के छक्के पर कई बार चरमसुख तक पहुँचते सुने गए।

स्वघोषित समाचार पोर्टलों पर ऐसे हेडलाइन पढ़ने को मिल सकते हैं जिसमें यह बताया जाएगा कि कैसे यह बस एक मैच ही होता है लेकिन भारत के सवर्ण हिन्दू ब्राह्मणवादी पुरुष, इसमें घृणा ले आते हैं और इस मैच में उनकी हार, उस विचारधारा की हार है जिसने मोदी को सत्ता दे दी है।

यह भी लिखा जाएगा कि इस हार के बाद भारत के अल्पसंख्यकों पर बनने वाले चुटकुले और घृणा के बहाव पर एक रोक लगेगी। वैसे, जिस दर से कल रात से पटाखों की आवाज हम सबने सुनी है, उससे पता चलता है कि घृणा या चुटकुले क्यों बनाए जाते हैं। वैसे इस हार के बाद हमारा वो वाला चुटकुला इस बार नहीं बोला जा सका जिसमें हम कहते हैं कि ###, एक मैच तो जीत नहीं सकते, और इन्हें चाहिए कश्मीर!

रवीश ने इस हार पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है:

“हम हार ही तो रहे हैं हर तरफ, इसमें नया क्या है? जीडीपी गिर रही है, अर्थव्यवस्था मेरे घर, यानी गटर में जा चुकी है, तीन-चार बार आपातकाल आ चुका है। अब देश में गौरव करने को बचा ही क्या है? टीम में सिर्फ ब्राह्मण खेल रहे हैं, दलितों को कोई पूछता नहीं, दिल रखने के लिए मोहम्मद शमी को खिला दिया लेकिन उसके पीछे की चाल हम समझते हैं। हारने पर कहा जाएगा कि देखो, उसने तो नाजुक मौके पर छक्का पिटवा पर भारत को खेल से बाहर करवा दिया। वैसे भी शमी कितने मुसलमान हैं, वो हम सबको पता है, आज तक उन्होंने न तो कश्मीर पर बोला, न तबरेज पर, न अखलाक पर। इसलिए वो तो वैसे भी हमारे काम के हैं नहीं। जब तक इस टीम में दलितों को जगह नहीं दी जाएगी, उनके साथ सामाजिक न्याय नहीं होगा, हमारी हर जीत झूठी है। यूँ तो हम मैच भी हारे हैं, लेकिन एक समाज और देश के तौर पर हम पहले ही हार चुके हैं।”

भाजपा आइटी सेल वाले ‘वाह, मोदी जी वाह, इधर भी सेंचुरी, उधर भी सेंचुरी’ का पोस्टर बनवा के रखे हुए थे। उन्होंने मोदी जी के पैड पहनने वाले मीम को सत्य बनाने का पूरा प्रबंध कर लिया था कि ‘अभी तो मोदी जी ने सिर्फ पैड बाँधा था तो ही हार गए, अगर हेलमेट पहन लेते तो अगले तीन वर्ल्ड कप तक पाकिस्तान मैदान में ही नहीं उतरता।’

जो भी है, हमारी टीम हार गई। इस पर आइटी सेल ने रात भर माथा-पच्ची के बाद नेहरू को जिम्मेदार बताया है। उन्होंने कहा है कि न तो वो जिन्ना के साथ मारा-मारी करता, न देश के दो टुकड़े होते, न ही पाकिस्तान बनता, न ही आज हमें यह दिन देखने को मिलता।

कहा जा रहा है कि आइटी सेल के माइटोकॉन्ड्रिया ने आइटी सेल को इस बार के पद्म पुरस्कारों को लिए अनुमोदित किया है। अगली छब्बीस जनवरी को अगर अन्नदाताओं के ट्रैक्टर लाल किले पर न चढाई करें तो भाजपा आइटी सेल को छद्म-विभूषण से अलंकृत किया जाना तय है।

अंत में, मैं तो यही कहूँगा कि इसी टीम ने हमें दसियों मैच जितवा कर दिए हैं, हमें हँसने और चुटकुले बनाने के मौके दिए हैं। हो सकता है यही टीम फायनल में हमें जीत का स्वाद चखवाए। हम आज खिलाड़ियों की आलोचना कर रहे हैं लेकिन हमें ध्यान रहना चाहिए कि यह एक खेल मात्र है, एक बेहतर टीम जीती है। सही मायनों में आज तो क्रिकेट की जीत हुई है। जिन्होंने अच्छा खेला उनकी सराहना की ही जानी चाहिए। खेल खेल ही होता है, फिर भी PKMKB तो रहेगा ही!

और हाँ, कोहली ब्रो, मीनिंगफुल दीवाली वाले, वो बता देना भाई दिया जलाना है कि नहीं, कहीं आर्कटिक पिघल गया और समुद्र के जल स्तर बढने से बाढ़ आ गई तो इस विभीषिका का उत्तरदायी मैं नहीं बनना चाहता!



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