ऑस्ट्रेलिया: विशाल जूद की रिहाई तय, वकीलों से समझौते के बाद मिली तारीख

02 सितम्बर, 2021 By: डू पॉलिटिक्स स्टाफ़
ऑस्ट्रेलिया में खालिस्तान समर्थकों की साजिश का शिकार हुए थे विशाल जूद

खालिस्तानियों की साजिश के तहत ऑस्ट्रेलिया (Australia) की जेल में बन्द भारतीय छात्र विशाल जूद (Vishal Jood) की 15 अक्टूबर को रिहाई हो जाएगी। खालिस्तानियों का विरोध करने के चलते विशाल जूद पर नस्लीय हिंसा सहित कुल 11 आरोप लगाए गए थे, जिसमें से 8 आरोप NSW के लोक अभियोजक विभाग ने एक याचिका समझौते तहत हटा लिए।

कई माह से जारी संघर्ष के बाद ऑस्ट्रेलिया की न्यू साउथ वेल्स जेल में बंद भारतीय मूल के छात्र विशाल जूद को कोर्ट ने रिहा करने का फैसला किया है। विशाल को 15 अक्टूबर को रिहा कर दिया जाएगा। उस पर 11 आरोप लगाए गए थे।

पैरामटा कोर्ट के मजिस्ट्रेट के सामने न्यू साउथ वेल्स के सरकारी वकील ने विशाल पर लगे 8 आरोप खत्म करने की अर्जी दी थी, जिसे मजिस्ट्रेट के थॉमसन ने मंजूर कर लिया। विशाल ने 3 आरोपों को स्वीकार कर लिया था, जो उन पर 16 सितंबर, 2020 और 14 फरवरी, 2021 को हुई घटना के संबंध में लगाए गए थे।

जूद को इन 3 मामूली आरोपों के लिए दोषी ठहराया गया, जिसके लिए मजिस्ट्रेट के थॉमसन ने विशाल को 6 महीने के कारावास की सजा सुनाई। यह अवधि 16 अप्रैल, 2021 को विशाल की गिरफ्तारी के दिन से शुरू मानी जा रही है।

ऑस्ट्रेलिया के खालिस्तानियों ने विशाल जूद पर हमला करने के आरोप लगाए थे, जबकि विशाल के वकीलों का कहना था कि खालिस्तानी तत्व तिरंगे का अपमान कर रहे थे। विशाल ने उन्हें रोककर भारतीय ध्वज का सम्मान बचाना चाहा था।

बृहस्पतिवार (02 सितम्बर, 2021) सुबह कोर्ट में सुनवाई के दौरान विशाल के वकील ने ऐसे वीडियो साक्ष्य पेश किए, जिनसे साफ पता चल रहा था कि खालिस्तानी तत्वों ने विशाल को उकसाया और उसके बाद सारी घटना को अपने खिलाफ दिखाकर पुलिस के सामने पेश किया।

ऑस्ट्रेलिया की एक समाचार वेबसाइट ‘ऑस्ट्रेलिया टुडे’ के मुताबिक, मजिस्ट्रेट ने तीन ‘मामूली’ आरोपों में विशाल को 16 अप्रैल, 2021 से 6 महीने की सजा सुनाई है। जिसे काटकर वह 15 अक्टूबर को जेल से रिहा हो जाएगा।

कैसे फँसे विशाल जूद

ज्ञात हो कि इस साल 26 जनवरी को लाल किले पर हुई हिंसा के बाद दुनिया के कई देशों में खालिस्तानी तत्वों ने भारतीय दूतावास और उच्चायोग के बाहर प्रदर्शन किया था। इन प्रदर्शनों के दौरान भारतीय तिरंगे का अपमान करने की घटनाएँ हुई थीं।

ऑस्ट्रेलिया के न्यू साउथ वेल्स में भी 14 फरवरी को प्रदर्शन के दौरान तिरंगे का अपमान हो रहा था। जिसे रोकने के लिए विशाल जूद ने कोशिश की थी। इस पर खालिस्तानी तत्वों ने उन पर हिंसा और भेदभाव का आरोप लगाते हुए फर्जी केस दर्ज करा दिया था।

डू-पॉलिटिक्स ने प्रमुखता से उठाया था विशाल जूद का मामला

‘डू-पॉलिटिक्स’ ने इस मामले को ले कर आवाज उठाई थी। विशाल के दोस्तों का कहना है कि अगर वो वकीलों से समझौता नहीं करते तो अगली सुनवाई की तारीख जनवरी में दी जा रही थी। विशाल के दोस्त अपने स्तर से धन एकत्रित कर के जूद के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं।

हालाँकि भारत सरकार और हरियाणा सरकार ने शुरुआत में खूब दिलचस्पी दिखाई थी। शुरुआत में सांसदों और नेताओं ने भी विशाल की रिहाई के लिए काफी बयान दिए थे, मगर वास्तव में उन्होंने जूद की रिहाई के लिए कितना काम किया, यह किसी को मालूम नहीं है।

एक सकारात्मक बात यह हुई कि दूतावास से फोन के माध्यम से केस की प्रगति की रिपोर्ट माँगी जाती रही। अब आशा है कि रिहाई के बाद विशाल जूद अक्टूबर के अंत तक भारत आ जाएगा।

खालिस्तानियों की साज़िश का शिकार हुए जूद

यह पूरा मामला ऑस्ट्रेलिया में बढ़ रहे खालिस्तानी विचारधारा वाले सिखों एवं अन्य भारतीयों के बीच की रंजिश का है। जिन हमलों के लिए विशाल पर आरोप लगाए गए थे, वे तीनों ही कथित तौर पर सरदारों पर हुए हैं।

ये सरदार स्वयं को भारतीय नहीं मानते अपितु खालिस्तानी विचारधारा एवं खालिस्तान जैसे अलग राज्य का स्वप्न रखते हैं।ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले सरदारों के बीच कट्टरपंथ चलाने में कई खालिस्तानी कथित नेताओं का हाथ है।

ये सभी नेता इंटरनेट पर अपनी हिंदू-घृणा का प्रदर्शन करते देखे जा सकते हैं। खालिस्तानी समर्थकों द्वारा ऑस्ट्रेलिया में ‘टर्बन4ऑस्ट्रेलिया’ नामक एक संस्था बनाई गई है।

किसान आंदोलन की भूमिका

भारत में चल रहे कथित किसान आंदोलन ने इस मामले को और गर्म कर दिया था। ऑस्ट्रेलिया में विभिन्न स्थानों पर किसान आंदोलन को लेकर खालिस्तानियों द्वारा जुलूस एवं विरोध प्रदर्शन किए जाने लगे।

इन्हीं प्रदर्शनों में कई घटनाएँ पर्थ, सिडनी एवं मेलबर्न जैसे शहरों से सामने आईं, जहाँ पर खालिस्तानियों द्वारा भारतीयों के व्यापार एवं दुकानों पर हमले किए गए। ऑस्ट्रेलिया में भी विरोध प्रदर्शन आयोजित किए गए थे।

पिछले साल सिडनी के क्वेकर्स हिल में एक ऐसे विरोध प्रदर्शन में, जहाँ विशाल और उनके दोस्त भारत-विरोधी, झूठी बयानबाजी का विरोध करने गए थे, उन पर खालिस्तान समर्थक चरमपंथियों ने हमला बोल दिया।

खालिस्तानियों ने मीडिया एवं पुलिस में यह नैरेटिव रचते हुए विशाल को फंसाया था कि हिंदुओं द्वारा पगड़ी पहनने वाले सिखों पर हमले किए जा रहे हैं।



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