कनाडा: हिजाब पहन छात्रों को पढ़ाने पहुँची शिक्षिका, स्कूल ने नौकरी से निकाला

15 दिसम्बर, 2021 By: DoPolitics स्टाफ़
कनाडा में पढ़ाते समय हिजाब पहनकर कानून तोड़ने वाली अध्यापिका को स्कूल से निकला गया

कनाडा के एक स्कूल में पढ़ाने वाली एक मुस्लिम शिक्षिका ने अपनी मज़हबी पहचान को ऊपर रखते हुए देश के कानून की धज्जियाँ उड़ा दीं। यह महिता हिजाब पहनकर स्कूल में बच्चों को पढ़ाने पहुँची, लेकिन इस कृत्य के कारण इस अध्यापिका को अपने नौकरी से हाथ धोना पड़ा।  

कनाडा के क्यूबेक में चेल्सी एलीमेंट्री स्कूल में तीसरी कक्षा की एक नई शिक्षिका फातिमा अनवरी ने विद्यालय परिसर में ‘हिजाब’ पहनने को लेकर बखेड़ा खड़ा कर दिया। इस मुस्लिम महिला को इसी कारण वापस जाने के लिए कहा गया क्योंकि क्यूबेक में आए एक ‘बिल 21’ में सरकार के लिए काम करते समय कोई भी साम्प्रदायिक प्रतीकों और कपड़ों के पहनने पर प्रतिबंध है। 

हालाँकि इस कानून के पारित होते समय भी कई अड़चनें आई थीं। मुस्लिमों की तरफ से यह तर्क दिया गया था कि इस कानून से अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया गया है। 

बता दें कि क्यूबेक ने वर्ष 2019 के जून में इस बिल को कानून बनाया था और कनाडा के पब्लिक स्कूलों के शिक्षक भी इस कानून के दायरे में आते हैं। 

इनके साथ-साथ पुलिस, वकील, न्यायाधीश, बस चालक, डॉक्टर, सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षकों जैसे पदों पर बैठे लोगों को भी कानून के अनुसार पगड़ी, किप्पा और हिजाब जैसे धार्मिक प्रतीकों को पहनने से प्रतिबंधित किया जाता है।

पहचान से बढ़कर है हिजाब 

रिपोर्ट की मानें तो अनवरी ने बच्चों को पढ़ाते समय हिजाब पहनकर क्यूबेक के ‘पंथनिरपेक्षता’ की व्याख्या करने वाले कानून का उल्लंघन किया है। स्कूल के बोर्ड के साथ इस विषय पर चर्चा के दौरान अध्यापिका से पूछा गया कि क्या हिजाब एक मजहबी या सांस्कृतिक प्रतीक है? इस पर अध्यापिका ने कहा:

“यह मेरे लिए पहचान से बढ़कर है। मैं यह नहीं कहती कि हिजाब एक मजहबी चिन्ह है, क्योंकि ऐसा नहीं है कि जिसने हिजाब नहीं पहना, वह इस्लाम का पालन नहीं कर रही।” 

अनवरी को स्कूल से निकाले जाने का उनके स्कूल में काफी विरोध किया गया। छात्रों और कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन में हरे रंग के रिबन पहने और उनके समर्थन में तख्तियाँ भी दिखाईं।

चित्र साभार- WION

पूरे मामले पर प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने सोमवार (13 दिसंबर, 2021) को कहा कि किसी को भी अपनी आस्था के कारण अपनी नौकरी नहीं गँवानी चाहिए, लेकिन उन्होंने यह कहते हुए हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया कि वे क्यूबेक और संघीय सरकार के बीच तनाव को भड़काना नहीं चाहते हैं।



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