इज़रायली दूतावास विस्फोट मामले में गिरफ्तार कारगिल के चारों 'छात्रों' को कोर्ट ने दी जमानत

16 जुलाई, 2021 By: डू पॉलिटिक्स स्टाफ़
आरोपितों ने जमानत का अनुरोध करते हुए दावा किया था कि आगे की जाँच के लिए उनकी अब जरूरत नहीं है

इजराइली दूतावास के पास 29 जनवरी को हुए एक आईईडी विस्फोट मामले में कथित संलिप्तता और साजिश को लेकर दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल द्वारा गिरफ्तार किए गए कारगिल, लद्दाख के 4 छात्रों को दिल्ली की एक अदालत ने जमानत दे दी है।

बृहस्पतिवार (15 जुलाई, 2021) को मुख्य मेट्रोपोटिलन मजिस्ट्रेट डॉ पंकज शर्मा ने नजीर हुसैन (25), जुल्फिकार अली वजीर (25), एआज हुसैन (28) और मुजम्मिल हुसैन (25) को जमानत दे दी। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि इनके खिलाफ कुछ भी आपत्तिजनक नहीं पाया गया है।

मजिस्ट्रेट डॉ पंकज शर्मा ने कहा कि जाँच अधिकारी (आईओ) द्वारा ऐसा कुछ भी नहीं बताया गया है जो यह साबित करता हो कि वे किसी आतंकवादी संगठन से जुड़े थे या समाज के लिए खतरा थे।

डॉ पंकज शर्मा ने कहा कि इनकी उम्र, स्थायी निवास स्थान और यह तथ्य ध्यान में रखते हुए कि सभी आरोपित समाज में रहने वाले छात्र हैं, सभी आरोपितों को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया जाता है।

बता दें कि 29 जनवरी को दिल्ली में इजरायली दूतावास के पास एक कम तीव्रता वाला विस्फोट हुआ था। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने इस मामले में अलग से आपराधिक साजिश का मामला दर्ज किया था। बाद में मामला एनआईए (NIA) को सौंप दिया गया था।

जस्टिस शर्मा ने कहा, “जाँच अधिकारी की रिपोर्ट कहती है कि एक आरोपित नज़ीर अपने ट्विटर अकाउंट पर इजरायल, अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों के खिलाफ ‘अत्यधिक आपत्तिजनक’ सामग्री पोस्ट करता था और एक अन्य आरोपित जुल्फिकार उसे फॉलो करता था।”

जस्टिस शर्मा ने आगे कहा, “रिपोर्ट से ये भी पता चलता है कि नज़ीर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ऑफ ईरान (IRGC) का समर्थक है, लेकिन IRGC आतंकवादी संगठन नहीं है। रिपोर्ट में ऐसा कुछ भी नहीं है जिससे पता चलता हो कि कोई भी आरोपित भारत के खिलाफ आपत्तिजनक सामग्री पोस्ट कर रहा था।”

जस्टिस शर्मा ने कहा:

“आरोपित व्यक्तियों ने अपने सभी इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स सरेंडर करके जाँच में सहयोग किया है। जाँच अधिकारी के पास आरोपितों के सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण हैं और इसके विश्लेषण में लंबा समय लगेगा। चूँकि आरोपितों का पुराना कोई आपराधिक रिकॉर्ड भी नहीं है और वो छात्र हैं, इसलिए उन्हें जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया जाता है।”

कैसे संदेह में आए ‘छात्र’?

एनआईए ने अदालत को बताया था कि नज़ीर अपने ट्विटर अकांउन्ट से इज़रायल सहित कुछ पश्चिमी देशों के खिलाफ घृणा से भरे पोस्ट अपलोड करता था तथा सीडीआर विश्लेषण से पता चला है कि जुल्फिकार, एजाज और मुजम्मिल विस्फोट के समय दिल्ली में मौजूद थे। हालाँकि चारों आरोपितों के मोबाइल पर इस दौरान कोई कॉल या एसएमएस नहीं मिला।

पुलिस का दावा था कि नजीर और जुल्फिकार वीपीएन का इस्तेमाल कर रहे थे। अदालत को ये भी बताया गया कि विस्फोट वाले दिन सभी आरोपितों ने संदेहास्पद रूप से अपने मोबाइल फोन स्विच ऑफ कर लिए थे। इस पर आरोपितों के वकील ने कहा कि आरोपितों ने परीक्षा के चलते अपने मोबाइल फोन बन्द किए थे।



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