राष्ट्र नहीं, वंशवाद के पिता थे गाँधी: संत कालीचरण ने गोडसे को असली महात्मा बताते हुए फिर किया प्रणाम

28 दिसम्बर, 2021 By: DoPolitics स्टाफ़
संत कालीचरण ने नए वीडियो में कहा कि अगर सच बोलने का दंड मृत्यु है, तो यह उन्हें स्वीकार है

रायपुर में हुई धर्म संसद के दौरान नाथूराम गोडसे को मोहनदास गाँधी को मारने का धन्यवाद देते हुए गाँधी के विषय में अपने विचार रखने वाले संत कालीचरण का एक नया वीडियो सामने आया है। इसमें वे कहते दिख रहे हैं कि उन्हें गाँधी को अपशब्द कहने का कोई अफसोस नहीं है, चाहे तो उन्हें मृत्युदंड दे दिया जाए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि असली महात्मा गोडसे थे।

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में 26 दिसंबर, 2021 को हुई एक धर्म संसद के दौरान संत कालीचरण ने मोहनदास गाँधी के विषय में कुछ आपत्तिजनक टिप्पणियाँ की थीं। साथ ही उन्होंने नाथूराम गोडसे को गाँधी को मारने के लिए नमन भी किया था। इस मामले में संत कालीचरण पर रायपुर में एफआईआर दर्ज हो गई थी और उनके इस बयान को लेकर खूब राजनीति भी चल रही है।

घटना के एक दिन बाद ही संत कालीचरण का एक और वीडियो सामने आया है, जिसमें वे अपने बयान को लेकर कोई अफसोस न प्रकट करते हुए अपने विचारों पर अड़े हैं।

इसमें कालीचरण मोहनदास गाँधी पर वंशवाद का आरोप लगाते हुए कहते हैं कि उन्हीं के कारण ही 14 वोट मिलने के बाद भी सरदार पटेल को नहीं बल्कि नेहरू को देश का पहला प्रधानमंत्री घोषित किया गया। अगर सरदार प्रधानमंत्री होते तो भारत आज सोने की चिड़िया होता।


देश के नहीं, वंशवाद के जनक हैं गाँधी 

वर्तमान राजनीति के संदर्भ में भी संत कालीचरण ने कहा कि कॉन्ग्रेस में ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसी प्रतिभाएँ थीं, परंतु गाँधी-नेहरू के वंशवाद के चलते उन्हें आगे आने का मौका ही नहीं मिला। आगे उन्होंने कहा:

“इस वंशवाद के जनक गाँधी हैं इसलिए गाँधी केवल गाँधी-नेहरू खानदान के वंशवाद के जनक हैं, राष्ट्र के जनक नहीं हैं, न ही राष्ट्रपिता हैं। मैं उन्हें राष्ट्रपिता नहीं मानता। कोई माने यह उनकी इच्छा है।”

आगे कालीचरण ने भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव की फाँसी न रोकने के कारण गाँधी का तिरस्कार करने की बात कही और कहा कि उनका सबसे बड़ा हथियार अनशन था, जिसका उपयोग उन्होंने हिंदुओं के विरुद्ध ही किया। कालीचरण ने कहा:

“गाँधी कहते थे कि देश का बँटवारा मेरी लाश पर होगा, पर जब बँटवारा हुआ तब गाँधी ज़िंदा थे। बँटवारे के समय जो दंगे हुए, जिनमें लाखों सिखों और हिंदुओं को काट डाला गया, उस समय गाँधी अनशन पर बैठे थे कि पाकिस्तान को ₹55 करोड़ रुपए दो। इसलिए नफरत करता हूँ मैं गाँधी से।”

फिर किया गोडसे को नमन 

इसके आगे संत कालीचरण ने यह भी कहा कि राष्ट्र का कोई पिता नहीं हो सकता। जब राष्ट्र करोड़ों सालों से है तो केवल 200 वर्ष पूर्व आया कोई व्यक्ति राष्ट्र का पिता कैसे हो सकता है?

उन्होंने कहा:

“अगर राष्ट्रपिता बनाना ही है तो छत्रपति शिवाजी महाराज, गुरु गोविंद सिंह, राणा प्रताप महाराज, आचार्य चाणक्य जी को बनाना चाहिए और अभी के महापुरुषों को अगर बनाना है तो सरदार पटेल को बनाना चाहिए, जिन्होंने पूरे राष्ट्रकुल को एकत्रित किया था।”

वीडियो में संत कालीचरण ने पुनः नाथूराम गोडसे को नमस्कार किया और कहा कि उन्होंने अपना बलिदान देकर हिंदुस्तान को बचा लिया। जिस कॉरिडोर की माँग पाकिस्तान और जिन्ना कर रहे थे, अगर गाँधी के अनशन पर बैठने से वह दे दिया जाता तो हिंदुस्तान ग़ज़वा-ए-हिंद हो चुका होता।

अंत में संत कालीचरण ने अपनी बातों को उचित सिद्ध करते हुए कहा कि अगर सच बोलने का दंड मृत्यु है तो उन्हें स्वीकार है। हिंदू धर्म को बचाने के लिए करोड़ों कालीचरण बलिदान हो जाएँ तो इसके लिए भी वे तैयार हैं।



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