खुद की आँखें बंद हैं, हम बूढ़ों को बनाते हैं दोषी: कॉन्ग्रेसी नेतृत्व को लेकर फिर विद्रोही हुए कपिल सिब्बल

17 अगस्त, 2021
कपिल सिब्बल ने कॉन्ग्रेस के नेतृत्व पर फिर सवाल उठाए हैं

कॉन्ग्रेस की कद्दावर नेता और सांसद सुष्मिता देव के पार्टी छोड़ने के बाद कॉन्ग्रेस का कलह एक बार फिर सार्वजानिक हो गया है। कॉन्ग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने सुष्मिता देव के कॉन्ग्रेस छोड़ने पर कॉन्ग्रेस हाईकमान पर निशाना साधा है।

सुष्मिता के इस्तीफे को लेकर तंज कसते हुए वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने कहा है कि जब पार्टी से युवा चले जाते हैं, तो बूढ़ों को इसे मजबूत करने के प्रयासों के लिए दोषी ठहराया जाता है।

बता दें कि असम में कॉन्ग्रेस की पूर्व सांसद सुष्मिता देव कल ने पार्टी छोड़ दी थी। सुष्मिता देव ने इस बारे में सोनिया गाँधी को पत्र लिखकर सूचना दी है और ट्विटर पर अपने ‘बायो’ में ‘पूर्व कॉन्ग्रेस सदस्य’ लिख लिया था।

sushmita dev-twitter handle

इसके बाद कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने कॉन्ग्रेसी शीर्ष नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए तंज किया। एक ट्वीट करते हुए सिब्बल ने लिखा, “सुष्मिता देव ने हमारी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। जब युवा नेता चले जाते हैं तो हम ‘बूढ़ों’ को इसे मजबूत करने के हमारे प्रयासों के लिए दोषी ठहराया जाता है। पार्टी आँखें बंद करके आगे बढ़ रही है।”

बता दें कि सुष्मिता देव कॉन्ग्रेस की तेज तर्रार नेता मानी जाती हैं और वो कॉन्ग्रेस के कद्दावर नेता संतोष मोहन देव की बेटी हैं। सुष्मिता, कॉन्ग्रेस की महिला इकाई की अध्यक्ष भी थी। सुष्मिता देव कॉन्ग्रेस की उन नेताओं में से एक हैं, जिनका ट्विटर अकाउंट रेप पीड़िता के परिवार की पहचान उजागर करने के मामले में सस्पेंड कर दिया गया था।

सुष्मिता देव पहली नेता नहीं हैं, जिन्होंने पिछले कुछ समय मे पार्टी को अलविदा कहा है। उनसे पहले कई कद्दावर नेता पार्टी को अलविदा कह चुके हैं, जिनमें ज्योतिरादित्य सिंधिया और जितिन प्रसाद जैसे बड़े नाम भी हैं। युवा नेताओं के इस्तीफे पर राहुल गाँधी ने कहा था कि जो लोग आरएसएस से डरते है, वो ही कॉन्ग्रेस छोड़ रहे हैं।

इस बीच सुष्मिता देव ने भी कॉन्ग्रेस से इस्तीफे के बाद आज तृणमूल कॉन्ग्रेस का दामन थाम लिया है, जिसके बाद ‘असंतुष्ट’ कॉन्ग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने सोमवार को एक बार फिर पार्टी नेतृत्व पर निशाना साधते हुए कहा कि युवा पार्टी छोड़ रहे है और कॉन्ग्रेस की बदहाली के लिए ‘बूढ़ों’ को जिम्मेदार ठहराया जाता है।

ज्ञात हो कि कपिल सिब्बल 23 नेताओं के उस समूह के एक प्रमुख सदस्य हैं, जिन्होंने पिछले साल सोनिया गाँधी को पत्र लिखकर पार्टी नेतृत्व बदलने और सक्रिय कार्यकर्ताओं को अहम जिम्मेदारी सौंपने की माँग की थी।

हाल ही में कपिल सिब्बल ने कई विपक्षी नेताओं को अपने घर पर रात्रिभोज के लिए आमंत्रित किया था, जहाँ कॉन्ग्रेस की वर्तमान स्थिति और उसके नेतृत्व पर सवाल उठाए थे।

याद नहीं, आखिरी बार सोनिया राहुल से कब मिला था: सिब्बल

हाल ही में एक इंटरव्यू में कॉन्ग्रेस के कद्दावर नेता कपिल सिब्बल ने कहा था कि उन्हें याद नहीं आखिरी बार वो सोनिया गाँधी से कब मिले थे, जिससे ये स्पष्ट होता है कि पार्टी आलाकमान से सिब्बल के रिश्ते अब उतने मधुर नहीं रहे।

अंग्रेजी न्यूज पोर्टल ‘द वायर’ के सीनियर पत्रकार करण थापर को दिए इंटरव्यू में सिब्बल में कहा कि आलाकमान से उनके रिश्ते ठीक हैं, पर उनके बीच सच्चे संबंध नहीं हैं। सोनिया गाँधी से आखिरी मुलाकात को लेकर सिब्बल के पास कोई स्पष्ट उत्तर नहीं था। उन्होंने कहा, “हो सकता साल भर पहले मिले हों पर मुझे फिलहाल याद नहीं है।”

राहुल से आखिरी मुलाकात का प्रश्न हुआ तो सिब्बल ने बताया, ”हो सकता है कि झंडारोहण कार्यक्रम के दौरान हुई हो, मगर मुझे नहीं लगता है कि हमारी दो साल से बात हुई होगी। दो साल से हमारे बीच बात नहीं हुई है। हालाँकि, सोनिया से बात हुई होगी। मैं अभी भी उनका प्रतिनिधित्व करता हूं, पर हमारे बीच अंतर नहीं है।”

एक समाचार एजेंसी को दिए साक्षात्कार में कपिल सिब्बल ने कहा, “संगठन में आमूल-चूल परिवर्तन का अनुरोध करते हुए पार्टी अध्यक्ष को पत्र लिखने वाले ‘ग्रुप 23’ के नेता पार्टी में सुधार की माँग करते रहेंगे।”

सिब्बल ने कहा कि एक मजबूत कॉन्ग्रेस के बगैर विपक्ष की एकजुटता संभव नहीं है। उन्होंने कहा, ‘‘अगर मैं एकजुटता के रास्ते में आड़े आ रहा हूँ, तो कोई बात नहीं आप मुझे और अन्य को बाहर का रास्ता दिखा सकते हैं, लेकिन कॉन्ग्रेस को मजबूत बनाएँ।’’

स्तब्ध कॉन्ग्रेसी नेताओं का टिप्पणी से इंकार

सुष्मिता के इस्तीफे पर कॉन्ग्रेस पार्टी प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा है कि वह तब तक कोई टिप्पणी नहीं करेंगे, जब तक वह सुष्मिता से बात नहीं कर लेते। उन्होंने कहा कि मैंने सुष्मिता देव से बात करने की कोशिश की, उनका फोन बंद था।

सुरजेवाला ने कहा, “वह एक समर्पित कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता थीं और शायद आज भी हैं। कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी को उनका कोई पत्र नहीं मिला है। वह अपने फैसले लेने के लिए पर्याप्त परिपक्व हैं। मैं इस पर कोई टिप्पणी नहीं कर सकता, जब तक उनसे बात नहीं कर लेता।”

कॉन्ग्रेस सांसद रिपुन बोरा ने हैरानी जताते हुए कहा, “सुष्मिता देव एक समर्पित कॉन्ग्रेस नेता थीं। कभी नहीं सोचा था कि वह ऐसा निर्णय लेंगी। हम परिवार की तरह थे। अगर उनके पास पार्टी के खिलाफ कुछ भी था, तो उन्हें इस पर चर्चा करनी चाहिए थी। मैं उनसे अपने फैसले पर पुनर्विचार करने का अनुरोध करता हूँ और अपना इस्तीफा वापस लें।”

हालाँकि सुष्मिता देव ने किसी भी सुलह या वापसी के लिए कोई जगह नहीं छोड़ी है। कॉन्ग्रेस छोड़ने के कुछ घंटों बाद ही वो तृणमूल कॉन्ग्रेस में शामिल हो गईं। तृणमूल कॉन्ग्रेस के कद्दावर नेताओं- अभिषेक बनर्जी और डेरेक ओ ब्रायन ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई। उनके असम और त्रिपुरा में तृणमूल के लिए सक्रिय भूमिका निभाने की संभावना है।



सहयोग करें
वामपंथी मीडिया तगड़ी फ़ंडिंग के बल पर झूठी खबरें और नैरेटिव फैलाता रहता है। इस प्रपंच और सतत चल रहे प्रॉपगैंडा का जवाब उसी भाषा और शैली में देने के लिए हमें आपके आर्थिक सहयोग की आवश्यकता है। आप निम्नलिखित लिंक्स के माध्यम से हमें समर्थन दे सकते हैं: