गाँधी का सम्मान हो किंतु राम-सीता का मजाक बनाने वालों पर भी हो कार्रवाई: स्वामी यतींद्रानंद गिरि

31 दिसम्बर, 2021 By: DoPolitics स्टाफ़
जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर यतींद्रानंद स्वामी ने संत कालीचरण के बयान पर अपनी राय रखी

रायपुर में हुई धर्म संसद के दौरान मोहनदास गाँधी को लेकर विवादास्पद टिप्पणी करने के मामले में गिरफ्तार हुए कालीचरण महाराज को लेकर संत समाज अपने विचार प्रस्तुत कर रहा है।

हाल ही में जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर यतींद्रानंद गिरी ने इस विषय में टिप्पणी करते हुए कहा कि गाँधी जी को जो अपशब्द कहे गए हैं, उनका समर्थन नहीं किया जा सकता क्योंकि यह भारत की संस्कृति नहीं है, परंतु इस देश में श्री राम समेत कई देवी-देवताओं के विषय में जो घृणा फैलाई जाती है, उस पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं होती?

26 दिसंबर, 2021 को छत्तीसगढ़ के रायपुर में हुई धर्म संसद के दौरान मोहनदास गाँधी को लेकर संत कालीचरण महाराज ने कुछ विवादास्पद टिप्पणी की। इसके बाद उनकी 30 दिसंबर, 2021 को गिरफ्तारी हो गई। इस घटना के बाद से ही संत समाज के अलग-अलग लोग इस मामले में अपनी राय दे रहे हैं।

जहाँ हाल ही में डासना देवी मंदिर के महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती कालीचरण के समर्थन में नज़र आए और उन्होंने उन्हें ज़मानत देने की माँग की, वहीं जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर यतींद्रानंद गिरि ने भी इस मामले में अपने कुछ अलग विचार रखे हैं। मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा:

“गाँधीजी एक सम्मान योग्य पुरुष थे और उनके विरुद्ध जब शब्द कहे गए उसका समर्थन नहीं किया जा सकता क्योंकि यह भारत की संस्कृति नहीं है परंतु उसके साथ-साथ इस देश में भगवान श्रीराम को गालियाँ दी गई हैं, माँ सीता को वभ्याचारणी कहा गया है। सीरियलों और फिल्मों में देवी-देवताओं की हँसी उड़ाने के साथ-साथ उनके नग्न चित्र तक बनाए गए हैं। उस विषय में कोई कार्रवाई क्यों नहीं होती?”

“राष्ट्र के पिता नहीं, पुत्र होते हैं” 

उन्होंने इस विषय में मीडिया को भी घेरा और कहा कि ऐसे समय में कोई चैनल इस मुद्दे को नहीं उठाता और न जाने सारे सेकुलवादी कहाँ छिप जाते हैं? उन्होंने द्वारिका पीठ के शंकराचार्य रूपानंद सरस्वती की बात को दोहराते हुए कहा:

“आदर और सम्मान अपनी जगह है, परंतु राष्ट्र से बड़ा कोई नहीं हो सकता यदि कोई है तो वह परमात्मा है। राष्ट्र का कोई पिता नहीं हो सकता केवल पुत्र हो सकते हैं।”

इसके आगे उन्होंने मोहनदास गाँधी के स्वतंत्रता में योगदान को लेकर कहा की स्वतंत्रता की लड़ाई में किसी एक पुरुष को श्रेय नहीं दिया जा सकता। उस लड़ाई में चंद्रशेखर आज़ाद, बोस, सावरकर, तिलक, लाला लाजपत राय जैसे कई लोग शामिल थे।

गाँधीजी के अफ्रीका से लौटने से पूर्व भी कई लोग अंडमान में यातनाएँ सह रहे थे। स्वतंत्रता में केवल एक व्यक्ति नहीं, सभी का योगदान है।

घरवापसी से समाप्त होगा साम्प्रदायिक तनाव 

इससे इतर उन्होंने घरवापसी के मुद्दे पर भी बात की और शिया वक्फ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन रह चुके वसीम रिज़वी द्वारा घर वापसी करके जीतेंद्र नारायण सिंह त्यागी बनने को लेकर कहा:

“उन्होंने घरवापसी की है, मैं इसे धर्म परिवर्तन नहीं मानता। धर्म परिवर्तन एक समय पर औरंगज़ेब और मुगलों ने करवाया था। उस वक्त किसी दबाव में आकर और अत्याचार के चलते हिंदुओं को मुसलमान बनाया गया। वसीम रिज़वी ने घरवापसी की। अगर अन्य मुसलमान भी अपनी भूल सुधारना चाहते हैं तो उनके लिए रास्ता खुला है।”

उन्होंने अंत में यह भी कहा कि देश का सांप्रदायिक तनाव घर-वापसी जैसे कृतियों के बाद ही समाप्त हो सकता है।



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