लीबिया में मारा गया केरल का ईसाई इंजीनियर, इस्लाम अपनाने के बाद बना था IS आतंकी

08 जून, 2021 By: डू पॉलिटिक्स स्टाफ़
आईएसआईएस ने अपने एक दस्तावेज में भारतीय ''इतिशदी' का जिक्र किया है

इस्लामी आतंकी संगठन ‘इस्लामिक स्टेट’ ने दावा किया है कि केरल निवासी एक भारतीय इंजीनियर उनके लिए लड़ते हुए शहीद हो गया। दावे के अनुसार, मारा गया ये भारतीय इंजीनियर एक ईसाई था, जो इस्लाम ग्रहण करने के कुछ दिन बाद ही आतंकी संगठन आईएस से जुड़ गया था।

अपने शहीदों को जानो’ नामक एक दस्तावेज जारी करते हुए इस्लामिक स्टेट ने भारत के केरल मूल के अपने इस कैडर का उल्लेख किया है। दस्तावेज़ में कहा गया है कि अबू बक्र अल-हिंदी केरल का एक ईसाई था, जिसने खाड़ी में काम करते हुए इस्लाम अपनाया था।

आईएस ने बताया पहला भारतीय ‘शहीद’

दस्तावेज़ में उल्लेख किया गया है कि अबू बक्र अफ्रीकी महाद्वीप पर मारे जाने वाले भारत के पहले ‘इतिशदी’ हैं। ‘इतिशदी’ शब्द आत्मघाती हमलावर या शहीद के लिए प्रयोग किया जाता है।

भारतीय सुरक्षा एजेंसियाँ ​​इस्लामिक स्टेट (आईएस) के इस दावे की पुष्टि करने की कोशिश कर रही हैं कि केरल का कोई इंजिनियर आईएस के लिए लड़ते हुए मारा गया है।

आईएस दस्तावेज मलयाली कैडर अबू बक्र के असली नाम का उल्लेख नहीं किया गया है। ना ही उसका केरल में स्थानीय पता बताया गया है। सिर्फ इतना बताया गया है कि वह एक अमीर ईसाई परिवार में पैदा हुआ था।

दस्तावेज में आईएस ने दावा किया है कि अबू बक्र खाड़ी में जाने से पहले बेंगलुरु में रह कर नौकरी करता था।

खाड़ी देश में नौकरी करते हुए अपनाया इस्लाम

आईएस दस्तावेज़ में कहा गया है कि ‘वह पहली बार पूर्ण मुस्लिम इकोसिस्टम में आया। जब वह एक बाजार में खरीदारी कर रहा था, तब उसे सौंपे गए एक पैम्फलेट के माध्यम से उसे इस्लाम से परिचित कराया गया था। वह यह जानकर चौंक गया कि मुसलमान भी यीशु में विश्वास करते हैं और उनका सम्मान करते हैं’।

अबू बक्र इस्लाम के बारे में और जानना चाहता था। इसी प्रक्रिया में उसकी पहचान कुछ मुस्लिमों से हुई। उनसे प्रभावित होकर उसने ईसाई धर्म त्याग कर इस्लाम ग्रहण कर लिया। इस बीच अमेरिकी इस्लामी स्कॉलर अनवर अल-अवलाकी के भाषणों को सुन कर वह कट्टरपंथी बना गया और फिर वह आईएस में शामिल हो गया।

आईएस में शामिल होने के बाद बेंगलुरु में करता रहा नौकरी

अबू बक्र आईएस में शामिल अन्य मलयाली लोगों की तरह ही हिज़्रा (देश छोड़ना) करना चाहता था, लेकिन उसे भारत वापस आना पड़ा क्योंकि खाड़ी देश मे जिस कंपनी के साथ वो काम करता था उससे उसका अनुबंध समाप्त हो गया था। भारत वापस आने के बाद उसने बेंगलुरु में एक कम्पनी में नौकरी शुरू कर दी।

इस बीच आईएस ने उसे लीबिया जाने के लिए कहा। चूँकि अबू बक्र एक इंजीनियर था और उसके पासपोर्ट में अब भी उसका ईसाई नाम ही दर्ज था, तो वह बड़ी आसानी से लीबिया में प्रवेश कर गया। लीबिया पहुँचने के तीन महीने बाद अबू बक्र एक ऑपरेशन में मारा गया।

सुरक्षा एजेंसियों ने अभी तक व्यक्ति की पहचान नहीं की है। यह भी ज्ञात नहीं है कि दस्तावेज़ में उल्लिखित घटनाएँ कब हुईं। सुरक्षा विशेषज्ञों ने पहले ही चेतावनी दी थी कि आईएस सीरिया और अफगानिस्तान में अपने ठिकाने नष्ट होने के बाद अपने आतंकी अभियानों का रुख अफ्रीकी देशों की ओर कर सकता है।

आईएस बना रहा भारतीय मुसलमानों को शिकार

सुरक्षा एजेंसियों द्वारा जारी किए गए आँकड़ो के अनुसार, वर्ष 2014 से 100 से ज्यादा भारतीय मुसलमान इराक और सीरिया जाकर आतंकी संगठन आईएस में शामिल हुए है।

50 भारतीय नागरिक आईएस में शामिल होने के लिए भारत छोड़ चुके हैं। वहीं, विदेशों में रहने वाले भारतीय मूल के अन्य 50 नागरिक भी अपना-अपना देश छोड़ कर इराक, सीरिया और अफगानिस्तान में जाकर इस्लामिक स्टेट से जुड़े हैं।

इससे पहले भी कई केरलवासी आईएस में शामिल होकर सीरिया और अफगानिस्तान में आतंकी संगठन के लिए काम कर रहे थे लेकिन यह पहली बार है जब लीबिया में ऐसा कुछ हुआ है।

आईएस ने वर्ष 2014 में लीबिया में विलायत (प्रांत) के गठन की घोषणा की थी और कई विदेशी लड़ाकों को लीबिया भेजा गया था, जिनमें सम्भावित रूप से ये ‘भारतीय इंजीनियर’ भी था।

आईएस ने दावा किया है कि केरल के इंजीनियर अबू बक्र ने अफगानिस्तान में कई ‘इतिशादी’ अभियानों में हिस्सा लिया था, जिनमें पिछले साल काबुल के एक गुरुद्वारे में सिखों पर हमला औऱ जलालाबाद की एक जेल पर हमला शामिल था।



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