लुधियाना कोर्ट ब्लास्ट: खालिस्तानी आतंकी जसविंदर मुल्तानी जर्मनी में गिरफ्तार, दिल्ली-मुंबई था अगला टारगेट

28 दिसम्बर, 2021 By: DoPolitics स्टाफ़
जर्मन पुलिस ने प्रतिबंधित संगठन एसएफजे के एक प्रमुख सदस्य जसविंदर सिंह मुल्तानी को गिरफ्तार किया है

23 दिसम्बर को लुधियाना कोर्ट में हुए आतंकी धमाके मामले में जर्मन पुलिस ने आतंकवादी संगठन सिख फॉर जस्टिस (SFJ) के आतंकवादी जसविंदर सिंह मुल्तानी को गिरफ्तार किया है। 45 वर्षीय जसविंदर सिंह मुल्तानी एसएफजे के संस्थापक गुरपतवंत सिंह पन्नू का करीबी सहयोगी है।

शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, खालिस्तान समर्थक आतंकवादी जसविंदर सिंह मुल्तानी ने 23 दिसंबर को सत्र अदालत विस्फोट में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। पंजाब के होशियारपुर जिले के मंसूरपुर गाँव के मूलनिवासी मुल्तानी ने भारत में आतंकी हमले करने के लिए पाकिस्तान स्थित तस्करों के अपने नेटवर्क का उपयोग करके भारत में हथियारों और विस्फोटकों की आपूर्ति की थी।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, भारत सरकार के अनुरोध पर मुल्तानी को जर्मन पुलिस ने एरफर्ट से उठाया था। नई दिल्ली और जर्मनी स्थित दूतावासों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने जर्मन अधिकारियों से खालिस्तान समर्थक कट्टरपंथी को गिरफ्तार करने का अनुरोध किया था।

सरकार को खुफिया इनपुट मिला था कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई ने पंजाब के ‘श्रेणी ए’ के वांछित गैंगस्टर और खालिस्तानी आतंकी, हरविंदर सिंह उर्फ ​​रिंदा संधू के साथ मुल्तानी को विधानसभा चुनावों में पंजाब को अस्थिर करने के लिए आतंकवादी हमले करने का काम सौंपा था।

मुल्तानी पर पाकिस्तानी की मदद से सीमा पार से हथियार और गोलाबारूद की तस्करी में शामिल होने का भी आरोप है। हाल की रिपोर्टों के अनुसार, मुल्तानी दिल्ली और मुम्बई सहित कुछ अन्य शहरों में आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए पंजाब स्थित गुर्गों के लिए पाकिस्तान से विस्फोटक सामग्री भेजने की योजना बना रहा था।

बता दें कि लुधियाना कोर्ट में 23 दिसंबर को हुए विस्फोट में एक व्यक्ति की मौत हो गई और कम से कम पांच अन्य घायल हो गए। प्रारंभिक जाँच से संकेत मिला था कि राज्य को अस्थिर करने के इरादे से जर्मनी स्थित खालिस्तान समर्थक आतंकवादी और पाकिस्तान स्थित एक आतंकी संगठन ने स्थानीय गैंगेस्टरों की मदद से घटना को अंजाम दिया है।

2007 में बना एसएफजे मुख्य रूप से यूएस-आधारित संगठन है, जो भारत के पंजाब में सिखों के लिए एक अलग मातृभूमि की माँग कर रहा है, जिसे ‘खालिस्तान’ कहा जाता है। पंजाब में अलगाव और हिंसक उग्रवाद को बढ़ावा देने के लिए गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत 2019 में भारत सरकार द्वारा इस संगठन पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।



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